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अब आवाज सुनकर और लार के सैंपल से जान जाएंगे कोरोना है या नहीं, जानिए कैसे।
Coronavirus Test: कोरोनावायरस का पता लगाने के लिए इजरायल के वैज्ञानिकों ने 4 नए तरीकों पर काम करने की बात कही है। इसके लिए वे अपने भारतीय समकक्षों के साथ काम करेंगे। कोरोना के जांच करने के ये चार तरीके यदि सफल साबित होते हैं, तो कोरोना को मात दी जा सकेगी। दो टेस्ट में लार के सैंपल लिए जाएंगे, जो कुछ ही मिनट रिजल्ट बता देंगे। तीसरे तरीके में व्यक्ति की आवाज से यह पहचाना जा सकेगा कि वह कोरोना से संक्रमित है या नहीं। चौथा तरीका होगा सांस के जरिए पहचानना। इसमें सांस के सैंपल को रेडियो वेव पर जांच (Coronavirus Test in hindi) करने के बाद संक्रमित होने का पता लगाया जाएगा।
इजरायली वैज्ञानिकों के अनुसार, वे दिल्ली के एम्स हॉस्पिटल में अपने इस शोघ पर कार्य करेंगे। हालांकि, इन टेस्ट के नए तकनीकों के पहले फेज की जांच इजरायल में हो चुकी है और अब फाइनल स्टेज की जांच भारत में की जानी है। इजरायल के डायरेक्टोरेट ऑफ डिफेंस रिसर्च एंड डेवेलपमेंट के प्रमुख डैनी गोल्ड के अनुसार, इस टेक्नीक में पॉलीएमिनो एसिड का इस्तेमाल होगा और इसका रिजल्ट सिर्फ आधे घंटे में ही पता चल जाएगा। भविष्य में इन 4 तरीकों के जरिए कोरोना का टेस्ट करना बेहद आसान हो जाएगा। घर, ऑफिस, मॉल, एयरपोर्ट कहीं भी किसी की भी जांच मिनटों में की जा सकेगी।
बायोकेमिकल टेस्ट को घर पर ही कर सकते हैं। यह सस्ता भी होगा, जिसका परिणाम 30 मिनट में सामने आ जाएगा। तीसरा तकनीक है आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। इस तकनीक में व्यक्ति की आवाज सुनकर पता लगाया जाएगा कि उसे कोरोना है या नहीं। चूंकि, कोरोनावायरस व्यक्ति के रेस्पिरेटरी सिस्टम पर हमला करता है, इसलिए यह टेक्नीक रेस्पिरेटरी सिस्टम के आधार पर काम करने में सक्षम है। इसके जरिए फोन पर भी किसी की आवाज को सुनकर यह पहचाना सकेगा कि व्यक्ति संक्रमित है या नहीं। ब्रीद एनलाइजर के जरिए भी सांस की जांच की जाएगी। इसमें व्यक्ति को एक ट्यूब में सांस लेना होगा। इस ट्यूब को एक मशीन में डाला जाएगा। यह मशीन टेराहर्ट्ज रेडियो फ्रिक्वेंसी और एल्गोरिदम को पहचानकर मिनटों में बताने में समक्ष होगा कि व्यक्ति कोविड-19 से संक्रमित है या नहीं।
खबर है कि इस प्रोजेक्ट पर प्रमुख रूप से काम डैनी गोल्ड और भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजयराघवन करेंगे। फिलहाल, इजरायली और भारतीय वैज्ञानिक मिलकर इन सभी टेक्नीक्स पर काम करेंगे। काम पूरा होने के बाद इन्हें लगभग 5 हजार लोगों पर आजमाया जाएगा, ताकि ये पता लगाया जा सके कि ये सभी तकनीक सफल हैं या नहीं।