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Written By: Anshumala | Updated : October 26, 2018 9:50 AM IST
Prolonged screen time can have a negative impact on children's health.
आजकल अधिकतर बच्चे साइबरबुलिंग का शिकार हो रहे हैं। ''साइबरबुलिंग'' किसी प्रीटीन, टीन द्वारा अपने ही स्कूल के किसी दूसरे बच्चे, प्रीटीन या टीन को इंटरनेट, इंटरैक्टिव, डिजिटल तकनीकों, मोबाइल फोन के जरिए गलत और गंदे मैसेज भेजना, सेक्स संबंधित वीडियो भेजना या पीड़ित करना, धमकाना, परेशान, अपमानित व लज्जित करना होता है। लड़कों का लड़कियों को सेक्स संबंधी संदेश भेजना, फेसबुक पर लड़कियों का दूसरे बच्चों के बारे में अफवाह फैलाना, स्कूल के पुराने छात्रों का किसी नए बच्चे को साइबर-हैरास करने जैसी साइबरबुलिंग बच्चों में क्रेज सा बनता जा रहा है। इसका अधिक उपयोग बच्चों का भविष्य खराब करने के साथ उन्हें गलत राह पर भी ढकेल सकता है। साइबरबुलिंग का शिकार हुए अधिकतर बच्चे आत्महत्या भी करते पाए गए हैं।
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साइबरबुलिंग करने वाले बच्चों व इसका शिकार हुए बच्चों के पेरेंट्स को विशेष ध्यान देने की जरूरत है। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि मिडिल स्कूल के बच्चे साइबरबुलिंग में अधिक शामिल होते पाए गए हैं। यदि आपको भी लगता है कि आपका बच्चा इन चीजों में शामिल है या इंटरनेट का गलत इस्तेमाल कर रहा है तो उन्हें रोकें। ऐसे समय में आपको बच्चों के साथ सपोर्टिव होना चाहिए। स्कूलबुलिंग को रोकने के लिए स्कूल गाइडेंस काउंसलर से बताएं। पीड़ित बच्चे को प्यार व सपोर्ट दें, सुरक्षा का अहसास दिलाएं क्योंकि ऐसा नहीं करने पर कई बच्चे शर्म के कारण आत्महत्या कर लेते हैं।
साइबरबुलिंग को रोकने के लिए इन बातों को ध्यान में लाएं
- बच्चों का एलेक्ट्रॉनिक चीजों के इस्तेमाल पर रोक लगाएं।
- साइबरबुलिंग में शामिल बच्चे अक्सर इन बातों को पेरेंट्स से छिपाते हैं। उन्हें यह आभास दिलाएं कि वे जो भी करते हैं, उसकी पूरी जानकारी आपको है। उनकी बातों को शांति व सहानुभूति से सुनें और सपोर्ट करें। इंटरनेशनल डे ऑफ गर्ल चाइल्ड : इन 6 समस्याओं से गुजरती हैं टीनएज गर्ल्स, यूं करें मांएं समाधान
- यदि बच्चा साइबरबुलिंग का शिकार हो रहा है तो उन सभी मैटीरियल का प्रिंट रखें और सभी इलेक्ट्रॉनिक फाइल्स को सेव कर लें। यदि स्कूल का ही कोई बच्चा ऐसा कर रहा है तो उसके पेरेंट्स और स्कूल प्रशासन को यह सबूत के तौर पर दिखाएं। बच्चे को कोई डराने या अपहरण करने की धमकी देता हो तो पुलिस से संपर्क करें।
आपका बच्चा ही बुली हो तो उसके सेल फोन, कंप्यूटर का इस्तेमाल कुछ दिनों के लिए बंद कर दें। © Shutterstock
- यदि आपका बच्चा ही बुली हो तो उसके सेल फोन, कंप्यूटर का इस्तेमाल कुछ दिनों के लिए बंद कर दें। इससे आप अपने बच्चे के साथ दूसरे बच्चे की जिंदगी बर्बाद होने से बचा सकते हैं।
- जब आपका बच्चा कंप्यूटर पर अधिक समय व्यतीत करे तो यह जानने की कोशिश करें कि वह क्या कर रहा है, किससे चैटिंग कर रहा है।
- इस गलतफहमी में न रहें कि कंप्यूटर व इंटरनेट का प्रयोग सिर्फ शिक्षा का माध्यम भर है। यह भी न सोचें कि बच्चा घर में इंटरनेट का प्रयोग सही ढंग से ही करेगा। बच्चे से जुड़ी हर क्षेत्र की बातों की जानकारी रखें, उसमें शामिल हों, उनसे बातें करें। उनके इंटरनेट एक्टिविटी टाइम पर ध्यान दें। चाहें तो इंटरनेट सेक्योरिटी सॉफ्टवेयर को अपने कंट्रोल में रखकर ही इंस्टॉल कराएं।
बच्चे भी इन बातों का रखें ध्यान
- अपनी व्यक्तिगत जानकारी जैसे- पता, फोन नंबर, स्कूल का नाम, लोकेशन, पेरेंट्स का नाम, पर्सनल फोटोग्राफ आदि इंटरनेट पर कभी भी मत डालो। कई वेबसाइट या अन्य ऑनलाइन सर्विसेज स्पेशल कॉनटेस्ट या फ्री गिफ्ट देने के लिए इस तरह की जानकारी पूछते हैं। कहीं आपका बच्चा तो नहीं करता स्मोकिंग, जानने और इस लत को छुड़ाने के लिए आजमाएं ये तरीके
- किसी से भी ऑनलाइन कॉनटैक्ट करना हो तो अपना ईमेल एड्रेस दो। अनजाने ईमेल एड्रेस से आए मेल को खोलने से बचो। यदि तुम्हें धमकाने वाले संदेश या सेक्सुअल संबंधि कोई मैसेज आता है तो अपने पेरेंट्स को जरूर बताओ।
- बिना पेरेंट्स को बताए किसी भी ऐसे व्यक्ति से मिलने मत जाओ जिससे तुम ऑनलाइन बात करते हो या फिर पेरेंट्स को साथ लेकर जाओ।
- चैट रूम में मिलने वाले अंजान लोगों से तुरंत दोस्ती मत करो। ऐसे लोग तुम्हें तुम्हारे परिवार, दोस्तों, शिक्षकों के बारे में उलटी-सीधी बातें कर तुम्हें भटका सकते हैं।
- अश्लील और अनुचित एसएमएस का जवाब मत दो। अपने मोबाइल सर्विस प्रोवाइडर का नंबर रखो और इस तरह के एब्यूसिव मैसेज के बारे में रिर्पोट करो।