क्या दवाओं का मूल्य नियंत्रण रोगियों की सुरक्षा के साथ समझौता है?

एक रिपोर्ट के अनुसार, छोटे बच्चों की खुराक उपलब्ध नहीं है और परेशान अभिभावकों को अपने शिशुओं की जिंदगी बचाने के लिए वयस्कों की खुराक देने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

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Written By: Editorial Team | Published : July 27, 2018 11:51 AM IST

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश में जिंदगी बचाने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण दवा की कमी हो रही है और इसकी वजह भारतीय दवाइयों की कीमतों पर नियंत्रण लगाकर मूल्य कम करना है। यह दवा दिल की बीमारियों से जूझ रहे शिशुओं के लिए है। पेशेंट सेफ्टी एंड एक्सेस इनेशियेटिव ऑफ इंडिया फांउडेशन के संस्थापक प्रोफेसर बेजोन मिश्रा ने कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि जब भी दवाइयों और अन्य मेडिकल उपकरणों पर मूल्य नियंत्रण लगाया जाता है तो इसका उद्देश्य अच्छा होता है कि मरीजों को मेडिकल सुविधाएं किफायती मिलें ताकि कोई भी मरीज इलाज से वंचित न रह सके। लेकिन, जब हम हेल्थकेयर की बात करते हैं तो इसका मतलब सिर्फ रोगियों की किफायत से नहीं बल्कि गुणवता, सुरक्षा और पहुंच जैसे मुद्दे बहुत महत्वपूर्ण होते हैं।"

उन्होंने कहा, "एक अखबार की रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि छोटे बच्चों की खुराक उपलब्ध नहीं है और परेशान अभिभावकों को अपने शिशुओं की जिंदगी बचाने के लिए वयस्कों की खुराक देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यह सुरक्षा के लिहाज से कतई ठीक नहीं है। दवाइयों की कीमत कम करके निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को खत्म किया जा रहा है जिससे उपभोक्ताओं के पास समझौता करने के सिवा कोई और विकल्प नहीं है और इससे न सिर्फ दवाइयों की पहुंच सीमित हो रही है बल्कि असुरक्षित तरीकों को अपनाकर रोगियों की सुरक्षा को भी ताक पर रखा जा रहा है।"

कीमतों पर नियंत्रण की नीति गुणवत्ता में निवेश करेगी और विकल्पों में सुधार होगा, इस प्रश्न पर प्रोफेसर बेजोन मिश्रा ने कहा, "अगर हम कीमतों के नियंत्रण के फायदों पर गौर करें तो यह बहुत कम समय के लिए कुछ खास उपकरणों या दवाइयों की कीमतों को कम कर सकते हैं, जिसका फायदा आबादी का छोटा वर्ग ले सकता है। लेकिन जो जीवन रक्षक दवाइयां कीमत नियंत्रण के कारण मार्केट में उपलब्ध नहीं हैं या लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही हैं, उसे रोकने की प्राइसिंग रेगुलेटर के पास कोई शक्ति नहीं है। ऐसे में कीमतों पर नियंत्रण से रोगियों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है और इससे गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा।"

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार कीमतों के नियंत्रण को अपनी उपलब्धि मान रही है जबकि यह समझने की जरूरत है कि क्या इसका फायदा वास्तव में रोगियों को मिल रहा है या नहीं। जब सरकार आयुष्मान भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य बीमा कार्यक्रम को लेकर आ रही है तो ऐसे में हेल्थकेयर के अन्य स्तंभों पर भी ध्यान देने की जरूरत है ताकि दुनिया की सफल कहानियों में यह भी शुमार हो।

स्रोत: IANS Hindi.

चित्रस्रोत: Shutterstock.

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