नॉन स्टिक बर्तनों में खाना पकाने से हो सकती हैं ये 4 समस्याएं, आज ही जानें इस्तेमाल का सही तरीका

नॉन स्टिक बर्तनों के नुकसान : नॉन स्टिक बर्तनों में खाना पकाने का गलत तरीका आपको बीमार बना सकता है। शोध बताते हैं कि इससे आयरन की कमी और कई समस्याएं हो सकती हैं।

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Written By: Pallavi Kumari | Updated : May 11, 2022 9:33 AM IST

आज के समय में जब हम डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी समस्याओं को लेकर परेशान हैं वहीं, नॉन स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल सेहत के लिए कई फायदों का दावा करते हैं। लेकिन आपको जान कर हैरानी हो सकती है कि नॉन स्टिक बर्तनों कोटिंग आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है। दरअसल, ये रासायनिक रूप से पॉलीटेट्राफ्लुओरोएथिलीन (PTFE) है जो कि सेहत के लिए सुरक्षित नहीं है। इसके अलावा पबएमडी (PubMed) और रिसर्च गेट(Research Gate) नामक रिसर्च जर्नल में छपे कुछ शोध बताते हैं। इसके अलावा पहले से ही नॉन स्टिक बर्तनों के इस्तेमाल को आयरन की कमी और अन्य कॉग्‍निटिव डिसॉर्डर से सभी जोड़ कर देखा गया है। तो, आइए विस्तार से जानते हैं नॉन स्टिक बर्तनों के नुकसान (non stick pan side effects)

क्या सेहत के लिए नुकसानदेह हैं नॉन स्टिक बर्तन-Is non-stick cookware harmful to health in hindi

नॉनस्टिक पैन के बारे में बात करते समय लोग आमतौर पर जिस रसायन से चिंतित होते हैं, वह है पेरफ्लुओरूक्टेनोइक एसिड(PFOA)। इसका उपयोग 2000 के दशक की शुरुआत में और इससे पहले टेफ्लॉन कोटिंग्स के निर्माण में किया गया था और 2013 तक इसे पूरी तरह से समाप्त कर दिया गया था। अगर आप बड़ी मात्रा में उक्त धुएं में सांस लेते हैं तो यह रसायन "पॉलिमर फ्यूम फीवर" नामक कुछ स्वास्थ्य स्थितियों को पैदा कर सकता है। इसके अलावा पैन की लगभग पूरी कोटिंग लंबे समय के लिए सेहत पर असर डालते हैं।

दरअसल, PFOA रसायनों के समूह का हिस्सा है जिसे PFAS या पेरफ़्लुओरोआल्किल और पॉलीफ़्लुओरोआल्किल पदार्थों के रूप में जाना जाता है। ये ऐसे कैमिकल हैं जो कि पर्यावरण में टूट कर मिलते नहीं हैं और जब आप लगातार इन बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं तो इसके कण शरीर में घुलने लगते हैं। अमेरिकन कैंसर सोसाइटी की रिपोर्ट है कि नॉनस्टिक कुकवेयर पीएफओए एक्सपोजर का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और मनुष्यों में कैंसर का खतरा पैदा करते हैं। जिससे कई बीमारियों हो सकती हैं। जैसे कि

1. शरीर में आयरन की कमीहो सकती है जिससे खून बनने में समस्या हो सकती है।

2. नॉनस्टिक पैन के कुछ तत्व दिमागी बीमारियों जैसे कि कॉग्‍निटिव डिसॉर्डर का कारण बन सकते हैं।

3. इसके अलावा ये थायरॉइड की समस्या को ट्रिगर कर सकता है।

4. साथ ही लंबे समय तक इसका इस्तेमाल हड्डियों और मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकता है।

नॉनस्टिक बर्तनों को इस्तेमाल करने का सही तरीका

अगर आप नॉनस्टिक बर्तनों का इस्तेमालकरते हैं तो इसका सही तरीका जानना बेहद जरूरी है। जैसे कि

- सामान्य खाना पकाने के तापमान से थोड़ी कम आंच पर नॉनस्टिक बर्तनों पर खाना पकाएं। यानी कि धीमी आंच पर।आमतौर पर लगभग 500 डिग्री फ़ारेनहाइट पर।

-एक खाली पैन को पहले से गरम नहीं करना चाहिए और दूर नहीं जाना चाहिए क्योंकि गर्म होने पर रसायनों को छोड़ने की अधिक संभावना हो सकती है और कोटिंग के कैमिकल्स खाने में मिल सकते हैं।

-कोटिंग को खरोंचने से बचना चाहिए ।

इसके अलावा अगर आपको कोई भी ऐसी चीज बनानी है जिसे बनने में ज्यादा समय और तापमान लगेगा तो लोहे के बर्तन या फिर स्टेनलेस स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल करें। ये सुक्षित हैं और सेहत के लिए फायदेमंद भी।

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