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Written By: Yogita Yadav | Published : October 24, 2018 3:30 PM IST
दूध और चावल में मौजूद तत्व चांदनी में और बेहतर क्रिया करते हैं, जो सेहत के लिए उत्तम है। © Shutterstock.
शरद पूर्णिमा को कोजगारी पूर्णिमा भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन रात भर जागने के अलावा खीर भी बनाई जाती है। विशेष पर्व-त्योहारों में शरद पूर्णिमा का भी विशेष महत्व है। इस दिन खीर बनाकर रात भर चंद्रमा की चांदनी में रखने का रिवाज है। कहा जाता है कि इस रात चंद्रमा से अमृत बरसता है। पर क्या इन मान्यताओं के पीछे कोई वैज्ञानिक कारण भी हैं ? आइए जानें - इस मौसम का तोहफा है मेथी, सब्जी हो या सूप जैसे चाहें करें इस्तेमाल
ये है मान्यता
श्रीमद्भागवत महापुराण के अनुसार चन्द्रमा को औषधि का देवता माना जाता है। इस दिन चांद अपनी 16 कलाओं से पूरा होकर अमृत की वर्षा करता है। मान्यताओं से अलग वैज्ञानिकों ने भी इस पूर्णिमा को खास बताया है, जिसके पीछे कई सैद्धांतिक और वैज्ञानिक तथ्य छिपे हुए हैं। इस पूर्णिमा पर चावल और दूध से बनी खीर को चांदनी रात में रखकर प्रात: 4 बजे सेवन किया जाता है। इससे रोग खत्म हो जाते हैं और रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
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क्या है वैज्ञानिक कारण
वैज्ञानिकों के अनुसार दूध में लैक्टिक अम्ल और अमृत तत्व होता है। यह तत्व किरणों से अधिक मात्रा में शक्ति का शोषण करता है। चावल में स्टार्च होने के कारण यह प्रक्रिया और भी आसान हो जाती है। इसी कारण ऋषि-मुनियों ने शरद पूर्णिमा की रात्रि में खीर खुले आसमान के नीचे रखने का विधान किया है और इस खीर का सेवन सेहत के लिए महत्वपूर्ण बताया है। इससे पुनर्योवन शक्ति और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह परंपरा विज्ञान पर आधारित है।
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चांदी का विशेष महत्व
एक अन्य वैज्ञानिक शोध के अनुसार इस दिन दूध से बने उत्पाद का चांदी के पात्र में सेवन करना चाहिए। चांदी में प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है। इससे विषाणु दूर रहते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम 30 मिनट तक शरद पूर्णिमा का स्नान करना चाहिए। इस दिन बनने वाला वातावरण दमा के रोगियों के लिए विशेषकर लाभकारी माना गया है।