क्या हनीप्रीत और राम रहीम का मामला Stockholm Syndrome है?

जब बाबा उसका शोषण कर रहा था, तो हनीप्रीत उसकी मुरीद क्यों थी?

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Written By: Editorial Team | Published : October 9, 2017 11:44 AM IST

चालीस दिन तक पीछा करने के बाद, डेरा सचा सौदा के प्रमुख राम रहीम सिंह इंसा की करीबी हनीप्रीत इंसान को आखिरकार हरियाणा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। राम रहीम की 'मुंहबोली बेटी' हनीप्रीत अब पुलिस हिरासत में है और उस पर राजद्रोह का मुकदमा चलाने की तैयारी है। लंबे समय से इसकी पहचान और बाबा के साथ इसका रिश्ता एक रहस्य बना हुआ था। बाबा राम रहीम की मुंहबोली बेटी हनीप्रीत बॉलीवुड एक्ट्रेस कैटरीना कैफ जैसा फिगर बनाकर बॉलीवुड में धमाकेदार एंट्री करना चाहती थी। इसके लिए वह खूब मेहनत करती थी। इसकी पर्सनल वेबसाइट में मुख्य रूप से इसे एक संपादक, अभिनेत्री, निदेशक और एक परोपकारी के रूप में दर्शाया गया है।

इसका असली नाम प्रियंका तनेजा था और इसने बाबा राम रहीम के इशारे पर साल 1999 में विश्व गुप्ता नाम के व्यक्ति से विवाह किया था। अगर हनीप्रीत और उसका पति चाहते तो बाबा का शिकार नहीं होते। खुद को हनीप्रीत का बाप बताने वाला बाबा सालों से उसका कथित रूप से शोषण कर रहा था। लेकिन यह विवाह इनके अवैध संबंधों को छिपाने के लिए किया गया था।

बाबा के संपर्क में आने के बाद हनीप्रीत को डेरे में उसे एक उच्च स्थान मिल गया था। जाहिर है उसकी पॉवर भी बढ़ गई थी। हालांकि उसने सोशल मीडिया भी कभी बाबा के साथ अपने रिश्ते को जाहिर नहीं किया। वो अपने आपको उसकी बेटी ही बताती रही। खैर अब यह कहा जा रहा है कि अगर रेप का आरोप सही साबित होता है, तो यह वास्तव में हनीप्रीत के लिए दुखद होगा।

लेकिन राम रहीम के कट्टर समर्थक बताते हैं कि वह निर्दोष है और उनके प्रति उसकी दृढ़ निष्ठा है। इन लक्षणों से पता चलता है कि संभावित रूप से यह मामला स्टॉकहोम सिंड्रोम का है। इसका मतलब यह है कि शोषण करने वाले और शोषित होने वाले के बीच में एक सकारात्मक जुड़ाव है।

मुंबई स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल में कंसल्टेंट साइकोलोजिस्ट डॉक्टर परूल टैंक आपको इस स्थिति के बारे में विस्तार से बता रही हैं। स्टॉकहोम सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति होती है जब अगुवा होने वाले व्यक्ति को अपने अपहर्ता के साथ सहानुभूति हो जाती है और उस पर विश्वास हो जाता है।

सवाल यह है क्या हनीप्रीत का बाबा द्वारा लगातार शोषण की वजह से वो स्टॉकहोम सिंड्रोम का शिकार बन गई? डॉक्टर के अनुसार, इस मामले को स्टॉकहोम सिंड्रोम के रूप में परिभाषित करना मुश्किल है क्योंकि हमें इस मामले की ज्यादा जानकारी नहीं है। लेकिन इस मामले में यह एक कोण हो सकता है।

डॉक्टर टैंक के अनुसार, इस बात का पता लगाना मुश्किल है कि हनीप्रीत को ऐसी क्या प्रेरणा मिली कि वो बाबा की वफादार बन गई। यह कहना मुश्किल है कि उसे साथ में रहने की कोई धमकी मिली थी या वो इस रिश्ते से कुछ और हासिल करना चाहती थी। लेकिन इनके रिश्ते को देखते हुए, जो बातें सामने हैं उनसे यही लगता है कि यह मामला स्टॉकहोम सिंड्रोम का है।

अगर वास्तव में हनीप्रीत को अपने शोषणकर्ता यानी बाबा से सहानुभूति है, तो उसकी गिरफ्तारी से काफी कुछ साबित हो सकता है। डॉक्टर के अनुसार, स्टॉकहोम सिंड्रोम के पीड़ित लोगों को शोषण करने वाले व्यक्ति से दूर होने पर उसे इस स्थिति से बाहर आने में मदद मिल सकती है।

डॉक्टर के अनुसार, अगर शोषित होने वाला व्यक्ति दोबारा ऐसी किसी स्थित का शिकार नहीं होता है, तो उसे सिंड्रोम से मुक्त होने का मौका मिल सकता है। क्योंकि यह एक तरह का आघात है, इसलिए पीड़ित को बहुत अधिक परामर्श और ट्रॉमा थेरेपी की जरूरत हो सकती है ताकि वो फिर से नॉर्मल महसूस कर सके।

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अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Honeypreet Insaan’s personal website

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