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क्या आपको भी ''गे या लेस्बियन'' एक बीमारी लगती है ?

क्या आपको भी लगता है कि दीवारों और अखबारों में विज्ञापन देने वाले समलैंगिकता का इलाज कर सकते हैं ?

भारतीय समाज में अभी भी कुछ ऐसी सोच जिंदा हैं जो लोगों के निजी जीवन में दखल देना चाहती हैं। आपने कभी ध्यान से देखा है रेल या बस से जाते हुए दीवारों पर लिखे उन विज्ञापनों को जिसमें लिखा होता है ''सेक्स रोगी मिले हकीम आलम से ! संकोच न करें सेक्स की हर समस्या का करते हैं इलाज हकीम आलम !'' हाल-फिलहाल शहरों में भी यह धंधा खूब फलने-फूलने लगा है।

समलैंगिकता का इलाज करने वाले विज्ञापन आप अखबार में देख सकते हैं। कभी आप भी उन विज्ञापन दाताओं से फोन करके बात करें और पूंछे की समलैंगिकता क्यों होती है ? वो ऐसे कारण बता देंगे की आप के होश उड़ जायेंगे। जैसे वो यह कह सकते हैं कि आपकी मां आपको बहुत प्यार करती है इसलिए आप समलैंगिक हो गये या आप गर्ल्स स्कूल में पढ़ते थे इसलिए लेस्बियन हो गये।

समलैंगिक संबंध अपराध नहीं : सर्वोच्च न्यायालय

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क्या आपको भी लगता है कि समलैंगिकता कोई बीमारी है ? क्या आपको भी लगता है कि दीवारों और अखबारों में विज्ञापन देने वाले समलैंगिकता का इलाज कर सकते हैं ? क्या सचमुच में समलैंगिक इंसान का कोई इलाज है ?

विश्व में कई देशों में इसकी मान्यता है। इसे कोई बीमारी नहीं समझा जाता है। एक्सपर्ट्स की मानें तो यह कोई बीमारी नहीं है। समलैंगिक होना सामान्य इंसान से अलग होना है न की बीमारी होना है। इंडियन साइकैट्रीक सोसायटी ने एक बयान में यह कह चुका है कि समलैंगिकता को बीमारी समझना गलत है और इस तरह की सोच से बाहर निकलना चाहिए।

LGBTQI समुदाय को राष्ट्र का गौरव बनाने का समय।

भारत में अभी भी कई ऐसे कानून हैं जो बेतुके हैं, आईपीसी की धारा 377 भी उन्हीं में से एक है जो समलैंगिक सेक्स को अप्राकृतिक और दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखता था। धारा 377 को समाप्त करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाओं के बाद आज फैसला समलैंगिकता के पक्ष में आया है।

क्या समलैंगिकता हार्मोंस की वजह से होती है ?

भारतीय समाज हेल्थ और सेक्स को लेकर कई तरह के भ्रम में रहता है। अक्सर समाज में इस बात की मान्यता है कि जो लोग इस तरह के इंसान हैं उनके हार्मोंस में कुछ गड़बड़ है। इस मामले एक्सपर्ट्स की मानें तो इसका हार्मोंस से कोई लेना देना नहीं है। एक्सपर्ट्स तो यह भी कहते हैं कि सच बात तो यह है कि हार्मोंस का सेक्स से कोई संबंध नहीं होता है।

भारत में शिक्षा का स्तर भी बहुत कम है जो समाज अभी अनपढ़ है वहां तो इस तरह के संबंध जन्म लेते ही दम तोड़ देते हैं। कुछ लोग कुंठा की वजह से आत्महत्या भी कर लेते हैं। उनको कोई यह बताने वाला नहीं होता कि इस तरह का आकर्षण सामान्य है यह कोई बीमारी नहीं है।

क्या लड़कियों के साथ रहने से कोई लड़की लेस्बियन हो जाती है ? 

भारतीय समाज में कुछ लोगों को लगता है जो लड़कियां हमेशा लड़कियों के साथ रहती हैं वो लेस्बियन हो जाती हैं। कुछ लोग तो यह भी मानते हैं जो लड़के हास्टल में रहते हैं वो गे हो जाते हैं। लेकि क्या आपने कभी सोचा जहां लड़की और लड़के एक साथ पढ़ते हैं वहां कोई गे या लेस्बियन नहीं होता है ?

अगर आपको भी इस तरह का कोई भी भ्रम है तो आपको इसके बारे में अच्छे डाक्टर से सम्पर्क करना चाहिए और अपने भ्रम को दूर करना चाहिए। समलैंगिकता किसी भी तरह की बीमारी नहीं है। यह एक अलग तरह का आकर्षण है। वह लड़का या लड़की किसी को भी हो सकता है।

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