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Written By: Pallavi Kumari | Published : May 11, 2022 11:13 AM IST
निपाह वायरस (Nipah virus in hindi) चमगादड़ों से फैलने वाला वायरस है जो कि इंसानों को भी अपना शिकार बना सकता है। इसलिए केरल में इसे लेकर अलर्ट जारी किया गया है क्योंकि इस महीने से चमगादड़ों के प्रजनन का समय शुरू हो रहा है। केरल के स्वास्थ्य विभाग ने राज्य में निपाह वायरस के लिए निगरानी तेज कर दी है और अस्पतालों से वायरल संक्रमण के समान लक्षणों की रिपोर्ट करने वाले रोगियों की निगरानी करने को कहा है। साथ ही
वन एवं पशुपालन विभागों के सहयोग से वायरस के खिलाफ सतर्कता बरतने का भी निर्देश है। बता दें कि निपाह वायरस की मृत्यु दर अन्य वायरल संक्रमणों, यहां तक कि कोविड से भी अधिक है। यह एक जूनोटिक वायरस है, जिसका अर्थ है कि यह जानवरों से इंसानों में फैल सकता है।
इसके अलावा निपाह वायरस के फैलने को लेकर कई सारी बातें और तथ्य फैले हुए हैं। लेकिन इस वायरस के बारे में जानने वाले आम लोगों में इसे लेकर बड़ी कम जानकारी है। बहुत से लोगों को लगता है कि निपाह वायरस फलों को बिना धोए खाने से भी फैलता है (is fruits can spread nipah)? पर सवाल ये है कि क्या तथ्य सही है? तो, कुछ लोगों का कहना है कि ये हवा के माध्यम से लोगों में फैलता है। लेकिन सवाल ये है कि आखिरकार ये वायरस इंसानों में फैलता कैसे है? आइए, जानते हैं।
निपाह वायरस ज्यादातर फ्रूट बैट(fruit bats) से फैलता है। ये फ्रूट बैट असल में चमगादड़ के ही एक प्रकार हैं। दरअसल, चमगादड़ फलों पर अपनी लार छोड़ते हैं। फिर इन फलों को खाने के बाद यह वायरस जानवरों और मनुष्यों में फैल जाता है। इसलिए गिरे हुए आधे-अधूरे फलों को बिना धोए खाना बहुत खतरनाक है। अगर हम खाने से पहले फलों को नहीं धोते हैं, तो वायरस जानवरों से इंसानों में फैल सकता है।
निपाह वायरस कैसे फलता है इसे लेकर हमें कुछ बातों पर खास ध्यान देना होगा। जैसे कि इस वायरस की शुरुआत कैसे हुई। तो, ये वायरस सबसे पहले मलेशिया और सिंगापुर से शुरू हुआ था जहां ये बीमार सूअरों के द्वारा इंसानों में फैला था। माना जाता है कि तब ये सूअरों के लार से आम लोगों में फैला था। उसके बाद बांग्लादेश और भारत में इसके प्रकोप देखा गया। इस दौरान पाया गया कि जिन फलों को चमगादड़ों ने खाया था या वे इस पर बैठे थे और लार या पेशाब छोड़ गए, उन फलों को लोगों ने खाया और उनमें निपाह वायरस फैला। उस समय ये खजूर से फैला था। इसलिए हम मोटे तौर पर ये कह सकते हैं कि
- निपाह वायरस दूषित फलों को खाने से फैलता है।
-ये सूअर, घोड़े, बकरी,भेड़, बिल्ली और कुत्तों जैसे जानवरों के द्वारा भी फैल सकता है।
-संक्रमित जानवरों या उनके शरीर से तरल पदार्थ जैसे रक्त पेशाब या लार के सीधे संपर्क में आना से भी फैलता है।
-संक्रमित जानवरों के शरीर के तरल पदार्थ से दूषित भोजन से भी ये वायरस फैल सकता है।
-इन सबके अलावा किसी संक्रमित व्यक्ति या उसके शरीर के तरल पदार्थ जैसे नाक या छींक की बूंदें के साथ निकट संपर्क में रहने से भी ये वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकता है।
निपाह वायरस के लक्षण आमतौर पर एक्सपोजर के 4 से 14 दिनों के भीतर दिखाई देते हैं और इसमें लक्षण शामिल हो सकते हैं, जैसे कि
-बुखार
-खांसी
-गला खराब होना
-सांस लेने में कठिनाई
-उल्टी करना
इसके अलावा एन्सेफलाइटिस या मस्तिष्क की सूजन हो सकती है जो भटकाव, उनींदापन और भ्रम जैसी समस्याओं का कारण बनती है। 24 से 48 घंटों के भीतर व्यक्ति कोमा में भी जा सकता है। इसलिए डॉक्टर से तुरंत दिखाने में भी फायदा है।
निपाह वायरस से बचाव के लिए फिलहाल कोई टीका नहीं है। इसलिए लोगों में संक्रमण दर कम करने जागरूकता बेहद जरूरी है। इसलिए कुछ बातों को जरूर ध्यान में रखें। जैसे कि
-चमगादड़ को खजूर के रस और अन्य ताजे खाद्य पदार्थों से दूर रखना
-खाने से पहले सभी फलों को अच्छी तरह से धोकर छील लें और तभी खाएं।
-किसी भी प्रकार के जूठे फलों को खाने से बचें। खास कर कि वो पेड़ से तोड़ कर आए हो तो।
-बीमार जानवरों जैसे कि संक्रमित सूअरों और कुत्ते आदि से दूर रहें।
-हर बार कुछ खाने से पहले अपने हाथों की सफाई करते रहें और सैनिटाइजेशन का खास ख्याल रखें।
फिलहाल इस वायरस का कोई इलाज नहीं है। इसलिए हमें इस अत्यधिक संक्रामक वायरस को गंभीरता से लेना होगा। एक बार जब यह वायरस मानव परिसंचरण में आ जाता है, तो यह मानव-से-मानव में संचारित होना शुरू हो जाता है और संचरण इतना तेज होता है कि यह फैल सकता है। इसलिए इसकी उत्पत्ति को शुरुआत में ही पहचान लेना बहुत जरूरी है और लक्षणों को देखते ही अपने डॉक्टर से संपर्क करें।