16 साल बाद अपने पैरों पर चल सकी इराकी बच्ची, ''स्पॉन्डिलो एपीफेसल डिस्प्लेसिया'' से थी पीड़ित

सजीदा सलाल हातेम स्पॉन्डिलो एपीफाइसेल डिस्प्लेसिया से पीड़ित थी, जो इनहेरिटेड बोन ग्रोथ डिसऑर्डर है। इसका असर स्पाइन (स्पॉन्डिलो) और हाथों-पैरों की लंबी हड्डियों (एपीफायसेज) पर पड़ता है।

WrittenBy

Written By: Editorial Team | Published : August 14, 2018 9:37 AM IST

नोएडा के जेपी हॉस्पिटल के इंस्टिट्यूट ऑफ ऑर्थोपेडिक्स के एसोसिएट डायरेक्टर डॉ. गौरव राठौड़ के नेतृत्व में आर्थोपेडिक सर्जनों की एक टीम ने 16 वर्षीय सजीदा सलाल हातेम की मुश्किल हिप एंड नी करेक्टिव रीअलाईनमेन्ट सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है।

इराक की रहने वाली यह बच्ची 16 साल बाद अपने पैरों पर चल पाने में सक्षम हुई है। यह बच्ची जन्मजात आनुवांशिक बीमारी ''स्पॉन्डिलो एपीफेसल डिस्प्लेसिया'' से पीड़ित थी, जिसका असर उसकी हड्डियों (स्केलेटल सिस्टम), खासतौर से रीढ़ की हड्डी एवं हाथ-पैर की हड्डियों पर पड़ा। इसके कारण उसका कद भी छोटा रह गया। उसके घुटने 90 डिग्री पर और शरीर जमीन की ओर 45 डिग्री पर मुड़ा हुआ था। चिकित्सकों ने यहां सफलतापूर्वक उसके कूल्हे और घुटनों की करेक्टिव री-अलाइनमेंट सर्जरी की है।

एक बयान में डॉ. राठौड़ ने कहा है, "सजीदा सलाल हातेम स्पॉन्डिलो एपीफाइसेल डिस्प्लेसिया से पीड़ित थी, जो इनहेरिटेड बोन ग्रोथ डिसऑर्डर है। इसका असर स्पाइन (स्पॉन्डिलो) और हाथों-पैरों की लंबी हड्डियों (एपीफायसेज) पर पड़ता है। मैं 2016 में पहली बार सजीदा से मिला था। तब उसका शरीर ऐसी स्थिति में था जैसे भ्रूण का विकास ठीक से न हुआ हो। उसकी पीठ मुड़ी हुई थी, सिर झुका हुआ था, हाथ-पैर मुड़े हुए थे और धड़ तक ही खिंच पाते थे। 14 वर्षीय मरीज मल्टीपल कॉन्जेनाइटल समस्या के साथ-साथ बाईलेटरल नी कॉन्ट्रैक्चर (मुड़े घुटने) और हाई डेवलपमेंटल डिस्प्लाजिया हिप से पीड़ित थी।"

2010 में इराक में उसके घुटनों की सर्जरी की गई, लेकिन उचित चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञता की कमी के कारण यह सर्जरी सफल नहीं हुई।

अस्पताल के एसोसिएट कंसल्टेन्ट डॉ. विपुल अग्रवाल का कहना है कि मरीज की रिपोर्ट्स देखने के बाद और उसकी उम्र को ध्यान में रखते हुए हमने फैसला लिया कि हम दो अवस्थाओं में सर्जरी करेंगे। इसका एक कारण यह भी था कि हम देखना चाहते थे कि छोटी सर्जरी करने पर उसकी चाल में कितना सुधार आ पाता है। पहली अवस्था में हमने घुटनों की सर्जरी सुप्राकॉन्डिलर ऑस्टियोटोमीज के द्वारा उसके घुटने सीधे किए, ताकि वह अपनी टांगों पर खड़ी होकर चल सके। यह सर्जरी सफल रही और पूरी तरह से ठीक होने के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। दूसरी अवस्था में, लगभग 18-24 महीनों बाद हमने उसके शरीर के ऊपरी हिस्से में सुधार लाने के लिए हिप सर्जरी का फैसला किया।"

डॉ. राठौड़ ने कहा, "हमने हिप सर्जरी मोडिफाइड बाइलेटरल कैम्पबेल्स रिलीज के जरिए उसकी कसी हुई पेशियों को ठीक किया और कूल्हे की हड्डी को सीधा किया। हम सर्जरी द्वारा कूल्हे और घुटनों को एक सीध में लेकर आए, ताकि उसकी चाल ठीक हो सके। सर्जरी सफल रही। सामान्य अवस्था में आने के बाद उसे छुट्टी दे दी गई।"

(इनपुट: आईएएनएस)

चित्रस्रोत: Shutterstock.

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source

Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.