... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: IANS | Published : November 23, 2018 4:41 PM IST
इराक का रहने वाला 16 वर्षीय अब्दुल्ला हसन जन्म से ही इंटीरियर चेस्ट वाल की डिफॉर्मिटी से होने वाली तकलीफें झेल रहा था और इस वजह से वह गंभीर डिप्रेशन का शिकार था। ©Shutterstock.
इंटीरियर चेस्ट वाल की गंभीर बीमारी से जूझ रहे इराक के 16 वर्षीय एक लड़के की यहां बीएलके सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में सफल करेक्टिव सर्जरी हुई। अस्पताल के एक चिकित्सक ने गुरुवार को इस बात की जानकारी दी। इराक का रहने वाला 16 वर्षीय अब्दुल्ला हसन जन्म से ही इंटीरियर चेस्ट वाल की डिफॉर्मिटी से होने वाली तकलीफें झेल रहा था और इस वजह से वह गंभीर डिप्रेशन का शिकार था। उम्र बढ़ने पर उसका चेस्ट बोन करीब-करीब उसकी रीढ़ की हड्डी तक पहुंच चुका था। हालत गंभीर होने पर अब्दुल्ला को बीएलके सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल लाया गया और उसकी कार्डिएक और पल्मोनरी इवॉल्यूशन की सर्जरी की गई। यह भी पढ़ें - सेहत पर भारी न पड़ जाए ब्लैक फ्राइडे
ये थी समस्या
इस बीमारी के कारण अब्दुल्ला के फेफड़े, हृदय और आसपास के अंगों में खिंचाव आ गया था, जिसकी वजह से उसे अक्सर सांस की परेशानी होती थी।
बीएलके सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के प्लास्टिक एंड रीकंस्ट्रक्टिव सर्जरी के सीनियर कंसल्टेंट एंड हेड डॉ. अवतार सिंह बाथ ने कहा, "यह समस्या रोगी को न सिर्फ शारीरिक रूप से परेशान कर रही थी, बल्कि कॉन्फिडेंस कम होने से वह अकेलेपन का शिकार भी हो गया था। हमने ओपन रेविच रिपेयर तकनीक में जरा सा बदलाव किया और स्टर्नम और उसके आसपास की पसलियों की विकलांगता को सिर्फ एक सर्जरी में बिना किसी जटिलता के दूर कर दिया।" यह भी पढ़ें – अत्यधिक सोडा वाली ड्रिंक हड्डियों के लिए हो सकती हैं खतरनाक
क्या है ओपन रेविच रिपेयर
उन्होंने कहा, "पेक्टस एक्सकैवेटम को ठीक करने के कई तरीके हैं लेकिन सबसे असरदार और प्रचलित तरीका ओपन रेविच रिपेयर है। ओपन रेविच रिपेयर के दो स्टेज होते हैं और इसमें बार माइग्रेशन का खतरा होता है। हमने बार माइग्रेशन के खतरे को दूर करने के लिए ओपन रेविच के तरीके में कुछ बदलाव किया और इसे एक सिंगल स्टेज प्रोसीजर में बदल दिया।"
यह भी पढ़ें – इन पांच कारणों से उम्र से पहले ही खराब हो रहे हैं घुटने
डॉ. अवतार सिंह बाथ ने कहा कि मरीज के चेस्ट वाल की विकलांगता को दूर करने के लिए उसकी खराब कोस्टल कार्टरिज को हटाया गया, स्टर्नल की खराबी को स्टर्नम के वेज ऑस्टेओटोमी के इस्तेमाल से ठीक किया गया और फिर टाइटैनियम प्लेट्स और स्क्रू के माध्यम से उसे सही जगह पर लगा दिया गया। स्टर्नम को ट्रांस्वर्स टाइटैनियम बार की मदद से आसपास के अंगों में सही जगह पर लगाकर एक अतिरिक्त सपोर्ट दिया गया, जिसे अब हटाने की जरूरत भी नहीं है।
Disclaimer: The content on TheHealthSite.com is only for informational purposes. It is not at all professional medical advice. Always consult your doctor or a healthcare specialist for any questions regarding your health or a medical condition.