'योगनगरी' मुंगेर में आश्रम के प्रांगण से छत तक योग

योग दिवस के मौके पर योग विद्यालय के अलावा भी शहर के अन्य हिस्सों में योग कार्यक्रम आयोजित किए गए।

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Written By: Editorial Team | Published : June 21, 2018 11:09 PM IST

योग को पूरी दुनिया तक पहुंचाने में अहम योगदान देने वाले बिहार के मुंगेर स्थित बिहार योग विद्यालय में चौथे अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर गुरुवार को योग शिविर का आयोजन किया गया। इस मौके पर विद्यालय द्वारा 'योगनगरी' के रूप में प्रसिद्ध मुंगेर में 'आश्रम के प्रांगण से छत-आंगन तक योग' कार्यक्रम के तहत 100 से अधिक केंद्रों तथा घर के आंगन व छतों पर योग के कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

योग को भारत के अन्य हिस्सों में चाहे जिस भी नजरिये से देखा जाता हो लेकिन उसे समझने और विज्ञान की कसौटी पर कस कर लोगों के समक्ष प्रस्तुत करने का बिहार योग विद्यालय का एक अपना अलग नजरिया है। इसी नजरिये के साथ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को भी मनाता आया है।

विश्व योग पीठ के परमाचार्य परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती कहते हैं, "योग को जब तक योग को जीवन शैली में समाविष्ट नहीं किया जाएगा, तब तक साकारात्मक परिवर्तन नहीं आ सकता है।"

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को लेकर मुख्य समारोह मुंगेर के 'पादुका दर्शन' में हुआ। पादुका दर्शन के विषय में स्थानीय गुरु ने बताया कि पादुका दर्शन वह जगह है जहां प्रारंभिक काल में स्वामी सत्यानंद सरस्वती अपनी साधनाएं करते थे तथा योग को लेकर एक प्रयोग शुरू किया था।

योग दिवस के मौके पर योग के प्रशिक्षण का कार्यक्रम आश्रम द्वारा मुंगेर मंडल कारा में भी चलाया गया।

योग दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में आश्रम के सन्यासी शिवध्यानम ने लोगों को आश्रम द्वारा तैयार योगा कैप्सूल का अभ्यास कराया। बिहार योग विद्यालय द्वारा तैयार योगा कैप्सूल में शांति मंत्री, महामृत्युंजय मंत्र, मां दुर्गा के 32 नाम के साथ 10 आसन, तीन प्राणायाम, मन: प्रसाद और जप का अभ्यास कराया गया।

इस कार्यक्रम में मुंगेर के नागरिकों के साथ बड़ी संख्या में बच्चे और आश्रम में प्रवास कर रहे दुनिया के विभिन्न देशों के संन्यासियों ने शिरकत की।

शिवध्यानम ने बताया, "परमहंस स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने योग कैप्सूल में मंत्रों का समावेश इसलिए किया है, क्योंकि मंत्र शास्त्र योग विद्या का महत्वपूर्ण अंग है और भारतीय ऋषि मुनियों की अनुपम देन है। यह किसी अन्य सभ्यता या सांस्कृतिक में नहीं है जो भारतीय संस्कृति में है।"

स्वामी शिवध्यानम ने कहा कि आज का अभ्यास एक लक्ष्य को लेकर किया गया है। यह लक्ष्य है व्यक्ति के प्रतिभा को जागृत करना मंत्रों का एक अपना विज्ञान है। उसके शब्दध्वनि और स्पंदन से व्यक्ति की मनोदशा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

उन्होंने आगे कहा, "आसन और प्राणयाम से शरीर निरोग होता है। आसनों का सरल अभ्यास पाचन तंत्र के लिए उपयोगी है। मन: प्रसाद दुर्गुण को पहचानने और सद्गुण पर चिंतन कर स्वयं में प्रसन्नता लाने का मकसद है। इसी तरह जब से सच्ची से शांति की अनुभूति होती है।"

योग दिवस के मौके पर योग विद्यालय के अलावा भी शहर के अन्य हिस्सों में योग कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान बाल योग मित्र मंडल और युवा मित्र मंडल के चुनिंदा प्रशिक्षणार्थियों ने लोगों को योग का प्रशिक्षण दिया।

कार्यक्रम का समापन योगिक प्रार्थना और शांति पाठ से हुआ। साथ ही संकल्प व्यक्त किया गया कि योग के माध्यम से सब जगह अच्छाई, शांति और पूर्णता लाने का प्रयास किया है।

बिहार योग विद्यालय योग से संबंधित शिक्षण-प्रशिक्षण का अंतर्राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विश्वविद्यालय है। यह बिहार के मुंगेर नगर में गंगा नदी के किनारे स्थित है। इसकी स्थापना 1964 में स्वामी सत्यानंद सरस्वती ने अपने गुरु स्वामी शिवानंद की इच्छानुसार विश्व को योग की प्राचीन विद्या की शिक्षा देने के लिए की थी।

योग विद्यालय के कारण मुंगेर को योग नगरी के नाम से भी जाना जाता है।

--आईएएनएस

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