Women's Day 2021: नृत्य-संगीत और कला जगत की बेमिसाल महिलाएं

पूरी दुनिया में 8 मार्च को हर साल 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' (International Women's Day 2021) सेलिब्रेट किया जाता है। इस दिवस के उपलक्ष में आज हम आपको नृत्य, कला और संगीत आदि क्षेत्रों से जुड़ी कुछ ऐसी ही प्रतिभावान, प्रभावशाली महिलाओं के बारे में बताएंगे, जिनका कोई सानी नहीं है।

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Written By: Anshumala | Updated : March 6, 2021 1:31 AM IST

Women's Day 2021 in Hindi: पूरी दुनिया में 8 मार्च को हर साल 'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' (International Women's Day 2021) सेलिब्रेट किया जाता है। देश-विदेश में आज महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत और मेहनत से सफलता की नई सीढ़ियां चढ़ रही हैं। भारत की बात की जाए, तो यहां भी महिलाएं हर क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं। पुरुषों से कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। खेल का मैदान हो, लेखन की दुनिया हो या फिर हो राजनीति और नृत्य-संगीत और कला की दुनिया, हर क्षेत्र में भारतीय महिलाएं वर्षों से अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाती आई हैं और आज भी निरंतर मनवा रही हैं।

आज हम आपको म्यूजिक, कला, नृत्य जैसे क्षेत्रों से जुड़ी कुछ ऐसी ही चर्चित, प्रतिभावान, प्रभावशाली महिलाओं के बारे में बताएंगे, जिनका कोई सानी नहीं है। अपने-अपने क्षेत्र में प्रतिष्ठित ये सभी महिलाएं, हर एक महिला के लिए प्रेरणास्रोत से कम नहीं हैं। जिंदगी में कुछ बनने, एक अलग पहचान व मुकाम पाने के इनके जज्बे, मेहनत से हर एक युवती, महिला (International Women's Day 2021 in Hindi) काफी कुछ सीख सकती है। उससे पहले जानते हैं क्या है महिला दिवस 2021 की थीम...

महिला दिवस की थीम क्या है? (Women's Day Theme 2021 in Hindi)

'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 2021' की थीम हर साल अलग-अलग होती है। वर्ष 1996 में महिला दिवस की थीम पहली बार रखी गई थी। संयुक्त राष्ट्र ने पहली थीम 'अतीत का जश्न, भविष्य की योजना' तय की थी। इस वर्ष की थीम 'वूमेन इन लीडरशिप: एन ईक्वल फ्यूचर इन ए कोविड-19 वर्ल्ड' (Women in leadership: an equal future in a COVID-19 world) है।

लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar, Singer)

लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर में हुआ था। लता को 'स्वर कोकिला' के नाम से भी जाना जाता है। आज भी गायन की दुनिया में उनकी तरह सुरों पर पकड़ रखने और सुरीली आवाज में गाने वाला कोई नहीं है। 91 वर्ष की उम्र में भी जब वे किसी गीत को अपनी आवाज से सजाती हैं, तो लगता है जैसे कोई युवा गायिका की आवाज हो। हर कोई उनकी आवाज सुनकर आज भी मंत्र-मुग्ध हो उठता है। लगभग छ: दशकों का उनका कार्यकाल कई उपलब्धियों से भरा पड़ा है।

उन्होंने लगभग तीस से ज्यादा भाषाओं में फिल्मी और गैर-फिल्मी गाने गाए हैं। उनकी जादुई आवाज के देश में ही नहीं, बल्कि दुनिया में भी लोग दीवाने हैं। उन्हें भारत सरकार द्वारा सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से भी सम्मानित किया गया है। इसके अलावा, पद्म विभूषण, राष्ट्रीय पुरस्कार, पद्म भूषण, दादा साहब फाल्के पुरस्कार जैसे कई अनगिनत सम्मान दिए जा चुके हैं।

एंजोलि इला मेनन (Anjolie Ela Menon, painter and muralist)

एंजोलि इला मेनन का जन्म 1940 में बंगाल में हुआ था। भारत की प्रतिष्ठित और सम्मानित समकालीन महिला कलाकारों (पेंटर और म्यूरलिस्ट) में से एक हैं। उनकी पेंटिंग्स में कई प्रमुख संग्रह शामिल हैं। मुख्य रूप से एंजोलि मैसोनाइट (Masonite) पर ऑयल से काम करना पसंद करती हैं। हालांकि, उन्होंने कई अन्य माध्यमों में भी काम किया है। उन्हें सन 2000 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। 15 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने कई पेंटिंग्स बेची थीं। कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उनकी रुची एम एफ हुसैन, अमृता शेरगिल आदि भारतीय पेंटर्स की पेंटिंग की तरफ बढ़ने लगी।

मात्र 18 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने अपना सोलो प्रदर्शनी आयोजित किया। और फिर क्या था, यहां से उन्होंने कभी मुड़ कर पीछे नहीं देखा। देश के साथ विदेशों में भी उनका सोलो पेंटिंग एग्जिबेशन आयोजित होने लगा। यदि आपको भी एक कामयाब आर्टिस्ट और पेंटर बनना है, तो एंजोलि इला मेनन से आप बहुत कुछ सीख सकती हैं।

सोनल मानसिंह (Sonal Mansingh, classical Dancer)

sonal mansingh सोनल मानसिंह

सोनल मानसिंह एक भारतीय क्लासिकल डांसर हैं, जो भरतनाट्यम और ओडिशी नृत्य शैली में कुशल है। भारत सरकार ने इन्हें वर्ष 1992 में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित किया था। मुंबई में जन्मी सोनल ने मात्र चार वर्ष की उम्र में मणिपुरी नृत्य और सात साल की उम्र में भरतनाट्यम सीखना शुरू कर दिया था। सोनल ने 1962 से पेशेवर नृत्य करना शुरू कर दिया था। भरतनाट्यम का प्रशिक्षण कई बड़े और प्रतिष्ठित गुरुओं से प्राप्त किया। सोनल एक प्रसिद्ध भरतनाट्यम डांसर के साथ ही एक शास्त्रीय गायक भी हैं।

जब इन्होंने नृत्य में भविष्य बनाने की बात घर वालों से कही थी, तो घर वाले नाराज हो गए थे। परिवार वालों की नाराजगी के बावजूद भी सोनल ने अपना घर छोड़ दिया था। धीरे-धीरे अपनी मेहनत और लगन से जबरदस्त शोहरत कमाई। जिंदगी की हर मोड़ पर कई तरह की चुनौतियों का सामना भी किया, लेकिन सभी चुनौतियों को बखूबी पार किया और हमेशा जीत हासिल की। अवॉर्ड की बात करें, तो उन्हें पद्मभूषण, पद्मविभूषण आदि से सम्मानित किया जा चुका है।

आशापूर्णा देवी (Ashapurna Devi, Indian novelist)

आशापूर्णा देवी भारत की एक प्रसिद्ध बांग्ला भाषा की कवयित्री और उपन्यासकार थीं। 8 जनवरी 1909 को आशापूर्णा देवी का जन्म एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। ज्ञानपीठ पुरष्कार से सम्मानित की जाने वाली वह पहली महिला थीं। वर्ष 1976 में उन्हें इस सम्मान से नवाजा गया था। उन्होंने 13 वर्ष की उम्र से ही लिखना शुरू कर दिया था। वह एक ऐसी लेखिका थीं, जिन्होंने अपने दायरों से बाहर जाकर अपनी लेखनी के हुनर से साहित्य की दुनिया में अपना नाम-मुकाम स्थापित किया।

उनका परिवार एक रूढ़िवादी और परंपरागत सोच वाला था, जहां घर की लड़कियों को स्कूल जाने पर भी पाबंदी थी। लेकिन, आशापूर्णा को बचपन से ही पढ़ने-लिखने में बेहद दिलचस्पी थी। कम उम्र में ही वे कविताएं लिखने लगी थीं। धीरे-धीरे उनका साहित्यिक लेखन का सफर शुरू हो गया और 1976 में उन्हें ज्ञानपीठ पुरष्कार दिया गया। उनकी कई कहानियों में स्त्रियों पर किए गए अत्याचार, उत्पीड़न, संघर्ष का भी दर्द बयां है। उनकी मृत्यु वर्ष 1995 को हुई थी।

एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी (M. S. Subbulakshmi, Singer)

एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी का पूरा नाम मदुरै षण्मुखवडिवु सुब्बुलक्ष्मी था, जिनका जन्म तमिलनाडु के मदुरै में 16 सितंबर, 1916 में हुआ था। कर्णाटक संगीत की मशहूर संगीतकार थीं एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी। शास्त्रीय संगीत की दुनिया में एम. एस. का कोई सानी नहीं है। इन्होंने छोटी सी आयु से ही संगीत का शिक्षण आरंभ कर दिया था और दस साल की उम्र में ही अपना पहला डिस्क रिकॉर्ड किया था। कई फिल्मों में भी इन्होंने अभिनय किया। यह पहली भारतीय महिला हैं, जिन्होंने संयुक्त राष्ट्र संघ की सभा में संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया था। साथ ही पहली महिला हैं, जिन्हें कर्णाटक संगीत का सर्वोत्तम पुरस्कार, संगीत कलानिधि प्राप्त हुआ।

कला क्षेत्र में इन्हें भारत रत्न, पद्म भूषण, कालीदास सम्मान, इंदिरा गांधी अवॉर्ड, मैग्सेसे अवॉर्ड आदि से नवाजा गया। कई मशहूर संगीतकारों ने इनकी तारीफ अलग-अलग उपमा देकर की है। लता मंगेशकर ने 'तपस्विनी', उस्ताद बड़े गुलाम अली खां ने 'सुस्वरलक्ष्मी' कहा, तो किशोरी आमोनकर ने इन्हें 'आठवां सुर' कहा, जो संगीत के सात सुरों से भी ऊंचा है।

एकता कपूर (Ekta Kapoor, Tv & Film Producer)

ekta-kapoor एकता कपूर

एकता कपूर छोटे पर्दे यानी भारतीय टेलीविजन और फिल्म इंडस्ट्री की एक सफल निर्माता-निर्देशक के रूप में खुद को स्थापित कर चुकी हैं। 45 वर्ष की उम्र में ही एकता ने नाम, शोहरत सब कुछ हासिल कर लिया है। वर्ष 2001 में ही वो फिल्म निर्माण की दुनिया में कदम रख चुकी थीं। उनकी प्रोडक्शन कंपनी का नाम बालाजी टेलीफिल्म्स लिमिटेड है, जिसकी एकता ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर और क्रिएटिव हेड हैं। मशहूर एक्टर जीतेंद्र की बेटी एकता कपूर को वर्ष 2014 में कॉर्पोरेट एक्सेलेंस इन एंटरटेनमेंट बिजनेस की कैटेगरी में मोस्ट पावरफुल वूमेन इन इंडिया अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है।

पिछले वर्ष (2020) उन्हें कला के क्षेत्र में उनके बेहतरीन कार्य के लिए चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म श्री से भी सम्मानित किया गया था। इसके अलावा भी उन्हें कई अवॉर्ड्स दिए जा चुके हैं। 'क्योंकि सांस भी कभी बहू थी', 'कहानी घर-घर की', 'हम पांच' जैसे बेहतरीन टीवी सीरियल्स से एकता ने घर-घर में अपनी पहचान बना ली।

देश की इन सभी प्रतिभावान, मशहूर, प्रतिष्ठित और सफल महिलाओं को हैप्पी वूमेंस डे (International Women's Day 2021 in Hindi)!

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