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Written By: Yogita Yadav | Updated : April 21, 2019 5:38 PM IST
भारत में 22 अप्रैल के समय बहार का मौसम होता है, पेड़ फूलों से लदे हैं, नदियां भी पानी से लबालब भरी हैं पर आने वाला समय ऐसा नहीं होगा। इसी खतरे हो पहचानते हुए जरूरी है कि हम आज ही से प्रकृति के हर हिस्से के संरक्षण में जुट जाएं। ©Shutterstock.
पृथ्वी को संरक्षण प्रदान करने के लिए और सारी दुनिया से इसमें सहयोग और समर्थन करने के लिए प्रति वर्ष पृथ्वी दिवस मनाने का संकल्प लिया गया है। यह दिवस 22 अप्रैल को मनाया जाता है। इसे दुनिया भर के 193 देशों ने अपना समर्थन दिया है। इस खास दिवस पर हम प्रकृति के हर उस हिस्से को बचाने का संकल्प लेते हैं जो मनुष्य के जीवन के लिए जरूरी है।
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पृथ्वी दिवस का इतिहास
जब पहला पृथ्वी दिवस जब मनाया गया, तब यूनाइटेड स्टेट के दो हजार से अधिक कॉलेज और यूनिवर्सिटी साथ ही एक हजार प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल के समूहों ने इसमें भाग लिया था। शांतिपूर्ण ढंग से पर्यावरण की गिरावट के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन किया गया। 1970 में पहला पृथ्वी दिवस मनाया गया। तब से 22 अप्रैल को आधुनिक पृथ्वी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। इस दिवस की स्थापना अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने की थी। पर यह किसी खास वर्ग या किसी खास राजनीतिक दल तक ही सीमित नहीं है। बल्कि पृथ्वी की सुरक्षा में अमीर-गरीब, छोटे-बड़े, हर जाति, हर वर्ग के लोगों की जिम्मेदारी तय होती है।
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यह हर एक साल एक अरब से अधिक लोगों के द्वारा मनाया जाता है और एक दिन के दिनचर्या को पर्यावरण के कार्य के लिए समर्पित किया जाता है। ©Shutterstock.
पृथ्वी का उत्सव है यह दिन
वर्तमान में पृथ्वी दिवस को एक पर्व की तरह दुनिया भर में मनाया जाने लगा है। यह हर एक साल एक अरब से अधिक लोगों के द्वारा मनाया जाता है और एक दिन के दिनचर्या को पर्यावरण के कार्य के लिए समर्पित किया जाता है। वर्तमान में स्वच्छ वातावरण का मुद्दा गंभीर होता जा रहा है, क्योंकि जलवायु में परिवर्तन विनाशकारी रूप धारण करते जा रहे है। इससे हमारी सेहत, हमारे वजूद को भी खतरा उत्पन्न हो गया है।
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ग्लोबल वार्मिंग है चुनौती
ग्लोबल वार्मिंग के बारे में पर्यावरणविद के माध्यम से हमें पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का पता चलता है। जीवन संपदा को बचाने के लिए पर्यावरण को ठीक रखने के बारे में जागरूक रहना आवश्यक है। जनसंख्या की बढ़ोतरी ने प्राकृतिक संसाधनों पर अनावश्यक बोझ डाल दिया है। इसलिए इसके संसाधनों के सही इस्तेमाल के लिए पृथ्वी दिवस जैसे कार्यकर्मो का महत्व बढ़ गया है। लाइव साइंस आईपीसीसी अर्थात जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल के मुताबिक 1880 के बाद से समुद्र का जलस्तर 20% बढ़ गया है और यह लगातार बढ़ता ही जा रहा है। यह 2100 तक बढ़ कर 58 से 92 सेंटीमीटर तक हो सकता है, जो कि पृथ्वी के लिए बहुत ही ख़तरनाक है। इसका मुख्य कारण है ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ग्लेशियरों का पिघलना जिसके करण पृथ्वी जलमग्न हो सकती है। आईपीसीसी के पर्यावरणविद के अनुसार 2085 तक मालदीव पूरी तरह से जलमग्न हो सकता है।
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पृथ्वी बचेगी, तो ही बचेंगे हम भी
पृथ्वी दिवस का महत्व मानवता के संरक्षण के लिए बढ़ जाता है, यह हमें जीवाश्म ईंधन के उत्कृष्ट उपयोग के लिए प्रेरित करता है। इसको मनाने से ग्लोबल वार्मिंग के प्रचार पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जो की हमारे जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रेरित करता है। यह उर्जा के भण्डारण और उसके अक्षय के महत्व को बताते हुए उसके अनावश्यक उपयोग के लिए हमे सावधान करता है। कार्बन डाई ऑक्साइड और मीथेन उत्सर्जन की गतिविधियों की वजह से पर्यावरण अपने प्राकृतिक रूप में स्थिर रहता है।
जागरूकता की वजह से नई स्वच्छ वायु योजना बनी थी। इस वजह से अब जो भी नया विधुत सयंत्र बनता है, उसमे कार्बन डाइऑक्साइड को कम मात्रा में उत्सर्जित करने के लिए अलग यन्त्र लगाया जाता है। ©Shutterstock.
बढ़ी है जागरुकता
1960 के दशक में कीटनाशकों और तेल के फैलाव को लेकर जो जनता ने जागरूकता दिखाई थी, उस जागरूकता की वजह से नई स्वच्छ वायु योजना बनी थी। इस वजह से अब जो भी नया विधुत सयंत्र बनता है, उसमे कार्बन डाइऑक्साइड को कम मात्रा में उत्सर्जित करने के लिए अलग यन्त्र लगाया जाता है। जिससे की पर्यावरण में इसका कम फैलाव हो और नुकसान कम हो। इसलिए अप्रैल 22 को सीनेटर नेल्सन ने कहा कि वह व्यक्ति इस दुनिया में पर्यावरण से अलग नहीं रह सकता, जो अंतराष्ट्रीय दिवस को छुट्टी का दिन न बना कर दुनिया भर के लोगों को ग्लोबल वार्मिंग के लिए जागरूक करता है और प्रौधोगिकी के क्षेत्र में निवेश करता हो।
बचाना है नीला ग्रह
पृथ्वी बहुत ही सुंदर ग्रह है जिसका एक बड़ा भाग पानी से ढका हुआ है। पानी की अधिकता के कारण ही इसे ब्लू प्लैनेट कहा गया है। ग्लोबल वार्मिंग की वजह से यह सुंदर ग्रह अब खतरे में नज़र आ रहा है जिसको बचाने के लिए पृथ्वी दिवस जैसे जागरूक कार्यक्रम को चलाकर सबको इसे बचाने के लिए जागरूक करने की आवश्यकता है। 22 अप्रैल ऐसा खुशनुमा दिन है जब पृथ्वी के पूर्वी हिस्से में बहार का मौसम होता है।