International Day against Drug Abuse and Illicit Trafficking: जानें इस वर्ष की थीम, नशे की लत छुड़ाने के टिप्स

इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस (इंटरनेशनल डे अगेन्स्ट ड्र्ग अब्यूज एंड इलिसिट ट्रैफिकिंग) की थीम ‘न्याय के लिए स्वास्थ्य, स्वास्थ्य के लिए न्याय’ (हेल्थ फॉर जस्टिस एंड जस्टिस फॉर हेल्थ) है।

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Written By: Anshumala | Published : June 26, 2019 3:48 PM IST

आज है अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस (International Day against Drug Abuse and Illicit Trafficking)। हर साल दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस (International Day against Drug Abuse and Illicit Trafficking) 26 जून को मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से इस इस दिवस की स्थापना वर्ष 1987 में हुई थी। लोगों को नशे से मुक्त कराने और उन्हें जागरूक करने के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जाता है। नशीली दवाओं या पदार्थों का सेवन करने वालों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ते देख संयुक्त राष्ट्र ने 7 दिसंबर 1987 को अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाने की घोषणा की थी। इस दिवस के माध्यम से लोगों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध व्यापार के प्रति जागरूक किया जाता है।

पूरे विश्व में इस दिन विभिन्न समुदायों और संगठन लोगों को नशीली दवाओं के प्रति क्षेत्रीय स्तर लोगों को जागरूक करने के लिए तमाम तरह के कार्यक्रम चलाते हैं। इस दौरान उन्हें नशीले पदार्थों से होने वाले नुकसान और खतरों के बारे में बताया जाता है।

इस वर्ष की थीम

इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस (International Day against Drug Abuse and Illicit Trafficking) की थीम ‘न्याय के लिए स्वास्थ्य, स्वास्थ्य के लिए न्याय’ (हेल्थ फॉर जस्टिस एंड जस्टिस फॉर हेल्थ) है। जाहिर सी बात है कि इस बार की थीम लोगों से अपनी हेल्थ के साथ न्याय करने की अपील करती है।

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क्या होती है लत

शराब, सिगरेट, ड्रग्स या गुटखा/खैनी का सेवन थोड़ी मात्रा में भी शरीर को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन जब यह लत बन जाता है तो स्थिति काबू से बाहर होने लगती है। लत का मतलब है कि जिस चीज की लत है, वह जब तक न मिले, पीड़ित बेचैन और असामान्य रहता है। जैसे वह चीज उसे मिल जाती है, तो वह व्यक्ति नॉर्मल दिखने लगता है।

नशे के लक्षण

घबराहट, बेचैनी, चिड़चिड़ापन, गुस्सा आना, मूड अचानक बदलना, तनाव और मानसिक थकावट, फैसला लेने में दिक्कत, याददाश्त कमजोर होना, चीजों को लेकर कन्फ्यूजन होना, नींद न आना, सिर में तेज दर्द होना, शरीर में ऐंठन और मरोड़ होना, भूख कम लगना, धड़कन का बढ़ना, ज्यादा पसीना आना आदि नशे के कुछ लक्षण हैं। हालांकि, इनमें से कई लक्षण अन्य रोगों में भी नजर आते हैं।

यूं छोड़ें नशे की लत

नशे में आदत और तलब, दो अलग-अलग चीजें हैं। कई बार आदमी आदतन सिगरेट निकालकर मुंह से लगा लेता है, जबकि तलब में वह चाहकर भी खुद को रोक नहीं पाता। इन दोनों को ध्यान में रखते हुए नशे को छुड़ाने के लिए इस तरह से इलाज हो सकता है...

-जब तक आप खुद नहीं चाहेंगे, कोई और आपका नशा नहीं छुड़ा पाएगा। सबसे पहले मन में ठान लें कि आप नशा छोड़ना चाहते हैं।

-शुरू में अपनी बात पर टिके रहने में दिक्कत आएगी, लेकिन अपने मन को मजबूत रखें। लत छोड़ने की वजहों को दिन में बार-बार मन में दोहराएं। हो सके तो ऐसी जगह पर लिखकर लगा दें, जहां आपकी बार-बार नजर पड़ती हो।

- मरीज आदत पर कंट्रोल कर खुद नशे को छोड़ दे लेकिन उसके बाद लगने वाली तलब को कम करने या बीमारियों के इलाज में डॉक्टर और काउंसलर से मदद ले।

- मरीज लत को छोड़ नहीं पा रहा तो दवाओं के जरिए उसकी तलब को कम किया जाता है। फिर दूसरी बीमारियों का इलाज होता है।

- इलाज में जनरल फिजिशियन के अलावा काउंसलर्स की काफी बड़ी भूमिका होती है।

- कोई भी नशा छोड़ने के लिए पहले उसकी मात्रा कम करें। शराब का पैग छोटा कर दें या सिगरेट पीने से पहले उसे तोड़कर छोटी कर दें। अपने पास लाइटर, माचिस, गुटखे की पुड़िया, तंबाकू ना रखें। डायरी बनाएं और उसमें लिखें कि नशा कब और कितनी मात्रा में, किसके साथ लेते हैं। उसे बार-बार पढ़ें।

- सिगरेट या गुटखे की तलब हो तो इनकी जगह इलायची, सौंफ आदि ले सकते हैं।

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