
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Published : February 19, 2020 8:17 PM IST
आईवीएफ बेबीज़ को मृत्यु का खतरा अधिक।
Infant Mortality Risk: आईवीएफ तकनीक (IVF-In vitro fertilisation) की मदद से जन्म लेने वाले बच्चों (IVF babies) में मृत्यु का खतरा (Mortality risk) अधिक होता है। रिसर्चर्स ने पाया है कि ऐसे बच्चों (Infant Mortality Risk) के लिए एक वर्ष की आयु पूर्ण करने से पहले मृत्यु का डर 45 फीसदी अधिक होता है। जबकि, नैचुरली गर्भधारण की वजह से जन्म लेने वाले बच्चों में यह खतरा कम होता है। (IVF babies)
जर्नल फर्टिलिटी एंड स्टर्लिटी (Fertility and Sterility) में प्रकाशित इस स्टडी में प्रीमैच्योर बर्थ (Premature birth) और आईवीएफ तकनीक (IVF) के बीच संबंध समझने की कोशिश की गयी। एक्सपर्ट्स के अनुसार ऐसी संभावना आईवीएफ बेबीज़ में अधिक होती है। वहीं, शिशुओं की मृत्यु की संभावना दोनों ही ग्रुप्स में काफी कम है। (birth defects)
इस स्टडी के लीड ऑथर अनास्टेसिया नेमन इलिडू (कैरोलिंस्का इंस्टिटूटेट, स्वीडन) के मुताबिक, इस स्टडी के रिजल्ट्स दर्शाते हैं कि जिस तरह की असिस्टेड रिप्रॉडक्टिव टेक्निक का इस्तेमाल किया जाता है। उसके आधार पर भी शिशुओं की लाइफ क्वालिटी निर्भर करती है। जैसा कि, ये निष्कर्ष यह भी दर्शाते हैं कि आईवीएफ (IVF babies) की मदद से जन्म लेने वाले बच्चों को अधिक देखभाल की ज़रूरत होती है। खासकर, उनके जन्म के पहले सप्ताह में बच्चों पर बहुत अधिक ध्यान देना पड़ता है।
इससे पहले प्रकाशित स्टडीज़ में बताया गया कि आईवीएफ प्रेगनेंसी में लो-बर्थ वेट (low birth weight), प्री-मैच्योर बर्थ (prematurity) और बर्थ डिफेक्ट (birth defects) जैसी समस्याएं अधिक होती हैं। इन समस्याओं को आईवीएफ ट्रीटमेंट की मदद से जुड़वा बच्चों के जन्म की स्थिति में अधिक होने की संभवना जतायी गयी है।
लेकिन, इस स्टडी में रिसर्चर्स ने इकलौते बच्चों (singleton children) का उदाहरण लिया और अलग-अलग तकनीकों की मदद से जन्म लेने वाले बच्चों और नैचुरल गर्भधारण वाले बच्चों में मृत्यु के खतरे की तुलना की।
गर्भधारण करने वाली माताओं की उम्र और इंफर्टिलिटी की समस्या से जूझने जैसे कारणों को भी ध्यान में रखा गया। अंत में यह निष्कर्ष निकाला गया कि आईवीएफ तकनीक की मदद से जन्म लेने वाले बच्चों में 45 फीसदी मृत्यु का खतरा अधिक होता है।