20 साल पहले हुआ था भारत का पहला सफल लिवर ट्रांसप्लान्ट

नवंबर 1998 में संजय कंदासामी की लिवर ट्रांसप्लान्ट सर्जरी के साथ भारतीय डॉक्टरों ने पहली सफल लिवर ट्रांसप्लान्ट सर्जरी कर इतिहास रच दिया था।

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Written By: IANS | Published : November 16, 2018 6:33 PM IST

संजय कंदासामी की उम्र आज 21 वर्ष है, लेकिन उनका बचपन सामान्य नहीं था। मात्र 20 माह की उम्र में उनके पिता ने उन्हें लिवर डोनेट किया। नवंबर 1998 में उनकी लिवर ट्रांसप्लान्ट सर्जरी की गई। इसी के साथ भारतीय डॉक्टरों ने पहली सफल लिवर ट्रांसप्लान्ट सर्जरी कर इतिहास रच दिया। संजय न केवल अब सामान्य जीवन जी रहे हैं, बल्कि वह खुद डॉक्टर बनने की ट्रेनिंग भी ले रहे हैं- यह संजय का इलाज करने वाले डॉक्टरों की विशेषज्ञता और संजय एवं उसके परिवार की दृढ़ता का ही परिणाम है।

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इस सफल सर्जरी ने भारतीय चिकित्सा जगत में नई क्रान्ति ला दी, इसकी 20वीं सालगिरह के मौके पर इन्द्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल्स ने बताया कि पिछले दो दशकों में लिवर ट्रांसप्लान्ट में जबरदस्त बदलाव आए हैं।

दो लाख लोगों की मृत्‍यु का कारण बनती है यह बीमारी

अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप की उपाध्यक्ष डॉ प्रीथा रेड्डी ने कहा, "लिवर रोग आज देश में चिंता का विषय बन चुके हैं, हर साल 2 लाख लोगों की मृत्यु इन बीमारियों के कारण हो रही है। हर साल लगभग 1800 लिवर ट्रांसप्लान्ट किए जाते हैं, जबकि 20,000 लोगों को इसकी जरूरत होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लिवर रोग भारत में मृत्यु का 10वां सबसे बड़ा कारण हैं। हालांकि पहली सफल सर्जरी के बाद भारत ने इस दिशा में लंबी दूरी तय की है, किंतु अभी इस क्षेत्र में बहुत सी कमियों को दूर करना बाकी है।"

गौतम गंभीर ने ले रखी है शपथ

जाने-माने भारतीय क्रिकेटर गौतम गंभीर भी इस मौके पर मौजूद थे। उन्होंने कहा, "हर मिनट एक व्यक्ति उन लोगों की सूची में शामिल हो जाता है, जिन्हें ट्रांसप्लान्ट की जरूरत होती है। आज 2 लाख भारतीय इस सूची में शामिल हैं, जबकि 10 फीसदी से भी कम लोगों को ट्रांसप्लान्ट मिल पाता है। हमें देश में अंगदान की दर बढ़ाने के लिए काम करना होगा। मैं 2011 में अपने अंगों के दान की शपथ ले चुका हूं और चाहता हूं कि देश के युवा इस दिशा में आगे बढ़ें। देश में अंगदान के बारे में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। इसे एक राष्ट्रीय आंदोलन बनाने की आवश्यकता है।"

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अपोलो हॉस्पिटल्स ग्रुप के मेडिकल डायरेक्टर एवं सीनियर पीडिएट्रिक गैस्ट्रोएंट्रोलोजिस्ट डॉ. अनुपम सिब्बल ने कहा, "आज का दिन भारतीय चिकित्सा जगत का खास दिन है। आज से 20 साल पहले भारत में पहली बार सफल लिवर ट्रांसप्लान्ट किया गया। संजय जैसे मरीजों के भरोसे, पक्के इरादे के कारण ही यह संभव हो सका कि हमने 50 देशों से आए 3200 मरीजों में सफल लिवर ट्रांसप्लान्ट किए, इनमें 302 बच्चे भी शामिल हैं। हम दुनिया भर से आए मरीजों को अपनी विशेषज्ञ सेवाओं से लाभान्वित करना चाहते हैं, जिन्हें ट्रांसप्लान्ट की जरूरत है।"

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चुनौती है यह सफलता

संजय कंदासामी ने कहा, "मेरे परिवार के पक्के इरादे और डॉक्टरों की विशेषज्ञता के कारण ही आज मैं आपके बीच मौजूद हूं। मैं अपने देश के लोगों का जीवन बचाने में योगदान देना चाहता हूं और लोगों को बताना चाहता हूं कि जीवन में किसी भी चुनौती को जीतना संभव है।"

संजय जन्म के समय एक रेयर डिजीज बाइलरी आट्रेसिया से पीड़ित था। यह बीमारी 12,000 में से एक बच्चे को होती है, जिसका एकमात्र इलाज लिवर ट्रांसप्लान्ट ही है।

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