Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
एक भारतीय-अमेरिकी किशोरी ने यहां के कॉर्नेल विश्वविद्यालय में एक निदान के दौरान मरीज के दर्द का वास्तविक स्तर पता लगाने वाले उपकरण के डिजायन के लिए आयोजित 'डिजिटल ट्रांसफरेमेशन हैकथॉन' स्पर्धा जीत लिया है। इस डिवाइस को 17 वर्षीय माहुम सिद्दीकी और उनकी टीम ने डिजायन किया है। यह उपकरण किसी के दिमाग में होनेवाले न्यूरोलॉजिकल गतिविधियों का उपयोग करता है ताकि डॉक्टरों को अधिक कुशलता से किसी के दर्द के स्तर को निर्धारित करने में मदद मिल सके।
यह भी पढ़ें - सर्दियों में फायदेमंद हैं वार्म वाटर थेरेपी, जानें इसके बारे में सब कुछ
सिद्दीकी ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, "यह अविश्वसनीय रूप से परेशान कर देनेवाला और समस्यात्मक है कि दर्द निदान की अवधारणा कितनी काल्पनिक है। डॉक्टरों के पास यह जानने का कोई तरीका नहीं है कि जब किसी का निदान किया जाता है तो किसी को कितना कम या कितना दर्द होता है।"
यह भी पढ़ें – क्या कुल्हड़ में पीने से बढ़ जाती है दूध की सेहत
12वीं की छाात्रा हैं सिद्दीकी
सिद्दीकी न्यूयॉर्क के वेस्टल उच्च विद्यालय की कक्षा 12 की छात्रा हैं और दिसंबर की शुरुआत में आयोजित किए गए इस हैकथॉन में भाग लेने वाली इकलौती गैर-स्नातक विद्यार्थी थीं।
यह भी पढ़ें – ऐसे बनाएं खजूर और गुड़ की खीर, सर्दियों का मजा होगा दोगुना
बयान में कहा गया कि उन्होंने और उनके दल ने इस प्रतिस्पर्धा में प्रथम पुरस्कार जीता और अब वे माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों के साथ प्रोटोटाइप पर काम कर रहे हैं, ताकि दर्द के स्तर का पता लगाने वाले उनके डिवाइस का प्रोटोटाइप तैयार किया जा सके।