ट्यूबरक्लोसिस के मामले में भारत 30वें स्थान पर, टीबी के मरीजों में 56% पुरुष
अगर ट्यूबरक्लोसिस की बात करें तो भारत उन 30 टॉप देशों में शामिल है जिनमें टीबी के मामले सबसे ज्यादा पाए जाते हैं।
टीबी को कोविड 19 के बाद दूसरा सबसे ज्यादा फैलने वाला रोग माना जाता है। यह रोग फेफड़ों को प्रभावित करता है और भारत हाल ही में उन 30 टॉप देशों में अपना स्थान बना चुका है जिनमें टीबी के केस सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। इस रिपोर्ट में यह सामने आया है की 2021 में 10.6 मिलियन लोग टीबी से बीमार पड़े हैं। इन मामलों में 2020 के मुकाबले 4 से ऊपर प्रतिशत की वृद्धि हुई है जिनमें से 1.6 मिलियन लोगों की मृत्यु भी हो गई है। यह आंकड़ा कई सालों के बाद ही इतना ज्यादा बढ़ा हुआ देखने को मिला है जो एक चिंता का विषय है।
टीबी के मरीजों में 56.5% पुरुष शामिल हैं, 32.5% महिलाएं हैं और 11% बच्चे हैं। बहुत से नए केस केवल 5 मुख्य फैक्टर्स के कारण देखने को मिले हैं जिनमें अंडर न्यूट्रीशन, एचआईवी इन्फेक्शन, अल्कोहल यूज डिसऑर्डर, स्मोकिंग और डायबिटीज शामिल हैं। कॉविड के दौरान टीबी के मरीजों पर इतना ध्यान नहीं दिया गया।
2021 में भी टीबी पर खर्च किए जाने वाले फंड में काफी कमी देखने को मिली। आधी से ज्यादा जनसंख्या में रिकवरी भी देखी गई है। 2021 में भारत उन तीन देशों में शामिल हुआ है जिनकी रिकवरी दर सबसे ज्यादा है। इस संख्या में बाकी दो देश इंडोनेशिया और फिलीपींस भी थे।
महामारी के दौरान जब लोग इतनी मेडिकल और फाइनेंशियल समस्याओं से जूझ रहे थे तब भी हमारा देश टीबी से रिकवर होने में सफल हो रहा था। इससे पता चलता है कि रिसोर्स की कमी होते हुए भी अगर लोगों में एकता हो तो किसी भी बड़ी से बड़ी समस्या से निकला जा सकता है।