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COVID Care के लिए भारत देगा 2 अरब डॉलर की परोपकार निधि, दुनिया की स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में रूकावटों को मिलेगा बल

COVID Care के लिए भारत देगा 2 अरब डॉलर की परोपकार निधि, दुनिया की स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं में रूकावटों को मिलेगा बल

महिलाओं, नवजात शिशुओं, बच्चों और किशोरों के लिए बिगड़ती सेवाओं को बहाल करने के एक बड़े प्रयास में ऊंची आय वाले समूह निम्न-मध्यम और मध्यम आय वाले देशों के समूह की सुरक्षा के लिए 20.6 अरब डॉलर देने का वादा कर रहे हैं।

Written by Atul Modi |Published : December 12, 2020 8:03 PM IST

भारत ने कोविड-19 महामारी को लेकर देखभाल के सभी स्तरों को बेहतर करने के लिए 2020-2021 के लिए 20.6 अरब डॉलर की परोपकारी निधि में से 2 अरब डॉलर देने का वादा किया है। इससे महिलाओं, बच्चों, किशोरों और सबसे कमजोर वर्ग के लोगों के लिए जरूरी सार्वजनिक स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम होगा। यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज की दिशा में प्रगति का जायजा लेने के लिए शुक्रवार को आयोजित वैश्विक स्वास्थ्य शिखर सम्मलेन 'लाइव्स इन द बैलेंस' के मौके पर इन प्रतिबद्धताओं के बारे में बताया गया।

इस महामारी ने महिलाओं, नवजात शिशुओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं को लेकर 3 दशकों के लिए खतरा पैदा कर दिया है।

1 हजार से ज्यादा संगठनों के गठबंधन, द पार्टनरशिप फॉर मेंटल, न्यूबोर्न एंड चाइल्ड हेल्थ (पीएमएनसीएच) के वरिष्ठ स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, महामारी का प्रकोप होने के बाद से आवश्यक स्वास्थ्य, पोषण और सामाजिक सेवाओं में आई रुकावट के कारण इस कमजोर समूह की स्थिति दूसरों की तुलना में अधिक प्रभावित हो रही है।

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महिलाओं, नवजात शिशुओं, बच्चों और किशोरों के लिए बिगड़ती सेवाओं को बहाल करने के एक बड़े प्रयास में ऊंची आय वाले समूह निम्न-मध्यम और मध्यम आय वाले देशों के समूह की सुरक्षा के लिए 20.6 अरब डॉलर देने का वादा कर रहे हैं। इसमें से 6.6 अरब डॉलर (32 प्रतिशत) निम्न और मध्यम-आय वाले देशों द्वारा खुद दी गई है, जिसमें अफगानिस्तान, भारत, केन्या, लाइबेरिया और नाइजीरिया शामिल हैं। वहीं 14 अरब डॉलर (68 प्रतिशत) जर्मनी, कनाडा, स्वीडन, ब्रिटेन, अमेरिका और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन से दी गई है।

105 देशों के हालिया डब्ल्यूएचओ आंकड़ों से पता चलता है कि 90 प्रतिशत देशों ने स्वास्थ्य सेवाओं में रुकावट का अनुभव किया है, जिनमें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में तो सबसे ज्यादा मुश्किलें हुई हैं। इसमें टीकाकरण, परिवार नियोजन और गर्भनिरोधक सेवाएं प्रमुख हैं।

दुनियाभर में 2000 से 2017 के बीच मातृ मृत्युदर में 38 प्रतिशत की गिरावट आई है। फिर भी 2017 में लगभग 25 हजार महिलाएं गर्भावस्था और प्रसव के दौरान हर महीने मर रही थीं। 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्युदर में भी 1960 के बाद कमी आई, लेकिन अब भी हर साल 5 साल से कम उम्र के 52 लाख बच्चे ऐसे कारणों से मर रहे हैं, जिन्हें रोका जा सकता है।

पीएमएनसीएच ने महिलाओं, बच्चों और किशोरों के स्वास्थ्य में बेहतरी के लिए कोविड-19 के विनाशकारी प्रभावों के जवाब में सात-सूत्रीय प्रोग्राम शुरू किया है। इसमें दुनिया के नेताओं से आह्वान किया गया है कि वे कोविड-19 की प्रतिक्रिया के दौरान अपने अधिकारों और स्वास्थ्य की रक्षा करें और उसे प्राथमिकता दें। इसके लिए वे विशेष रूप से सबसे कमजोर लोगों की अहम स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा के लिए राजनीतिक प्रतिबद्धता, नीतियों और वित्तपोषण को मजबूत करे।

--आईएएनएस

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