
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : May 27, 2026 12:22 PM IST
WHO की पूर्व चीफ ने इबोला संक्रमण को लेकर बड़ी बात कही है। (ChatGPT)
भारत में भी इबोला संक्रमण का संदिग्ध मामला दर्ज किया गया है। युगांडा से भारत आई महिला में इबोला संक्रमण के हल्के लक्षण पाए गए थे। इसके बाद महिला को अस्पताल भर्ती कराया गया है। भारत के अलावा यूरोप और अफ्रीका में इबोला संक्रमण के बढ़ते मामलों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की पूर्व चीफ साइंटिस्ट डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने चिंता जताई है। डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा है कि इबोला संक्रमण के बढ़ते मामले इंटरनेशनल ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी है। उन्होंने बताया कि यह इबोला का एक दुर्लभ स्ट्रेन है और सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अब तक इस स्ट्रेन के लिए डायग्नोस्टिक टेस्ट, इलाज के विकल्प और इससे संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन मौजूद नहीं है।
डॉ. स्वामीनाथन ने कहा कि शुरुआती मरीजों की जब सामान्य इबोला टेस्ट से जांच की गई तो रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इसी वजह से वायरस कई हफ्तों तक फैलता रहा और बाद में उसकी पहचान हो सकी। अब वैज्ञानिकों ने इसकी स्ट्रेन सीक्वेंसिंग कर ली है और यह साफ हो गया है कि यह “Bundibugyo strain” है।
इटली के मिलान शहर में इबोला संक्रमण के 2 मामले दर्ज किए गए हैं।
भारत में इबोला संक्रमण से होने वाले खतरे पर बोलते हुए डॉ. स्वामीनाथन ने कहा- 'स्वास्थ्य मंत्रालय और अन्य एजेंसियों की ओर से जो जानकारी लोगों को दी जा रही है, उससे लोगों में भरोसा पैदा होना चाहिए कि फिलहाल घबराने जैसी स्थिति नहीं है। हंटा वायरस और इबोला के मामले में भारत पर कोई बड़ा खतरा नहीं है, लेकिन ग्लोबलाइजेशन और हवाई यात्रा के इस दौर में हम पूरी तरह निश्चित नहीं हो सकते है। इसलिए भारत के लोगों को इबोला संक्रमण से घबराने की बजाय सावधानी और तैयार रहने की जरूरत है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में नए वायरस, पुराने वायरस और दोबारा उभरने वाले संक्रमण लगातार सामने आते रहेंगे और दुनिया को इसके लिए तैयार रहना होगा।
इबोला संक्रमण से लड़ाई में भारत की भूमिका पर भी डॉ. स्वामीनाथन ने अपना पक्ष रखा है। उन्होंने कहा- देश रिसर्च एंड डेवलपमेंट, डायग्नोस्टिक्स, इलाज और वैक्सीन विकास में बड़ी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि ICMR के जरिए भारत मोनोक्लोनल एंटीबॉडी के तेजी से विकास में योगदान दे सकता है। इससे इबोला संक्रमण से बचाव करने और इसका इलाज करना आसान हो जाएगा। इबोला के शुरुआती लक्षणों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि बुखार, मतली, सिरदर्द और शरीर पर चकत्ते इसके सामान्य शुरुआती संकेत हो सकते हैं। यह लक्षण आमतौर पर सामान्य वायरल इंफेक्शन जैसे ही नजर आते हैं। इस स्थिति में घबराने की बजाय डॉक्टर से बात करना जरूरी है।
इबोला के नए स्ट्रेन के खिलाफ वैक्सीन तैयार की जा रही है। (Image credits: ChatGPT)
डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने कहा कि ऑक्सफोर्ड, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के साथ मिलकर इबोला के इस विशेष स्ट्रेन के लिए वैक्सीन पर काम कर रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि इबोला संक्रमण के नए स्ट्रेन के खिलाफ जल्द ही वैक्सीन आएगी और इसका खतरा कम होगा।
Disclaimer: इबोला संक्रमण के बढ़ते मामले हम सबके लिए चिंताजनक हैं, लेकिन थोड़ी सी सावधानी हमें इस संक्रमण से बचा सकती है। इसलिए इबोला का कोई भी लक्षण खुद में नजर आने पर तुरंत डॉक्टर से बात करें। इबोला की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद डॉक्टर से इलाज कराएं। खुद को क्वारंटाइन करे।