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राष्ट्रीय राजधानी और उसके आसपास डेंगू के मामलों में भारी वृद्धि से दिल्ली के अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया है। इस वजह से अस्पतालों को डेंगू के रोगियों के लिए बिस्तरों की संख्या बढ़ाना पड़ रहा है। सिविक बॉडी की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस सीजन में 23 अक्टूबर तक डेंगू से एक मौत और कुल 1,006 मामले दर्ज किए गए हैं, जो कि 2018 के बाद से इसी अवधि के लिए सबसे अधिक मामले हैं।
दिल्ली में इस सीजन में दर्ज किए गए डेंगू के कुल मामलों में से, इस महीने 23 अक्टूबर तक 665 दर्ज किए गए हैं।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, एम्स, राम मनोहर लोहिया, लोक नायक, सर गंगा राम, अपोलो और मैक्स दिल्ली के उन अस्पतालों में शामिल हैं, जहां डेंगू के मरीजों के लिए बेड की संख्या में इजाफा हुआ है।
एम्स में मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ आशुतोष विश्वास ने मिडिया को बताया, "वर्तमान में हमारे पास अस्पताल में 30 से अधिक डेंगू के मरीज भर्ती हैं। उनमें से ज्यादातर में गंभीर लक्षण हैं।"
इस बीच, दिल्ली उच्च न्यायालय ने 27 अक्टूबर को तीन नगर निगमों और अन्य नागरिक एजेंसियों को मच्छरों के संक्रमण को नियंत्रित करने और राष्ट्रीय राजधानी में मलेरिया, डेंगू और चिकनगुनिया जैसी वेक्टर जनित बीमारियों को रोकने के लिए उनके द्वारा उठाए गए कदमों पर आगे की स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।
अदालत ने तीनों एमसीडी पूर्व, दक्षिण और उत्तर, दिल्ली सरकार, दिल्ली जल बोर्ड, दिल्ली छावनी और नई दिल्ली नगर परिषद को 24 दिसंबर को मामले की अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा।
दरअसल, अदालत ने मई में राष्ट्रीय राजधानी में मच्छरों के संक्रमण और चल रहे कोविड-19 महामारी के बीच वेक्टर जनित बीमारियों के बढ़ने की संभावना के बारे में चिंता व्यक्त करते हुए खुद ही एक जनहित याचिका शुरू की थी।