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अमेरिका में प्री-टर्म बर्थ के मामलों में बढ़ोतरी, इन बीमारियों से बढ़ा प्री-मैच्योर बच्चों के जन्म का रिस्क

एक नयी स्टडी के अनुसार, US में पिछले 10 साल में प्रीटर्म बर्थ या समय से पहले बच्चे पैदा होने के मामले 10 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : September 29, 2024 4:01 AM IST

Preterm birth on rise in US: प्रेगनेंसी के 9 महीने पूरे होने से पहले अगर किसी बच्चे का जन्म होता है तो अर्ली डिलिवरी कहते हैं और अगर बच्चा 37 वीक पूरे करने से पहले पैदा हो जाए तो उसे प्री-मैच्योर डिलिवरी कहा जाता है। 5 लाख महिलाओं पर की गयी एक स्टडी में पाया गया है कि अमेरिका में बीते 10 साल में प्री-टर्म या प्री-मैच्योर डिलिवरी की संख्या बढी है। स्टडी के परिणाम जर्नल जेएएमए नेटर्क ओपेन (Journal JAMA Network Open.) में प्रकाशित किए गए।

इन कारणों से बढ़ रहे समय-पूर्व प्रसव के मामले

समय से पहले बच्चे के जन्म होन के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं जिसनें प्रेगनेंट महिला में डायबिटीज (diabetes) की बीमारी, एसआईटी (sexually transmitted infections) और मेंटल हेल्थ से जुड़ी परेशानियां भी हैं। वहीं, अन्य कई कारण भी महिलाओं के शरीर को कमजोर बनाने और प्रेगनेंसी का टर्म पूरा करने में परेशानी लाने का काम कर सकते हैं।

स्टडी की लेखिका लॉरा जेलिफी-पॉवलोव्स्की (Lead study author Laura Jelliffe-Pawlowski, a professor at the NYU Rory Meyers College of Medicine in New York City) का कहना है कि, इन समस्याओं और रिस्क फैक्टर्स को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

प्री-टर्म बेबीज को हो सकती हैं कई हेल्थ प्रॉब्लम्स

बता दें कि 37 सप्ताह पूरे करने से पहले पैदा होने वाले बच्चों में कई तरह की बीमारियों, मानसिक, भावनात्मक और इंटेलेक्ट से जुड़ी समस्याओं का रिस्क ज्यादा होता है। वहीं, इन बच्चों में समय से पहले मृत्यु का भी खतरा अधिक होता है।

स्टडी के दौरान पाया गया कि प्री-टर्म बर्थ का खतरा उन महिलाओं में भी अधिक था तो स्मोकिंग या किसी और तरीके से तम्बाकू का सेवन करती हैं। साथ ही प्रेगनेंसी में हाई ब्लड प्रेशर (high blood pressure) लेवल, इंफेक्शन (Infection) और डायबिटीज (Diabetes in pregnancy) जैसे कारणों से भी प्री-टर्म बर्थ का खतरा बढ़ जाता है।