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रूजुता दिवेकर के इस वीडियो में देखें कि किस तरह सेहत के लिए जरूरी है अपनी भाषा

लोकप्रिय डायटीशियन और स्पीकर रूजुता दिेवेकर बता रही हैं कि किस तरह सेलिब्रेट करना है इंडीजीनियस ईयर!

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Written By: Yogita Yadav | Published : February 21, 2019 6:16 PM IST

रूजुता दिवेकर न केवल सफल और लोकप्रिय डायटीशियन हैं बल्कि एक प्रभावशाली वक्‍ता भी हैं। लोग डायट और कल्‍चर पर दिए गए उनके वक्‍तव्‍यों को खूब सुनते हैं। आज मातृभाषा दिवस के अवसर पर वे बता रहीं है कि इंडि‍जीनियस को कैसे और क्‍यों सेलिब्रेट करना चाहिए।

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क्‍या है इंडि‍जीनियस ईयर

वर्ष 2019 को इंडीजीनियस ईयर घोषित किया गया है। अर्थात इस वर्ष हमें अपनी विविधता और मौलिक संस्‍कृति के संरक्षण की ओर ध्‍यान देना है। इंडिजीनियस का अर्थ समझाते हुए रूजुता दिवेकर कहती हैं कि वे भाषाएं जो हमारी दादी-नानी बोलती थीं, जिन्‍हें हम आज भी घरों में बोलते हैं वे इंडिजीनियस हैं। सेहत के ख्‍याल से भी इसे सेलिब्रेट करना जरूरी है।

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ये है नुकसान

वे कहती हैं जब हम अपनी भाषा भूलने लगते हैं तो अपनी संस्‍कृति भी भूलने लगते हैं। हमारा खानपान हमारी संस्‍कृति का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। अपना मौलिक खानपान भूलकर जब हम आयातित व्‍यंजनों की ओर आकर्षित होते हैं तो उन्‍हें बनाने और खाने का सही तरीका और साइड इफैक्‍ट पता न होने के कारण हम कई बीमा‍रियों के शिकार होने लगते हैं। जिससे सेहत का तो नुकसान होता ही है हम कई तरह की मानसिक बीमारियों से भी घिर जाते हैं।

सेहत के लिए अच्‍छा है मौलिक खानपान

इंडिजीनियस को सेलिब्रेट करने के लिए जरूरी है कि हम अपने मौलिक खानपान की ओर ध्‍यान दें। पिज्‍जा खाने की बजाए दाल-चावल को प्राथमिकता दें। जिन्‍हें पकाने और खाने का तरीका हमें किसी से सीखने की जरूरत नहीं है, बल्कि हम बरसों से इन्‍हें करते आए हैं और हमारे शरीर को भी इनकी आदत है।