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Written By: Editorial Team | Published : October 5, 2018 7:33 AM IST
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केंद्र की रोक के बाद भी गाजियाबाद की बायोमेड कंपनी से बनी संक्रमित पोलियो वैक्सीन देश के 10 राज्यों के एक करोड़ बच्चों तक पहुंच गई। 10 सितम्बर को केंद्र से मिले निर्देश के बाद भी राज्य सरकारें पूरी तरह से रोक नहीं लगा पाईं। यूपी में यह सीएचसी-पीएचसी व अन्य सेंटरों तक सप्लाई हो गई और बच्चों को ड्रॉप पिलाई जा रही थी। अब पूरे राज्य से इन दवाओं को वापस मंगाया जा रहा है। मिर्जापुर के दो सेंपल से इसकी पुष्टि हुई थी। हालांकि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि इस वैक्सीन से संक्रमण का खतरा नहीं है।
पोलियो वैक्सीन में पोलियो वायरस टाइप-2 मिलने से सबसे अधिक हड़कंप उत्तर प्रदेश में मचा है। अब जबकि प्रदेश में इस वैक्सीन के प्रयोग पर रोक लग गई है, लेकिन अब भी केंद्र और राज्य की एजेंसियां जांच में जुटी हैं। सितंबर में मिर्जापुर के कई बच्चों में टाइप-2 वायरस मिला था। मिर्जापुर में पांच अगस्त को पोलियो की वैक्सीन पिलाई गई थी। सात अगस्त को एक बच्चे के पैरों में दिक्कत आई तो बच्चे के शौच के नमूने की जाँच कराई गई। इसमें वायरस का पता चला। सितम्बर में ही केंद्रीय औषधि विभाग ने गाज़ीपुर में की जांच की।
इस जांच में भी पी-2 वायरस की पुष्टि हुई। यही नहीं इस वायरस से वाराणसी, मिर्जापुर, गाज़ीपुर, मऊ, इलाहाबाद, जौनपुर सहित अन्य जिलों के भी बच्चे प्रभावित थे। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आगरा, अलीगढ़, मुरादाबाद, मेरठ भी प्रभावित बच्चों के सेंपल मिले। लगातार कई मामले मिलने के बाद केंद्र और राज्य की एजेंसियों ने कई वैक्सीन को जांच के लिए भेजा। गाजियाबाद की कंपनी की वैक्सीन में पी-2 वायरस की पुष्टि हुई और केंद्रीय प्रयोगशाला ने वैक्सीन की गुणवत्ता को खराब बताते हुए इस्तेमाल पर रोक लगाने के निर्देश जारी कर दिए।
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केंद्र ने 10 सितम्बर को अलर्ट किया
प्रतिरक्षण कार्यक्रम के डीसी डॉ. प्रदीप हलधर ने बुधवार 3 अक्टूबर को सभी राज्यों के एनएचएम मिशन निदेशकों को पत्र लिखकर इस बारे में फिर अलर्ट किया। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि गाजियाबाद की बायोमेड प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की पोलियो ऑरल वैक्सीन का प्रयोग तत्काल रोक दिया जाए। इस संबंध में 10 सितम्बर 2018 को भी एक निर्देश ईमेल के जरिए भेजा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि बैच नंबर बी-100318 की वैक्सीन को मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया है। इसके अलावा बैच नंबर बी-100218 और बी-100418 भी इसी श्रेणी में हैं। इन्हें राज्यों को भेजा गया है। डीसी प्रतिरक्षण ने निर्देशित किया है कि यदि संबंधित राज्यों में इन बैच के पोलियो वैक्सीन हैं तो उन्हें तत्काल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को सूचित करें। साथ ही इनका प्रयोग किसी भी हाल में न होने पाए।
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पूरे देश में होती है सप्लाई
गाजियाबाद की फर्म से निर्मित पोलियो वैक्सीन की सप्लाई केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के माध्यम से पूरे देश में होती है। संक्रमित बैच वाली दवाइयों की खेप यूपी सहित आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना, महाराष्ट्र सहित 10 अन्य राज्यों में पहुंच चुकी थीं। कई अन्य राज्यों में भी इनकी खेप पहुंचने वाली थी।
यूपी सरकार कराएगी जांच
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और केंद्रीय ड्रग्स कंट्रोलर के साथ यूपी के स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय व ड्रग्स कंट्रोल विभाग इस मामले में जांच कर रहा है। जांच के प्रमुख पहलू यह हैं कि जब 2016 में इस वायरस को खत्म कर दिया गया और लैब से भी इसे खत्म करने के निर्देश थे तो इस कंपनी की लैब में यह वायरस कैसे बचे रह गए।
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स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा- वैक्सीन से संक्रमण का खतरा नहीं
केंद्रीय प्रतिरक्षण अधिकारी के अनुसार यूपी, महाराष्ट्र और तेलंगाना में खतरा अधिक है। इन राज्यों के कई जिलों में संक्रमित पोलियो वैक्सीन बच्चों को पिलाई जा चुकी हैं। हालांकि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने साफ किया है कि इस पोलियो वैक्सीन से किसी प्रकार का संक्रमण होने का खतरा नहीं है। यह बेहद कमजोर किस्म का वायरस है। जिन क्षेत्रों में यह दवा पिलाई जा चुकी है वहां मॉपअप राउंड चलाकर ऐहतियात के तौर पर बच्चों को पोलियो ड्रॉप दी जा चुकी है।