
रश्मि उपाध्याय
रश्मि उपाध्याय साल 2014 से मीडिया क्षेत्र से जुड़ी हैं और TheHealthSite.Com में बतौर एडिटर काम कर रही हैं। इन्हें ... Read More
Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : February 4, 2021 10:26 PM IST
जैसे-जैसे दुनिया में इंसानों की संख्या बढ़ रही है ठीक वैसे ही कैंसर भी विश्वस्तर पर बढ़ रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) की उस रिपोर्ट ने देशवासियों को हैरान कर दिया जिसमें यह कहा गया है कि फेफड़ों के कैंसर की जगह अब भारत में ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) ने ले ली है। इंडिया में ब्रेस्ट कैंसर, कैंसर से होने वाली मौत का नंबर वन कारण बन चुका है। WHO के अनुसार भारत में सभी कैंसरों में अभी तक लोगों की मौत सबसे ज्यादा फेफड़ों के कैंसर (Lungs Cancer) के कारण होती थी, लेकिन अब स्तन कैंसर ने उसकी जगह ले ली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) में कैंसर स्पेशलिस्ट एनड्री इल्बावी का कहना है कि भारत में ब्रेस्ट कैंसर पहली बार लोगों की सबसे ज्यादा मौत का कारण बन रहा है।
इल्बावी का कहना है कि पिछले दो दशकों में फेफड़े का कैंसर (Lungs Cancer) सबसे आम प्रकार था, लेकिन अब कोलोरेक्टल कैंसर से आगे दूसरे स्थान पर है, जो तीसरा सबसे व्यापक कैंसर है। उनका कहना है कि महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) होने का सबसे बड़ा कारण ओबेसिटी है। ऐसे में ओबेसिटी के चलते महिलाएं सिर्फ ब्रेस्ट कैंसर (Breast Cancer) ही नहीं बल्कि और भी कई रोगों का शिकार होती हैं। इल्बावी का कहना है कि जैसे-जैसे दुनिया में इंसानों की संख्या बढ़ रही है ठीक वैसे ही कैंसर भी विश्वस्तर पर बढ़ रहा है। वर्तमान में यानि कि 2020 में हर साल ब्रेस्ट कैंसर के करीब 19.3 मिलियन मामले सामने आए थे। लेकनि ऐसा अनुमान है कि 2040 तक ये संख्या 30 मिलियन तक पहुंच सकती है।
एक्सपर्ट का कहना है कि कोरोनावायरस के कारण भी कैंसर के इलाज में देरी आई है। अस्पताल जा कर लोग कोरोना संक्रमित न हो जाए इसलिए महामारी के दौरान लोगों ने शरीर में दिखने वाले लक्षणों को नजरअंदाज किया। इस विषय पर इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के डॉक्टर्स भी अपनी राय दे चुके हैं। उनका कहना है कि पिछले कुछ समय में बच्चों में कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान करने और इलाज करने में देरी हुई है। ऐसे में बच्चों का कैंसर की स्टेज 2 और स्टेज 3 में आने की संभावना बढ़ सकती है।