भारत में पैसों की कमी के कारण 60% मरीज बीच में ही छोड़ देते हैं इलाज, जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट
डॉ. प्रज्ञा रश्मि कहती हैं कि बहुत से मरीज जरूरत के इलाज सिर्फ इसलिए टाल देते हैं क्योंकि वे बीमारी से ज्यादा पैसों के खर्च और तनाव से डरते हैं।
भारत का हेल्थकेयर सेक्टर भले ही तकनीक और सुविधाओं के मामले में तेजी से आगे बढ़ रहा हो, लेकिन आज भी एक आम भारतीय के लिए इलाज का खर्च उठाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। हाल ही में एक हेल्थकेयर कंपनी द्वारा किए सर्वे में पता चलता है कि भारत में इलेक्टिव हेल्थकेयर जैसे आईवीएफ, डेंटल और कॉस्मेटोलॉजी आदि में लोग डॉक्टर से कंसल्ट तो कराते हैं लेकिन पैसों की कमी के कारण आगे इलाज नहीं करा पाते। यानि कि 10 में से लगभग 6 मरीज डॉक्टर से कंसल्टेशन लेते हैं लेकिन पैसों की कमी के कारण इलाज बीच में ही छोड़ देते हैं।
क्यों छोड़ना पड़ता है बीच में इलाज?
इलेक्टिव प्रोसीजर्स जैसे कि आईवीएफ, डर्मेटोलॉजी, कॉस्मेटोलॉजी, डेंटल और अन्य वेलनेस ट्रीटमेंट्स के लिए अस्पतालों या क्लीनिकों में एडवांस यानी तुरंत पेमेंट करनी पड़ती है। उदाहरण के लिए, एक आईवीएफ साइकिल की लागत ही लगभग 1.2 से 1.5 लाख रुपये तक होती है। मिडिल क्लास फैमिली के पास अचानक इतना कैश नहीं होता है, जिसके कारण वे लोन या फाइनेंसिंग के ऑप्शन ढूंढते हैं, अगर लोन नहीं मिलता तो इलाज को छोड़ना पड़ता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
हैदराबाद के सिकंदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल्स की अनुभवी और सीनियर कंसलटेंट साइकोलॉजिस्ट डॉ. प्रज्ञा रश्मि कहती हैं कि बहुत से मरीज जरूरत के इलाज सिर्फ इसलिए टाल देते हैं क्योंकि वे बीमारी से ज्यादा पैसों के खर्च और तनाव से डरते हैं। उन्हें यह डर रहता है कि कहीं इलाज कराते कराते वे कंगाल न हो जाएं। ऐसा नहीं है कि उन्हें इलाज की जरूरत नहीं होती। बल्कि जब इलाज का खर्च बहुत ज्यादा हो तो लोग तब तक इलाज नहीं कराते हैं जब तक कंडीशन सीरियस न हो जाए। डॉक्टरी नजरिए से देखें तो किसी भी बीमारी का शुरुआत में ही इलाज कर लेना हमेशा बेहतर होता है, क्योंकि इससे जटिलताएं कम होती हैं और मरीज के ठीक होने की उम्मीद बढ़ती है। मरीजों को समय पर सही फैसला लेने में मदद करने के लिए इलाज का किफायती होना, इंश्योरेंस की सही समझ और हॉस्पिटल की तरफ से खुलकर बात करना बहुत जरूरी है। इसलिए, इलाज का खर्च कम करना सिर्फ एक पैसों का मामला नहीं है, बल्कि यह मरीजों की सेहत को सुधारने और उनकी जान बचाने का एक बेहद जरूरी हिस्सा भी है।
Disclaimer: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी केवल आपकी जागरुकता के लिए हैं। अगर आपको कोई खास लक्षण महसूस हो तो परेशान न हो, समय पर डॉक्टर को दिखाकर जांच कराएं।