दिल्‍ली में Covishield की 4.1% और Covaxin की 17.5% डोज हाे रही हैं बेकार, जानें क्‍या है इसका कारण

दिल्ली के सीनियर गर्वमेंट ऑफिशियल के अनुसार राजधानी में कोविशील्ड (Covidshield) की 4.1% और कोवैक्सीन (Covaxin) की 17.5% डोज बर्बाद हो रही है।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : February 11, 2021 11:26 AM IST

देशभर में कोरोना वैक्‍सीन आने से लोगों को बहुत राहत है। 16 जनवरी से देशभर में शुरू हुए वैक्‍सीनेशन ड्राइव में फिलहाल हेल्‍थ वर्कर्स और फ्रंट-लाइन वर्कर्स को वैक्‍सीन की डोज दी जा रही है। सरकारी डाटा के अनुसार राजधानी दिल्‍ली में अब तक 131,935 स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों को कोरोना वैक्‍सीन दी जा चुकी है। इसके साथ ही सरकारी आंकड़े ये भी बताते हैं कि राजधानी दिल्‍ली में कोरोना वैक्‍सीन (Corona Vaccine In Delhi) की वेस्‍टेज भी हो रही है। दिल्‍ली के सीनियर गर्वमेंट ऑ‍फिशियल के अनुसार राजधानी में कोविशील्‍ड (Covishield) की 4.1% और कोवैक्‍सीन (Covaxin) की 17.5% डोज बर्बाद हो रही है।

ऑफिशियल के अनुसार दिल्‍ली में कोविशील्‍ड वैक्‍सीन (Covishield Vaccine) की 4.1% डोज बेकार हो रही है। यानि कि हर 1000 पर 41 डोज बर्बाद हो रही है। जब‍कि कोवैक्‍सीन की बात करें तो उसकी वेस्‍टेज दर 17.5% है। हालांकि दिल्‍ली में वैक्‍सीन की बर्बाद होने वाली दर नेशनल एवरेज से बहुत कम है। क्‍योंकि राष्‍ट्रीय स्‍तर पर कोविशील्‍ड की 6.3% और कोवैक्‍सीन की 25.8% डोज वेस्‍ट हो रही हैं। जबकि कोविशील्‍ड ऑक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका वैक्सीन का इंडियन वेरिएशन है और इसे पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) द्वारा निर्मित किया गया है। जबकि कोवैक्‍सीन को इंडयन फर्म भारत बायोटेक द्वारा बनाया गया है।

COVID-19 vaccine

ऑफिशियल के अनुसार, जब देशभर में 16 जनवरी से वैक्‍सीनेशन ड्राइव शुरू हुई थी तो पहले बैच में दिल्‍ली को कोविशील्‍ड की 264,000 और कोवैक्‍सीन की 20,000 डोज मिली थी। दिल्‍ली में अब तक 131,935 लोगों को कोरोना वैक्‍सीन लग चुकी है। अधिकारी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने हर राज्‍य और केंद्र शासित प्रदेश के लिए 10% तक वैक्‍सीन की वेस्‍टेज को स्‍वीकार करने की बात कही है। यानि कि केंद्र सरकार ने पहले ही जिस राज्‍य को जितनी वैक्‍सीन मिलनी थी, उसके साथ 10% का मार्जन लेते हुए वैक्‍सीन वितरण किया था। हालांकि सरकार ने राज्‍य और केंद्र शासित प्रदेशों को वैक्‍सीन की वेस्‍टेज पर नजर रखने को कहा है।

क्‍यों बेकार हो रही है वैक्‍सीन की डोज?

सरकारी अधिकारी कहते हैं कि दिल्‍ली में वैकसीन की डोज बर्बाद होने के पीछे 2 कारण हो सकते हैं। पहला ये कि प्रति खुराक की शीशी की उच्च संख्या, मैनेंजमेंट में कठिनाई पैदा कर रही है क्योंकि सभी खुराक को शीशी के खुलने के चार घंटे के भीतर प्रशासित किया जाना है; और कोवाक्सिन को संचालित करने वाले केंद्रों में अपेक्षाकृत कम मतदान हो रहा है।

Covaxin

Covaxin हो रही है ज्‍यादा बर्बाद

हेल्‍थ डिर्पामेंट के सीनियर अधिकारी का कहना है कि सभी राज्‍यों में कोविशील्‍ड की तुलना में कोवैक्‍सीन की डोज ज्‍यादा बर्बाद हो रही हैं। इसका कारण ये है कि कोवैक्‍सीन की हर एक बोतल में 20 डोज होती हैं। जबकि कोविशील्‍ड की बोतल में सिर्फ 10 डोज होती हैं। जैसे ही बोतल खुलती है तो उसके 4 घंटे के अंदर सभी डोज को इस्‍तेमाल करना जरूरी है, नहीं तो उनकी प्रभावशीलता कम हो जाती है। ऐसे में यदि मौके पर मरीज नहीं है या अन्‍य कारणो के कारण कोवैक्‍सीन की डोज वेस्‍ट हो रही है।

Covishield की लग रही है ज्‍यादा डोज

सरकारी डाटा के अनुसार, दिल्‍ली के 183 वैक्‍सीनेशन केंद्रों में से 151 पर कोविशील्‍ड और 33 पर कोवैक्‍सीन की डोज लग रही है। हर सेंटर का प्रतिदिन का टारगेट वैक्‍सीन की 100 डोज देना होता है। बीते मंगलवार को ही राजधानी में कुल 12,717 लोगों को कोरोना की वैक्‍सीन लगी है। जिसमें से 10,694 लोगों को कोविशील्‍ड और सिर्फ 2,023 लोगों को कोवैक्‍सीन की डोज लगी है।

Covaxin Vaccine

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