
साधना तिवारी
साधना तिवारी 15 वर्षों से मीडिया क्षेत्र में हैं। लगभग 9 वर्षों से अधिक समय से ZEE ग्रुप के साथ जुड़ी हुई ... Read More
Written By: Sadhna Tiwari | Updated : January 12, 2021 1:45 PM IST
Covid-19 Infection: कोरोना वायरस के प्रसार से जुड़ा एक बड़ा खुलासा आइआइटी मद्रास (IIT Madras) के एक्सपर्ट्स ने किया है। इन एक्सपर्ट्स का दावा है कि सांस रोककर (Holding Breath) रखने से भी कोरोना संक्रमण का रिस्क (Risk of Covid-19 Spread) बढ़ सकता है। जी हां, चेन्नई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की शाखा में वैज्ञानिकों ने एक रिसर्च का आयोजन किया और उसके परिणामों के आधार पर यह दावा किया। (Covid-19 Infection and Breathing )
इन वैज्ञानिकों ने लैब में सांस लेने की आवृत्ति को बेहतर ढंग से समझने के लिए एक मॉडल का सहारा लिया। इसमें यह देखा गया कि वायरस युक्त ड्रापलेट्स (Aerosol) के संचार की दर लंग्स पर किस प्रकार का प्रभाव डालती है और कैसे उसे संक्रमित कर सकती है। इस रिसर्च पेपर के परिणाम इंटरनेशनल साइंस जर्नल फीजिक्स ऑफ फ्लूड्स (Physics of Fluids) में भी प्रकाशित किए गए हैं। इस रिसर्च पेपर को कोविड-19 संक्रमण और श्वसन मार्ग से जुड़ी अन्य संक्रामक बीमारियों के इलाज के लिहाज से मददगार माना जा रहा है। (Covid-19 Spread)
इन वैज्ञानिकों का कहना है कि लैब में सांस लेने की आवृत्ति का मॉडल तैयार किया और रिसर्च के दौरान देखा गया कि सांस रोककर रखने या कम सांस लेने से वायरस फेफड़ों में अधिक समय तक ठहर रह सकता है, जिससे वायरस वहां छुप सकता है और फेफड़ों को बहुत अधिक नुकसान पहुंचा सकता है। रिसर्चर्स के अनुसार फेफड़ों में कोरोना वायरस के अधिक समय तक रहने से सांस रोकने वाले व्यक्ति के लिए इंफेक्शन की संभावना बढ़ जाती है। (Holding breath can increase risk of Covid-19 Infection)
इस रिसर्च टीम का हिस्सा रहे प्रोफेसर महेश पंचाग्नुला (आइआइटी मद्रास में एप्लाइड मैकेनिक्स विभाग प्रोफेसर) के मुताबिक, कोविड-19 महामारी (Covid-19 Infection) ने फेफड़ों से जुड़े रोगों के बारे में नयी बातें सीखने के रास्ते खोले हैं। इस रिसर्च में उस शारीरिक प्रक्रिया को दर्शाया गया है, जिसके माध्यम से छींक या खांसी के साथ हवा में फैली छोटी बूंदें या एयरोसोल फेफड़ों के अंदर तक प्रवेश करता है। रिसर्च के दौरान यह पाया गया कि, सांस रोककर रखने या धीरे-धीरे या कम सांस लेने से लंग्स में वायरस जमा हो सकते हैं। यह ना केवल संक्रमण का कारण बन सकता है बल्कि, फेफड़ों को कमज़ोर कर उसे इंफेक्शन के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकता है। ( Covid-19 Infection Risk)