जानिए, किस जेल को लगाने से आने लगेंगे सिर पर बाल

जीन, बीमारी, ट्रॉमा और सर्जरी जैसे विभिन्न कारणों से मनुष्य अस्थायी या स्थायी तौर पर गंजा हो सकता है।

WrittenBy

Written By: Editorial Team | Published : July 17, 2018 4:32 PM IST

क्या आप झड़ते बालों से परेशान हैं? डर सताने लगा है कि कहीं आप गंजे न हो जाएं। वैसे तो गंजेपन को दूर करने के लिए आज कई तकनीक आ गई है, लेकिन ये सभी महंगे होने के कारण हर किसी के लिए इसका इस्तेमाल करना आसान नहीं होता। कोई बात नहीं, यदि आप गंजे हो रहे हैं, तो एक नए जेल को लगाकर फिर से बाल सिर पर आ सकते हैं। यह एक हाइड्रोजेल है, जिसे आईआईटी, दिल्ली के वैज्ञानिकों ने विकसित किया है।

यह हाइड्रोजेल बालों की ग्रोथ में काफी मददगार हो सकता है। ऐसा इन वैज्ञानिकों का दावा है। यह हाइड्रोजेल रेशम आधारित है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसका जंतुओं पर परीक्षण किए बिना ही गंजेपन का उपचार करने के लिए दवा बनाने में मदद मिल सकती है।

सेलुलर फिजिओलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन की रिपोर्ट से यह पता चलता है कि किस तरह से 3 डी तकनीक इस प्रक्रिया में मददगार साबित हो सकती है। जीन, बीमारी, ट्रॉमा और सर्जरी जैसे विभिन्न कारणों से मनुष्य अस्थायी या स्थायी तौर पर गंजा हो सकता है। गंजेपन की इस समस्या से अधिकतर पुरुष परेशान रहते हैं। इस समस्या को रोकने के लिए कई तरह के तेल, क्रीम और दवाएं व्यावसायिक रूप से उपलब्ध हैं, लेकिन इसका सफल उपचार अभी तक एक सपना ही है।

आईआईटी के एसोसिएट प्रोफेसर सौरभ घोष का कहना है कि इस तरह की समस्या का बड़ा कारण यह है कि दवा परीक्षण के लिए कोई उपयुक्त मानव कोशिका आधारित कृत्रिम परिवेशीय मॉडल उपलब्ध नहीं है। गंजेपन को रोकने के लिए वर्तमान में उपलब्ध दवाओं का इस्तेमाल जंतुओं पर किया जाता है।

प्रोफेसर घोष का कहना है कि मानव और जंतुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता और शारीरिक संरचना में भिन्नताओं की वजह से इस तरह की दवाओं की सफलता काफी सीमित हो जाती है। उन्होंने कहा कि हमें मानव कोशिकाओं का इस्तेमाल कर बालों की सतह का कृत्रिम परिवेशीय मॉडल विकसित करने की अत्यंत आवश्यकता महसूस हुई। यदि यह सफल रहा तो इस तरह की दवाएं गंजेपन का सामना कर रहे लोगों की समस्या का समाधान कर देंगी।

अध्ययन करने वाली टीम में बेंगलुरू स्थित आईटीसी लाइफ साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी सेंटर के शोधार्थी भी शामिल थे, जिन्होंने रेशम के कीड़े से अलग किए गए रेशम प्रोटीन और जिलेटिन के मिश्रण से हाइड्रोजेल विकसित किया। स्थायी हाइड्रोजेल प्रणाली विकसित करने के लिए टाइरोसिनासे एंजाइम का इस्तेमाल किया गया।

चित्रस्रोत: Shutterstock.

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source