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मधुमेह से हैं पीडि़त तो हो सकता है आंखों को खतरा, ऐसे रखें उनका ध्‍यान

मधुमेह पीड़ितों में दृष्टिहीन होने का जोखिम 25 प्रतिशत अधिक, लक्षण महसूस होने पर तुरंत करवाएं जांच।

मधुमेह से हैं पीडि़त तो हो सकता है आंखों को खतरा, ऐसे रखें उनका ध्‍यान
मधुमेह पीड़ितों में दृष्टिहीन होने का जोखिम 25 प्रतिशत अधिक, लक्षण महसूस होने पर तुरंत करवाएं जांच। ©Shutterstock

Written by Yogita Yadav |Published : November 14, 2018 7:12 PM IST

डायबिटीज यानी मधुमेह के कारण डायबेटिक मैक्युलर एडीमा (डीएमई) हो सकता है, जो रेटिना का तेजी से फैलने वाला रोग है, जिससे व्यक्ति में दृष्टिहीनता भी हो सकती है। मधुमेह से पीड़ित लोगों में अन्य लोगों की तुलना में दृष्टिहीन होने का जोखिम 25 प्रतिशत अधिक होता है।

विश्व मधुमेह दिवस (14 नवंबर) के अवसर पर दिल्ली आई केयर में ऑफ्थैल्मोलॉजिस्ट एवं आई सर्जन डॉ. शशांक राय गुप्ता ने कहा, "मेरे क्लीनिक में आंखों की जांच के लिए आने वाले 75 प्रतिशत मधुमेह रोगियों में डायबेटिक रेटिनोपैथी की कोई न कोई अवस्था पाई जाती है। मधुमेह और डायबेटिक मैक्युलर एडीमा (डीएमई) के बढ़ते मामलों को देखते हुए हमें प्रारंभिक अवस्था में रोगियों की पहचान करने के लिए मजबूत दृष्टिकोण की आवश्यकता है।" यह भी पढ़ें - विश्‍व मधुमेह दिवस  : जानते हैं, तो मानिए भी, तभी हारेगी यह बीमारी

रहना चाहिए सजग

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"मधुमेह रोगियों को अपनी आंखों के प्रति सजग रहना चाहिए और नियमित अंतराल पर आंखों की जांच करवानी चाहिए, ताकि नेत्र रोग का पता चल सके, खासकर रेटिना के रोग।" मधुमेह मैकुलर एडीमा (डीएमई) का बोझ बढ़ रहा है और हमें शुरुआती चरण में रोगियों की पहचान करने के लिए एक मजबूत दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत है।" यह भी पढ़ें – वर्ल्‍ड डायबिटीज डे : डायबिटीज से हैं पीड़ित, तो ऐसें बनाएं अपना डायट चार्ट

करवाते रहें जांच

मधुमेह से पीड़ित रोगियों को प्रत्येक छह माह में ऑफ्थैल्मोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए और तय अपॉइंटमेन्ट से चूकना नहीं चाहिए। रोगियों को डीएमई के लक्षणों के प्रति सचेत रहना चाहिए, जैसे धुंधला या अस्पष्ट दिखाई देना, सीधी लाइनें लहरदार दिखाई देना, रंगों के प्रति असंवेदनशीलता, केन्द्रीय दृष्टि में धब्बे, आदि और दृष्टि में परिवर्तन होने पर तुरंत विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए।" यह भी पढ़ें – वर्ल्‍ड डायबिटीज डे : बचपन में न घुल जाए मधुमेह की कड़वाहट

ऐसे रखें अपनी आंखों का ध्‍यान

मधुमेह के बढ़ते स्तर के कारण मधुमेह के मरीज की आंखें इतनी कमजोर होने लगती हैं कि टीवी देखने या ड्राइविंग करने में भी समस्या आने लगती है, ये समस्या आगे चलकर अंधेपन का कारण बनती है।

मधुमेह के दौरान अंधेपन से बचने के लिए समय-समय पर डॉक्टर से चेकअप कराते रहना चाहिए।

यदि किन्हीं कारणों से मधुमेह के दौरान समय-समय पर चेकअप कराना संभव नहीं तो आपको आंखों में कोई भी तकलीफ होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मधुमेह से ग्रस्त व्यक्ति को अंधेपन से बचने के लिए, बढ़ती उम्र के साथ होने आंखों की समस्याएं होने पर डॉक्टर की सलाह पर दवाई डालते रहनी चाहिए।

मधुमेह से अंधापन न हो, इसके लिए आपको आंखों की एक्सरसाइज करनी चाहिए। ये एक्सरसाइज दो तरह की होती है एक तो किस चीज पर फोकस करके और दूसरा मशीनों द्वारा। जिन्हें डॉक्टर की मदद से किया जा सकता है।

यदि आपकी आंखें कमजोर है या फिर आंखों की मांसपेशियां इत्यादि कमजोर है तो इसे नजरअंदाज न करें , मधुमेह रोगी को अपनी आंखों की अतिरिक्त देखभाल करनी चाहिए और आंखों का सही ट्रीटमेंट डॉक्टर से लेना चाहिए।

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यदि डॉक्टर आपको चश्मा पहनने की सलाह देते हैं तो शर्म या अन्य कारणों से चश्मा पहनने में देर न करें बल्कि डॉक्टर के निर्देशानुसार नंबर का चश्मा लगवाएं और अपने मन से यह भ्रम निकाल दें कि एक बार चश्मा पहनने के बाद ये कभी नहीं उतरेगा। चाहे तो आप लैंस भी लगवा सकते हैं। हो सके तो दिन में 4-5 बार आंखों को ठंडे पानी से प्रतिदिन धोयें।

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