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होम आइसोलेशन में हैं तो चेक करते रहें अपना ऑक्सीजन लेवल, जानें कितना होना चाहिए ऑक्सीजन का स्तर
कोरोना वायरस का प्रकोप कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। आए दिन इस वायरस के नए-नए लक्षणों के साथ ही इसके शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव भी बदलते जा रहे हैं। कोरोना वायरस हमारे रेस्पिरेटरी सिस्टम के माध्यम से शरीर में जाता है और फिर संक्रमण फैलाता है। कोरोना का सबसे ज्यादा असर फेफड़ों पर पड़ता है। जब कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित होता है तो उसे सांस लेने में दिक्कत होती है। इसके साथ ही कमजोरी और थकान जैसे लक्षण भी दिखते हैं। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष व कोरोना टास्क फोर्स के सदस्य डॉ. सूर्यकांत ने बताया कि होम आइसोलेशन में रहने वालों को समय-समय पर ऑक्सीजन स्तर की जांच करते रहना चाहिए। इस पर निगरानी बहुत जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित है और उसके शरीर के ऑक्सीजन का स्तर 95 से अधिक है तो परेशान होने की कोई बात नहीं है, लेकिन यदि ऑक्सीजन का स्तर 90 से 94 के बीच पहुंचता है तो बिना देरी किए कंट्रोल रूम या चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। यदि समय रहते ऑक्सीजन लेवल को सामान्य नहीं किया गया तो मरीज की दिक्कत बढ़ सकती है।
डॉ. सूर्यकांत का कहना है कि होम आइसोलेशन का मतलब यह हे कि मरीज अपने स्वास्थ्य को लेकर गंभीर रहे और गाइडलाइन का पूरी तरह से पालन करें। जिसमें से सबसे ज्यादा जरूरी है ऑक्सीजन के स्तर की जांच करना। यदि इसमें जरा भी कमी आई तो मरीज की जान को खतरा हो सकता है। इसलिए उनका कहना है कि शरीर में ऑक्सीजन का लेवल 95 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए। यदि ऐसा होता है या मरीजा को सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है तो कंट्रोल रूम से संपर्क करना चाहिए। इसके साथ ही सीने में भारीपान या दर्द महसूसन, मानसिक भ्रम की स्थिति होनो, बोलने में कठिनाई, चेहरे में नीलापन आना, कमजोरी या होठों के सूखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
डॉ. सूर्यकान्त ने बताया कि जो होम आइसोलेशन में रह रहे हैं लेकिन उनमें कोरोना के लक्षण नहीं दिख रहे हैं उन्हें अपने पास एक किट खरीद कर रखनी चाहिए। जिसमें पल्स आक्सीमीटर, थर्मामीटर, मास्क, ग्लब्स, सोडियम हाइपोक्लोराईट साल्यूशन और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने वाली वस्तुएं शामिल हों।