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भारत में अब तक 10 करोड़ से ज्यादा लोगों का हुआ कोरोना टेस्ट, महज 50 दिनों में रिकॉर्ड के पार पहुंचा टेस्ट काउंट
भारत में लगातार बढ़ते कोरोनावायरस के मामलों के बीच इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने बताया है कि पिछले 17 दिनों में रोजाना 10 लाख से अधिक लोगों का कोरोना टेस्ट किया हुआ है, जिसके साथ ही गुरुवार को भारत में कोरोना टेस्ट का आंकड़ा 10 करोड़ को पार कर गया है। संस्थान के मुताबिक, अब तक 10 लाख लोगों पर 74,000 लोगों का टेस्ट किया जा चुका है।
ICMR के वैज्ञानिक और मीडिया कार्डिनेटर लोकेश शर्मा ने बताया कि भारत ने केवल 45 दिनों में आखिरी 5 करोड़ सैंपल टेस्ट किए हैं। जबकि 8 सितंबर तक भारत में 5 करोड़ COVID-19 टेस्ट हुए थे और 22 अक्टूबर तक यानी की अंतिम 50 दिनों से भी कम समय में यह आंकड़ा 10 करोड़ को पार कर गया है।
ICMR ने एक बयान में कहा कि ऐसा इसलिए संभव हो पाया क्योंकि देश भर में तेजी से टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और टेस्टिंग क्षमता बढ़ी है। इसके साथ ही ICMR तकनीक का लाभ उठाकर और सस्ती डायगनोस्टिक किट में इनोवेशन की सुविधा प्रदान कर टेस्ट क्षमता का विस्तार कर रहा है और देश भर में COVID-19 टेस्ट की क्षमता बढ़ा रहा है।
ICMR के महानिदेशक बलराम भार्गव ने एक बयान में बताया कि हमने केंद्र, राज्य और केंद्रशासित प्रदेश सरकारों के सहयोगात्मक प्रयासों के माध्यम से तेजी से फैली इस महामारी का बेहद ही प्रभावी ढंग से जवाब दिया है।
उन्होंने बताया, "टेस्टिंग में तेजी लाने के कारण हमें मामलों की प्रारंभिक पहचान करने में मदद मिली, जिसके कारण हम संक्रमित लोगों को आइसोलेट कर पाए और कोरोना मामलों का प्रभावी उपचार हो सका। इन सभी प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत में कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या काफी कम रही।
उन्होंने कहा, "10 करोड़ से ज्यादा लोगों का कोरोना टेस्ट करना एक मील का पत्थर साबित हुआ है और ये इस बात का प्रमाण है कि भारत 5T एप्रोच को सफलतापूर्वक लागू करने में सफल हुआ है। यहां 5T से मतलब है टेस्ट, ट्रैक, ट्रेस, ट्रीट और कुशलतापूर्वक तकनीक का प्रयोग करना। यही रवैया हमें महामारी के प्रसार को रोकने में सक्षम बनाएगा ।
उन्होंने कहा कि पूरे भारत में टेस्ट सुविधा को तेजी से बढ़ाने के कारण ही हम रोजाना इतनी बड़ी संख्या में टेस्ट करने में सफल साबित हुए हैं।
भार्गव ने कहा कि हमने अथक प्रयासों के जरिए यह सुनिश्चित किया कि किसी भी जगह को छोड़ा न जाए। हमने घने आबादी वाले क्षेत्रों में आरटी-पीसीआर टेस्ट किया, दूरस्थ क्षेत्रों में COBAS के जरिए लोगों का टेस्ट किया गया, वहीं कंटेनमेंट जोन में रेपिड एंटीजन टेस्ट के जरिए लोगों का कोरोना टेस्ट किया।
उन्होंने बताया कि कोरोना के बढ़ते मामलों का पता लगाने के लिए डायग्नोस्टिक लैब की संख्या 1989 हो चुकी है, जिसमें से 1122 लैब सरकार के अधिकृत है और निजी लैब की संख्या 867 है।