प्लाज्मा थेरेपी से मरीजों को हो सकता है नुकसान, कोरोना वायरस की लड़ाई में नहीं है 'सिल्वर बुलेट'

भारतीय अनुसंधान परिषद (ICMR) ने इसे लेकर एक बयना जारी किया है। उन्होंने कहा, "प्लाज्मा थेरेपी 'सिल्वर बुलेट' टेस्ट नहीं है और ठोस वैज्ञानिक रिसर्चों के बिना इसके इस्तेमाल की सिफारिश करना मरीजों को नुकसान पहुंचाना हो सकता है।"

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Written By: Kishori Mishra | Updated : May 5, 2020 3:48 PM IST

Plasma Therapy for Coronavirus: कोरोना वायरस (Coronavirus Treatment) की वजह से प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy for Coronavirus) की चर्चाएं काफी हो रही हैं। कई रिसर्च और डॉक्टर्स द्वारा दावा किया गया है कि प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना वायरस (Coronavirus Pandemic) का इलाज किया जा सकता है। अब भारतीय अनुसंधान परिषद (ICMR) ने इसे लेकर एक बयना जारी किया है। उन्होंने कहा, "प्लाज्मा थेरेपी 'सिल्वर बुलेट' टेस्ट नहीं है और ठोस वैज्ञानिक रिसर्चों के बिना इसके इस्तेमाल की सिफारिश करना मरीजों को नुकसान पहुंचाना हो सकता है।"

आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. बलराम भार्गव ने एक अंग्रेजी अखबार के लेख में इस बात को स्पष्ट किया गया है। इस रिसर्च पर आईसीएमआर अभी कार्य कर रहा है। यह "ओपन लेबल, रेंडमाइज्ड, कंट्रोल्ड ट्रायल" है, जो इस थैरेपी की सुरक्षा और प्रभाविता के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि इस थेरेपी की वजह से कुछ मरीजों को बुखार, फेंफड़ों को नुकसान,  खुजली और गंभीर जानलेवा दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। अभी तक सिर्फ 19 मरीजों पर प्लाज्मा थैरेपी (Plasma Therapy Treatment ) के तीन लेख प्रकाशित किए गए हैं। इतने कम मरीजों की संख्या के आधार प्लाज्मा थेरेपी की सिफारिश नहीं की जा सकती है। इसके साथ ही ये कहना भी सही नहीं होगा कि यह थेरेपी सभी मरीजों के लिए समान रूप से कारगर साबित हो सकता है।

प्लाज्मा थेरेपी के दौरान एक मरीज की हुई थी मौत 

महाराष्ट्र में प्लाज्मा थेरेपी के दौरान एक मरीज की मौत हो गई। इसलिए प्लाज्मा थेरेपी की सटीकता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय (Ministry of Health) ने भी इसे लेकर स्पष्ट किया है कि विश्व में कही भी प्लाज्मा थेरेपी (Plasma Therapy for Coronavirus) को मान्य उपचार क के तौर पर पुष्टि नहीं की गई है। सिर्फ ट्रायल के रूप में प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल किया गया है। इसके अलावा दिशा-निदेर्शों का पालन किए बिना प्लाज्मा थेरेपी घातक साबित हो सकती है।

स्वास्थ मंत्रालय (Ministry of health) ने इस बात को स्पष्ट कर दिया है कि देश के कई अस्पतालों में प्लाज्मा थेरेपी (Plasma therapy) का इस्तेमाल कोरोना मरीजों के इलाज (Plasma Therapy for Coronavirus) के लिए हो रहा है। प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल आईसीएमआर के दिशा- निदेर्शों के तहत होना चाहिए। इसके साथ ही अस्पतालों को "ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया' से भी मंजूरी लेनी जरूरी है। इसी के बाद प्लाज्मा थेरेपी की प्रकिया शुरू हो सकती है। बता दें कि अभी तक आईसीएमआर ने कोरोना के  976363 मरीजों की जांच की है।

प्लाज्मा थेरेपी क्या है? (What is Plasma Therapy)

प्रथम विश्व युद्ध के बाद सन् 1918 में सबसे पहले इस थेरेपी (Plasma Therapy ) का इस्तेमाल किया गया था। 1918 में स्पेनिश फ्लू तमाम लोगों की जान ले चुका था, इस दौरान इस थेरेपी का विकास किया गया। इसके बाद कई संक्रमित बीमारियों को दूर करने के लिए प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। इस थेरेपी (Plasma Therapy ) में जो व्यक्ति उस संक्रमण से लड़ने में कामयाब हो जाता है। उस व्यक्ति का ब्लड संक्रमित व्यक्ति के अंदर डाला जाता है। इस थेरेपी से मरीज को ठीक होने में करीब 3 से 7 दिन का समय लगता है।

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