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ICMR का दावा, प्लाज्मा थेरेपी से कम नहीं होता COVID-19 से मौत का खतरा

वर्तमान में प्लाज्म थेरेपी को कोरोना के इलाज में संजीवनी माना जा रहा है। इस थेरेपी में रक्त कोशिकाओं के माध्यम से खून में मौजूद तरल पदार्थ या प्लाज्मा को अलग किया जाता है। अब तक दावा किया जा रहा था कि प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना वायरस को शरीर से अलग किया जा सकता है। लेकिन द इंडिया काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने एक स्टडी में कहा है कि COVID-19 के लिए प्लाज्मा थेरेपी न तो मृत्यु जोखिम को कम करती है और न ही यह वायरस की गति को रोक सकती है।

ICMR का दावा, प्लाज्मा थेरेपी से कम नहीं होता COVID-19 से मौत का खतरा
ICMR का दावा, प्लाज्मा थेरेपी से कम नहीं होता COVID-19 से मौत का खतरा

Written by Rashmi Upadhyay |Updated : September 10, 2020 10:01 AM IST

कोरोनावायरस से लोगों की जान बचाने के लिए डॉक्टर और वैज्ञानिक एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। दुनियाभर में जहां तमाम वैक्सीन पर काम चल रहा है वहीं उम्मीद है कि जल्द ही कोई प्रभावी वैक्सीन लॉन्च होगी। वर्तमान में प्लाज्म थेरेपी को कोरोना के इलाज में संजीवनी माना जा रहा है। इस थेरेपी में रक्त कोशिकाओं के माध्यम से खून में मौजूद तरल पदार्थ या प्लाज्मा को अलग किया जाता है। अब तक दावा किया जा रहा था कि प्लाज्मा थेरेपी से कोरोना वायरस को शरीर से अलग किया जा सकता है। लेकिन द इंडिया काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने एक स्टडी में कहा है कि COVID-19 के लिए प्लाज्मा थेरेपी न तो मृत्यु जोखिम को कम करती है और न ही यह वायरस की गति को रोक सकती है।

प्लाज्मा थेरेपी में, ऐसे व्यक्ति के ब्लड से एंटीबॉडी को लिया जाता है जो कोरोना संक्रमित होने के बाद पूरी तरह से सही हो चुका है और फिर इन्हें कोरोना संक्रमित व्यक्ति के शरीर में डाला जाता है। इससे कोरोना के खिलाफ लड़ने में मदद मिलती है और इम्यून सिस्टम भी बूस्ट होता है। इंडिया काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा 464 मध्यम-बीमार रोगियों पर यह शोध किया गया जिन्हें सांस लेने में कठिनाई और ऑक्सीजन सेचुरेशन स्तर 93 प्रतिशत से कम पर परीक्षण किया गया था। इन लोगों को दो ग्रुप में बांटा गया था, जिसमें 235 लोगों को प्लाज्मा दिया गया जबकि 229 को केवल सामान्य निगरानी में रखा गया। जो लोग प्लाज्मा थेरेपी पर थे उन्हें 200 मिलीलीटर प्लाज्मा की दो खुराक के साथ 24 घंटे के लिए स्थानांतरित किया गया था। फिर दोनों ग्रुप की तुलना 28 दिनों के बाद की गई।

COVID-19 Vaccine

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कुल 34 रोगियों या 13.6 प्रतिशत लोग जो प्लाज्मा थेरेपी पर थे, वो या तो रिकवर नहीं कर पाएं या उनकी मौत हो गई। जबकि 31 मरीज़ या 14.6 प्रतिशत लोग जो प्लाज्मा के बजाय सामान्य निगरानी पर थे वे मर गए। अध्ययन में कहा गया है कि हर ग्रुप में 17 रोगियों को गंभीर बीमारी है। इस लिहाज से पता चलता है कि प्लाज्मा थेरेपी का कुछ खास कमाल नहीं है। हालांकि प्लाज्मा थेरेपी से कुछ लाभ जरूर हुआ। जैसे कि मरीजों में सांस की समस्या और थकान में कमी देखी गई। जबकि बुखार और खांसी जैसे लक्षणों में कोई कमी नहीं आई। बता दें कि दिल्ली, ओडिशा, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे कई राज्य कोरोनावायरस के प्रकोप से निपटने के लिए प्लाज्मा थेरेपी पर जोर देते आए हैं। दिल्ली में, 700 से अधिक रोगियों को प्लाज्मा थेरेपी दी गई है और दिल्ली सरकार द्वारा व्यापक रूप से इसे प्रचारित भी किया गया।