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भारत में अभी तक मंकीपॉक्स के 9 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जिसके मद्देनजर इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च- नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ (ICMR-NIRRCH) ने गर्भवती महिलाओं के बीच इस परेशानी को हल करने की दिशा में कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। ICMR-NIRRCH ने मुंबई के बीवाईएल नायर हॉस्पिटल के साथ मिलकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से कुछ सिफारिशें की हैं ताकि इस परेशानी को हल किया जा सके।
1-आशा कार्यकर्ताओं और दूसरे फ्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स को मंकीपॉक्स के मामलों की पहचान करने
2- समय पर मामले को रिपोर्ट करने
3- डायग्नोस्टिक लैब और ग्रामीण व शहरी इलाकों में रेफरल लिंकेज तैयार करने
4-इंस्टीट्यूशनल आइसोलेशन के लिए सुविधा केंद्रों को तैयार करना
5-गर्भवती महिलाओं और नवजातों में मंकीपॉक्स को रोकने के लिए एक टीम तैयार करना
6-जीनोमिक सर्विलांस तैयार करना
इसके अलावा गर्भवती महिलाओं के बीच मंकीपॉक्स के उपचार के लिए उपलब्ध एंटी-वायरल दवा और वैक्सीन की सुरक्षा व दक्षता पर अध्ययन करने की भी सिफारिश की गई है।
द लांसेट रिजनल हेल्थ साउथईस्ट एशिया में प्रकाशित रिपोर्ट के मुख्य लेखक डॉ. राहुल गजभिये का कहना है कि हम गर्भवती महिलाओं और नवजातों में मंकीपॉक्स के निदान और प्रंबधन के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने की सलाह देते हैं। हमें गर्भवती महिलाओं और बच्चों में मंकीपॉक्स के प्रबंधन में वैश्विक एक्सपर्ट्स को शामिल करने की जरूरत है ताकि भारत और कम आय वाले देशों के लिए सबूतों पर आधारित सही कदम उठाए जा सके।
शोधकर्ताओं का कहना है कि गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के साथ-साथ बच्चे भी मंकीपॉक्स के प्रति संवेदनशील हैं और उनमें इंफेक्शन के गंभीर व प्रतिकूल परिणाम सामने आ सकते हैं।
प्रेगकोविड रजिस्ट्री नेटवर्क के अनुभव के आधार पर ये सिफारिशे की गई हैं। प्रेगकोविड रजिस्ट्री नेटवर्क गर्भवती महिलाओं की डिटेल्स का एक केंद्रीयकृत डेटाबेस है। इसका इस्तेमाल राज्य की चिकित्सा शिक्षा और दवा विभाग व नायर अस्पताल के सहयोग के साथ तैयार किया गया है।
इन सिफारिशों में कहा गया है कि बच्चा पैदा करने वाली उम्र की करीब 22 फीसदी महिलाओं को मंकीपॉक्स का खतरा है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देश में मंकीपॉक्स वायरससे संक्रमित गर्भवती महिलाओं के प्रबंधन पर कोई सलाह नहीं दी गई है।
हालांकि गर्भवती महिलाओं में इंफेक्शन के सबूत सीमित हैं, इसलिए भ्रूण के स्वास्थ्य पर ट्रांसमिशन और प्रभाव की संभावना है। कोविड से प्राप्त अनुभव के आधार पर हम मंकीपॉक्स से संक्रमित गर्भवती महिलाओं फिर चाहे उनमें लक्षण हैं या नहीं उन्हें इंस्टीट्यूशनल आइसोलेट करने की सलाह देते हैं ताकि मां और बच्चे की निगरानी सुनिश्चित की जा सके।