
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : June 2, 2022 3:14 PM IST
कोरोना महामारी (Covid pandemic) ने दुनिया को पहले से ही उथल-पुथल कर रखा हुआ है, लेकिन साथ ही अन्य बीमारियां भी दस्तक दे रही हैं। इन बीमारियों में से ही एक है नोज-ब्लीड फीवर जिसका प्रभाव इराक में देखा जा सकता है। लेकिन फिर भी क्या हमें इस से चिंता करनी चाहिए? इसका जवाब हम आपको आईसीएमआर के एडिशनल डायरेक्टर जनरल डॉ. समीरन पांडा के जवाब से देते हैं। डॉ. समीरन कहते है कि भारत पहले से ही कई संक्रामक बीमारियों का एक हॉटस्पॉट रहा है, इसलिए भारत नोज-ब्लीड फीवर से संभावित आउटब्रेक को लेकर पहले से ही पूरी तरह से तैयार है। डॉक्टर आगे बताते हैं कि पुणे स्थित इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (एनआईवी) ने इस बीमारी के फैलाव व प्रभाव को समझने के लिए व्यापक रूप से अध्ययन किया है। यह अध्ययन मनुष्यों, जानवरों और कीटों पर किया है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार नोज ब्लीड फीवर यानी क्रीमियन कांगो हेमोरेजिक फीवर (CCHF) एक जानलेवा बीमारी है। डब्ल्यूएचओ की एक रिपोर्ट के अनुसार इस साल 111 मामलों में से 19 मौतें हुई हैं। वहीं कुछ अन्य रिपोर्ट्स के अनुसार नोज ब्लीड फीवर से ग्रसित हर 5 में से 2 लोगों की मृत्यु हो जाती है। हालांकि, सही उपचार और समय पर देखभाल की मदद से मरीज की जान बचाई जा सकती है।
क्रीमियन-कांगो हेमोरेजिक फीवर वायरस के लिए अभी तक कोई वैक्सीन तैयार नहीं हो पाई है, इसलिए इसकी रोकथाम सिर्फ एहतियात बरतने पर ही की जा सकती है। हालांकि, अभी तक भारत में इसके मामले की पहचान नहीं की गई है, लेकिन इससे प्रभावित देशों की स्थिति को देखते हुए भारतीय विभाग भी अलर्ट पर हैं।