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हैदराबाद स्थित केआईएमएस हॉस्पिटल के डॉक्टर्स का कमाल, किया ब्रीदिंग लंग का ट्रांसप्लांट

'ब्रीदिंग लंग' फेफड़ों के एक ऐसे उपकरण के माध्यम से चलता है, जो सांस लेते समय अंग को ठंडा करता है।

हैदराबाद स्थित केआईएमएस हॉस्पिटल के डॉक्टर्स का कमाल, किया ब्रीदिंग लंग का ट्रांसप्लांट
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Written by Anshumala |Published : December 13, 2021 1:42 PM IST

Lung Transplant in Hindi: हैदराबाद स्थित कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (KIMS) हॉस्पिटल के डॉक्टर्स ने कुछ ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिस पर विश्वास करना आसान नहीं है। दरअसल, डॉक्टर्स की एक टीम ने मिलकर सांस लेने वाले फेफड़े का ट्रांसप्लांट (Lung Transplant) किया है। ऐसा दावा किया जा रहा है कि यह भारत के पहले श्वास लेने वाले फेफड़े का प्रत्यारोपण (Breathing lung transplant) है। प्रत्यारोपण (एक्सवीवो अंग छिड़काव प्रणाली या XVIVO Organ Perfusion System) एक फेफड़े की बीमारी से ग्रस्त मरीज पर किया गया है। यह मरीज अगस्त 2021 से प्रतीक्षारत 10 लीटर ऑक्सीजन समर्थन पर अंतिम चरण के अंतरालीय फेफड़े की बीमारी (Interstitial Lung Disease) के इलाज के लिए इंतजार में था। यह मध्यम आयु वर्ग का रोगी था।

हैदराबाद केआईएमएस हॉस्पिटल के डॉ. संदीप अटावर और उनकी टीम ने मिलकर इस ट्रांसप्लांट (Breathing Lung transplant in Hyderabad) को रविवार सुबह सफलता से कर दिखाया। श्वास फेफड़े (Breathing lung Transplant) की प्रक्रिया ठंड में होने वाली इस्किमिया के कारण दुष्प्रभावों (Side Effects of Cold Ischemia Time) को कम करने में मदद कर सकती है और अंग के उपयोग को बढ़ाकर फेफड़ों के कार्य में सुधार कर सकती है। इसके परिणामस्वरूप 30 प्रतिशत अधिक दाता के फेफड़े (donor lungs) का उपयोग किया जाता है, जिससे अधिक प्राप्तकर्ताओं को लाभ होता है, जो फेफड़े के प्रत्यारोपण की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

क्या है ब्रीदिंग लंग ? (What is Breathing Lung?)

'ब्रीदिंग लंग' फेफड़ों के एक ऐसे उपकरण के माध्यम से चलता है, जो सांस लेते समय अंग को ठंडा करता है। यह इसे एक सब्सट्रेट समृद्ध समाधान के साथ पोषण देता है, जिसमें एंटीबायोटिक्स होते हैं, जो संक्रमण के छोटे निशान को मिटा देते हैं। डॉक्टर्स के अनुसार, ब्रोंकोस्कोपी के माध्यम से स्वसन-मार्ग की सफाई मशीन से होने के साथ-साथ कई परीक्षण भी किए जा सकते हैं, ताकि ठंडा होने से पहले फेफड़े के काम का आकलन किया जा सके और फिर प्राप्तकर्ता में प्रत्यारोपित किया जा सके। डॉ. संदीप अटावर का कहना है कि यह फेफड़े के प्रत्यारोपण का अत्याधुनिक मॉडल है और अंग पुनर्जनन अवधारणा (organ regeneration concept) का हिस्सा है।

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स्रोत: (IANS Hindi)

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