
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : June 16, 2022 2:22 PM IST
कोरोना महामारी ने दो सालों से दुनियाभर में उथल-पुथल मचा रखी है, दुनियाभर से वैज्ञानिक इससे निपटने के नए-नए तरीके खोज रहे हैं लेकिन अभी तक दुनिया इससे पूरी तरह से निपट नहीं पाई है। दरअसल हर बार कोरोना का नया वेरिएंट वैक्सीन और दवाओं को बेअसर छोड़ देता है और फिर से उस नए वेरिएंट पर जड़ से रिसर्च करना पड़ता है। हालांकि, बार-बार म्यूटेशन कर रहे इस कोरोना से लड़ने के लिए वैज्ञानिकों ने हाइब्रिड इम्यूनिटी (Hybrid Immunity) को अचूक हथियार बताया है। हाल ही में हुए एक नए अध्ययन में हाइब्रिड इम्यूनिटी से संबंधित कुछ सकारात्मक संकेत मिले। नई स्टडी में यह भी पता चला कि किस समूह के लोगों पर कोरोना वायरस का असर कम रहा और कौन सी ऐसी चीजें हैं कोरोना से बचने में मदद कर सकती हैं। तो चलिए जानते हैं आखिर क्या है हाइब्रिड इम्यूनिटी और यह शरीर में कैसे बनती हैं।
सबसे पहले आपको इम्यूनिटी के बारे में समझना होगा, जिसे प्रतिरक्षा प्रणाली भी कहा जाता है। शरीर में संक्रमणों से लड़ने वाले प्रणाली को प्रतिरक्षा प्रणाली या रोग प्रतिरोधक क्षमता कहा जाता है। उदाहरण के लिए अगर आप कोविड 19 से संक्रमित हो जाते हैं, तो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस से लड़ने के लिए एंटीबॉडी तैयार करते हैं। ये एंटीबॉडी आपके शरीर में जब तक रहती है, उस रोग के खिलाफ आपकी इम्यूनिटी भी रहती है।
जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया कि कि जब आप कोरोना वायरस या अन्य किसी संक्रमण से ठीक हो जाते हैं, तो आपके शरीर में जब तक नेचुरल एंटीबॉडी रहती है तब तक ही इम्यूनिटी रहती है। ठीक इसी प्रकार अगर आपको वैक्सीन लग जाए तो उससे शरीर में बनने वाली एंटीबॉडी और नेचुरल एंटीबॉडी मिलकर एक मिक्स इम्यूनिटी तैयार करते हैं। इसे हाइब्रिड इम्यूनिटी कहा जाता है।
वर्तमान की बात करें तो कोरोना के मामले फिर से देश के कई शहरों में तेजी से बढ़ने लगे हैं और देखा गया है कि वैक्सीन लगवाने के बाद भी लोग संक्रमित हो रहे हैं। हालांकि, ये बात भी सच है कि वैक्सीन लगवाने के बाद ज्यादातर मामलों में लोगों को गंभीर लक्षण नहीं होते हैं और वे जल्दी ही संक्रमण से स्वस्थ भी हो जाते हैं। इसलिए संक्रमित होने से पहले ही इम्यून होना संक्रमण को गंभीर होने से रोकने में काफी प्रभावी है।
हाइब्रिड इम्यूनिटी पर कुछ अध्ययन किए जा चुके हैं, जिनमें पाया गया है कि इंफेक्शन या वैक्सीन से बनी इम्यूनिटी की तुलना में हाइब्रिड इम्यूनिटी ज्यादा प्रभावी है। अध्ययन के अनुसार जो व्यक्ति कोरोना से संक्रमित हो चुका है और उसे वैक्सीन भी लग चुकी है, उसे अन्य लोगों की तुलना में फिर से संक्रमित होने का खतरा 58 प्रतिशत कम हो जाता है।
वैसे तो हाइब्रिड इम्यूनिटी हर जगह बराबर काम कर सकती है। लेकिन विशेष रूप से ऐसे देश जहां पर वैक्सीनेशन बहुत ही कम हुआ है, वहां पर हाइब्रिड इम्यूनिटी ठीक से बन नहीं पाती है। इसलिए पर्याप्त रूप से वैक्सीन न होना ही हाइब्रिड इम्यूनिटी की नाकामयाबी का सबसे बड़ा कारण हो सकती है।
भारत में वैक्सीनेशन के आंकड़े काफी अच्छे रहे हैं और देश की कुल आबादी के लगभग 74 फीसद लोगों को वैक्सीन की एक डोज लग चुकी है। वहीं 66 प्रतिशत लोग वैक्सीन की दोनों खुराक ले चुके हैं। वहीं अगर दुनिया की बात की जाए तो कुल आबादी के 68 फीसदी लोगों ने दोनों खुराक और 62 फीसदी लोगों ने वैक्सीन की एक खुराक ली है।