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Written By: Editorial Team | Published : April 21, 2026 1:46 PM IST
भारत में गैस्ट्रोएंटरोलॉजिकल यानी पेट से जुड़ी बीमारियां एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही हैं। इसकी बड़ी वजह देश में तेजी से बढ़ता शहरीकरण, बदलती जीवनशैली और खान-पान की आदतों में बदलाव है। इन बीमारियों का दायरा काफी बड़ा है। इसमें पेट फूलना, बदहजमी, एसिडिटी, गैस्ट्रोइसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (GERD) और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS) जैसी आम समस्याओं से लेकर इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD), लीवर की पुरानी बीमारियां, पैंक्रियाटोबिलरी रोग और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां शामिल हैं। इन बीमारियों का बढ़ता बोझ यह दिखाता है कि लोगों में जागरूकता बढ़ाने, बीमारी की पहचान और मजबूत हेल्थकेयर रणनीति की तुरंत जरूरत है।
इन अहम मुद्दों को समझने के लिए Zee News एक खास कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिसमें एयर कमोडोर डॉ. भास्कर नंदी भी शामिल हैं। वे 36 साल से ज्यादा अनुभव वाले गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट, हेपेटोलॉजिस्ट और एडवांस्ड एंडोस्कोपी एक्सपर्ट हैं। विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित डॉ। नंदी देश के जाने-माने GI और लिवर साइंसेज विशेषज्ञ हैं।
इस कार्यक्रम में वे पेट से जुड़ी बीमारियों की रोकथाम, समय पर पहचान और आधुनिक इलाज के तरीकों पर अपनी बात रखेंगे।दर्शक यह पूरा कार्यक्रम Zee News नेटवर्क के YouTube चैनलपर देख सकते हैं। डॉ नंदी से फरीदाबाद के सेक्टर-8 स्थित सर्वोदय हॉस्पिटल में संपर्क किया जा सकता है। आप यह शो जी मीडिया ग्रुप (Zee Media Group) की हेल्थ वेबसाइट thehealthsite.com के YouTube चैनल पर देख सकते हैं।
शहरीकरण और बदलती लाइफस्टाइल ने गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारियों के मामलों को तेजी से बढ़ाया है। GERD अब शहरी आबादी के लगभग पांचवें हिस्से को प्रभावित कर रहा है। इसका मुख्य कारण मोटापा, ज्यादा फैट वाला खाना, अनियमित खान-पान और शारीरिक गतिविधि की कमी है। IBS एक स्ट्रेस से जुड़ी बीमारी है, जो बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करती है। इसकी सही संख्या सामने नहीं आ पाती, क्योंकि इसकी रिपोर्टिंग कम होती है और डायग्नोसिस में देर होती है। IBD, जिसे पहले भारत में बहुत कम माना जाता था, अब बड़े शहरों में तेजी से बढ़ रहा है। यह वेस्टर्न डाइट, गट माइक्रोबायोटा में बदलाव और पर्यावरणीय कारणों का असर दिखाता है।
लिवर की बीमारियां जैसे हेपेटाइटिस B और C, एल्कोहॉलिक लिवर डिजीज और नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) भी बड़ी समस्या बन चुकी हैं, जिससे देशभर में लाखों लोग प्रभावित हैं। इसके अलावा, भारत में पेट और खाने की नली के कैंसर के मामले भी ज्यादा हैं, जिनका संबंध तंबाकू, शराब, खान-पान की आदतों और हेलिकोबैक्टर पाइलोरी जैसे पुराने इन्फेक्शन से होता है।
इन बीमारियों के बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। प्रोसेस्ड फूड, ज्यादा शुगर और अनहेल्दी फैट वाली डाइट एसिड रिफ्लक्स, फैटी लिवर और मेटाबोलिक बीमारियों से सीधे जुड़ी है। फिजिकल एक्टिविटी की कमी और बढ़ता तनाव IBS और GERD जैसी समस्याओं को और गंभीर बना देता है। कुछ इलाकों में साफ-सफाई और हाइजीन की कमी से पेट के इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है, जो इलाज न मिलने पर लंबे समय की बीमारी बन सकता है।
मेडिकल साइंस में तरक्की के बावजूद भारत के हेल्थकेयर इन बीमारियों से निपटने में अभी काफी पीछे हैं। शहरी इलाकों में जहां बेहतर इलाज की सुविधा है, वहीं ग्रामीण और छोटे शहरों में प्रशिक्षित स्पेशलिस्ट की कमी है। इससे बीमारी की पहचान में देर होती है और इलाज के नतीजे भी प्रभावित होते हैं। शुरुआती लक्षणों को लेकर लोगों में जानकारी की कमी भी एक बड़ी समस्या है, जिससे जागरूकता और बचाव के प्रयासों की जरूरत और बढ़ जाती है।
इन चुनौतियों से निपटने के लिए एक समग्र रणनीति जरूरी है। इसमें जागरूकता अभियान, लाइफस्टाइल में बदलाव, स्पेशलिस्ट इलाज तक बेहतर पहुंच और मजबूत रिसर्च व निगरानी सिस्टम शामिल हैं। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, तनाव को कंट्रोल करना और समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से इन बीमारियों का बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है।
Disclaimer: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।
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