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Written By: Atul Modi | Updated : August 30, 2021 12:57 PM IST
हरी पत्तेदार सब्जियां (Green Leafy Vegetables) हमारे स्वास्थ्य और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होती हैं। हरी पत्तेदार सब्जियों में आयरन,कैल्शियम,विटामिन ए (कैरोटिन), विटामिन "सी" और "बी" जैसे विटामिन (खासकर रिबोफ्लेबिन और फोलिक एसिड), आयरन तथा कुछ मात्रा में प्रोटीन भी पाया जाता है। जो आपको कई स्वास्थ्य संबंधी लाभ प्रदान करते हैं। लेकिन क्या होगा अगर हम आपसे कहें कि बाजार में आपको जो ताजी सब्जियां मिल रही हैं, उनमें मिलावट हो सकती है? यह पता लगाना मुश्किल हो सकता है कि बाजार में आपको जो हरी सब्जियां मिल रही हैं, वे ताजी और शुद्ध हैं या नहीं। लेकिन यह पता लगाना आवश्यक है क्योंकि मिलावटी सब्जियां विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं और कैंसरकारी प्रभाव (Carcinogenic Effects) डाल सकती हैं।
तो ऐसे में यदि आप भी यह सोच रहे हैं कि बाजार से आप जो हरी सब्जियां खरीद रहे हैं अगर उनमें थोड़ी सी भी मिलावट है और इसका पता कैसे लगाया जाए, तो इसमें आपकी मदद करने के लिए हम यहां हैं। इस लेख में हम आपको भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा सुझाए एक ऐसी ट्रिक के बारे में बता रहे हैं जिससे आप हरी सब्जियों में मैलाकाइट ग्रीन (Malachite Green) की मिलावट का आसानी से पता लगा सकते हैं। साथ ही यह जान सकते हैं कि आपके द्वारा खरीदी गई हरी सब्जियां शुद्ध हैं या नहीं। आइए तो बिना समय बर्बाद किये आगे बढ़ते हैं।
मैलाकाइट ग्रीन एक टेक्सटाइल डाई (Textile Dye) है, जिसका उपयोग व्यापक रूप से मछलियों के लिए एंटीप्रोटोजोअल और एंटिफंगल दवा के रूप में किया जाता है। साथ ही इसका उपयोग व्यापक रूप से एक या अन्य उद्देश्यों के लिए फूड और हेल्थ टेक्सटाइल (Health Textile) के साथ ही कई अन्य उद्योगों में एक परजीवी नाशक (Parasiticide ) के रूप में मछली पालन में किया जाता है। यह विभिन्न प्रकार की मछलियों और अन्य जलीय जीवों पर कृमि (पेट के कीड़े) के कारण होने वाले फंगल अटैक, प्रोटोजोआ इन्फेक्शन और अन्य बीमारियों को नियंत्रित करता है।
सिर्फ इतना ही नहीं, इसकी उपयोग मिर्च, मटर और पालक जैसी सब्जियों को हरा-भरा दिखाने के लिए भी किया जाता है।
मैलाकाइट ग्रीन मानव स्वास्थ्य के लिए कई तरह से नकसानदायक साबित हो सकता है। ऐसे कई शोध हैं जिनमें इस डाई के उपयोग को स्वास्थ्य के लिए खतरा बताया है। नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन के अनुसार, इस डाई की विषाक्तता (Toxicity) का एक्सपोजर समय, एकाग्रता और तापमान के साथ बढ़ जाता है। यह कार्सिनोजेनेसिस, म्यूटेनेसिस, क्रोमोसोमल फ्रैक्चर, टेराटोजेनिकिटी और सांस में विषाक्तता (Respiratory Toxicity) का कारण बन सकती है। यहां तक कि इससे मल्टीऑर्गन टिश्यू (Multiorgan Tissue) को भी क्षति पहुंच सकती है।
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