किडनी के रोग के बारे में कितना जानते हैं आप ?

60 की उम्र में अगर क्रेटनिन लेवल ज्यादा है तो किडनी 5 फीसदी ही काम करती है। किडनी संबंधी परेशानी होने पर शरीर, आंखों और पलकों के नीचे सूजन, शाम होते-होते यह सूजन पैरों तक आ जाती है।

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Written By: Editorial Team | Published : August 30, 2018 3:45 PM IST

शरीर में इलेक्ट्रोलाइट (सोडियम, पोटेेशियम व अन्य मिनरल्स) का संतुलन बनाने का काम किडनी करती है। किडनी में दो हार्मोन होते हैं इनमें पहला ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करते हैं, जबकि दूसरा हार्मोन बोन मैरो में जाकर रेड ब्लड सेल्स (आरबीसी) बनाता है। इससे खून बनता है।

किडनी कैल्शियम बनाने भी काम करती है। क्रिएनिन के बढ़ने का मतलब है कि किडनी फंक्शन 50 प्रतिशत ही काम कर रहा है।

60 की उम्र में अगर क्रेटनिन लेवल ज्यादा है तो किडनी 5 फीसदी ही काम करती है। किडनी संबंधी परेशानी होने पर शरीर, आंखों और पलकों के नीचे सूजन आ जाती है। शाम होते-होते यह सूजन पैरों तक आ जाती है। भूख न लगना, जी मचलना, थकावट, रात के वक्त दो से तीन बार यूरिन आना और खून की कमी इसके प्रमुख लक्षण हैं।

दो तरह की होती है किडनी में  परेशानी

  1. पहली एक्यूट किडनी  डिजीज जो अचानक होती है, जिसमें किडनी की कार्यक्षमता तेजी से कम हो जाती है। इसके कई कारण होते हैं जिसमें शरीर में किसी तरह का संक्रमण, उल्टी, दस्त, मलेरिया, दर्द निवारक दवाओं का अत्‍यधिक सेवन और ब्लड प्रेशर का लगातार कम होना शामिल है। अगर एक्यूट किडनी डिजीज का समय पर इलाज करवाया जाए तो यह पूरी तरह से ठीक हो सकती है।
  2. क्रॉनिक किडनी डिजीज में किडनी की कार्यक्षमता धीरे- धीरे कम होती है।। इसमें ब्लड यूरिया, सीरम क्रेटनिन, सीरम इल्क्ट्रोलाइट और किडनी फंक्शन टेस्ट करवा सकते हैं। किडनी के आकार को जानने के लिए सोनोग्राफी जांच करवाते हैं एवं गंभीर स्थिति में रीनल बायोप्सी जांच कराई जाती है।

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रखें ये सावधानियां 

मरीज के वजन के हिसाब से प्रोटीन- किडनी रोग का बड़ा कारण हाई ब्‍लड प्रेशर एवं डायबिटीज है। सामान्यत: दोनों किडनी खराब होती है, लेकिन कभी-कभी एक किडनी में भी तकलीफ हो सकती है जिसे समय पर इलाज करवाकर ठीक कर सकते है। किडनी अगर थोड़ी भी ठीक है तो काम करेगी। एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रति किलो एक ग्राम प्रोटीन लेना चाहिए।

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हिसाब से पिएं  पानी- किडनी के मरीज में यूरिन कम बनता है। पानी अधिक पीने से शरीर में सूजन आएगी इससे बल्ड प्रेशर असंतुलित होगा और सांस फूलनी शुरू हो जाएगी।

डायलिसिस की जरूरत- क्रॉनिक किडनी डिजीज उन मरीजों को होती है जो एडवांस स्टेज में होते हैं। डायलिसिस से खून में मौजूद हानिकारक और विषैले तत्वों को साफ करने के बाद खून शरीर में वापस चला जाता है।

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किडनी प्रत्यारोपण- क्रॉनिक किडनी डिजीज के गंभीर होने पर किडनी ट्रासप्लांट बेेहतर विकल्प है। माता- पिता, भाई-बहन या अन्य कोई रिश्‍तेदार जो नियम के दायरे में आते हैं वे किडनी दान कर सकते हैं। किडनी प्रत्यारोपण के बाद समय पर दवा लेने के साथ खान-पान और दिनचर्या का खास ख्याल रखना चाहिए। 28 से 60 साल तक का स्वस्थ व्यक्ति किडनी दान कर सकता है।

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