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भारत में किडनी ट्रांसप्लांट का कितना खर्च आता है? जानिए स्टेप बाय स्टेप सबकुछ

World Organ Donation Day के मौके पर हम जानेंगे कि किडनी ट्रांसप्लांट करना क्यों जरूरी है और कौन व्यक्ति किसे किडनी दान कर सकता है।

भारत में किडनी ट्रांसप्लांट का कितना खर्च आता है? जानिए स्टेप बाय स्टेप सबकुछ
VerifiedMedically Reviewed By: Dr. Jitendra Kumar

Written by Rashmi Upadhyay |Updated : March 13, 2026 10:11 AM IST

भारत में किडनी रोग एक तेजी से बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बन गई है और हर साल 2,10,000 से अधिक नए मामलों का निदान होता ​है। इसका प्रमुख कारण मधुमेह और उच्च रक्तचाप है। क्रॉनिक किडनी डिसीज (CKD) के सभी मामलों में से दो-तिहाई मामले इन्ही दोनों बीमारियों की वजह से हैं। जैसे-जैसे यह बीमारी बढ़ती है, किडनियां खराब होती जाती हैं और खून से अपशिष्ट पदार्थ को प्रभावी ढंग से फ़िल्टर नहीं कर पाती हैं। अंतिम चरण के किडनी रोग (ESKD) से पीड़ित मरीज़ों के लिए उपचार के केवल दो विकल्प होते हैं - डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट। डायलिसिस जीवनरक्षक हो सकता है, लेकिन यह एक कठिन प्रक्रिया है जो जीवन की गुणवत्ता को बहुत प्रभावित करती है। वहीं, किडनी ट्रांसप्लांट उन लोगों के जीवन को पूरी तरह से बदल सकता है जो किडनी फेल्योर से जूझ रहे हैं।

किडनी प्रत्यारोपण को ESKD के लिए सबसे अच्छा उपचार माना जाता है, जो डायलिसिस की तुलना में मरीजों को बेहतर गुणवत्ता वाला जीवन और लंबी आयु प्रदान करता है। हालांकि, भारत में डोनर किडनी की मांग बहुत अधिक है, जबकि इसकी उपलब्धता बेहद कम है। वर्तमान में, 5% से भी कम किडनी फेल्योर के मरीज जीवन बचाने वाले ट्रांसप्लांट प्राप्त कर पाते हैं। इस बड़ी असमानता के कारणों के अनेक पहलू हैं। अकॉर्ड सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में नेफ्रोलॉजी और ट्रांसप्लांट मेडिसिन विभाग के डायरेक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार कहते हैं कि अंग दान के बारे में जागरूकता की कमी, सांस्कृतिक प्रतिबंध, और प्रक्रिया से जुड़ी गलत धारणाएं ट्रांसप्लांट के लिए किडनी उपलब्धता की इस कमी के लिए सामूहिक रूप से जिम्मेदार हैं। इसके अलावा, ट्रांसप्लांट सर्जरी की उच्च लागत, जो ₹5 लाख से ₹15 लाख तक हो सकती है, आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इस उपचार से वंचित कर देती है।

भारत सरकार का क्या एक्शन है?

इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए, भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं। साल 2011 में मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम (THOA) में संशोधन किया गया था, ताकि मृत्यु पश्चात अंग दान को बढ़ावा दिया जा सके और प्रत्यारोपण गतिविधियों के लिए एक नियामक ढांचा स्थापित किया जा सके। राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण कार्यक्रम भी शुरू किया गया, ताकि सभी नागरिकों के लिए जीवन बदलने वाले प्रत्यारोपण की पहुंच को बेहतर बनाया जा सके। कई गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) ने क्राउडफंडिंग जैसी अभिनव समाधान का लाभ उठाते हुए वंचित मरीजों के लिए प्रत्यारोपण को अधिक किफायती बनाने का प्रयास किया है। ये संगठन विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से व्यक्तियों और बच्चों को अंग प्रत्यारोपण प्राप्त करने में सहायता करते हैं।

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कौन; किसे किडनी ट्रांसप्लांट कर सकता है?

हर व्यक्ति के पास किडनी, लीवर, पैन्क्रियास (अग्न्याशय), फेफड़े और ह्रदय सहित आठ अंगों तक दान करने की क्षमता होती है। जबकि मृत अंग दान महत्वपूर्ण होता है, लेकिन जीवित दान, विशेष रूप से किडनी का दान, भी जीवन बचा सकता है। THOA के तहत, माता-पिता, भाई-बहन, और पति/पत्नी जैसे करीबी रिश्तेदार अपने प्रियजनों को किडनी दान करने के लिए पात्र होते हैं।

क्यों जरूरी है किडनी दान करना?

अंग दान में बाधाओं को दूर करके, हम किडनी फेल्योर से पीड़ित अनगिनत व्यक्तियों के जीवन को बदल सकते हैं। बढ़ी हुई जागरूकता, प्रत्यारोपण तक किफायती पहुंच, और एक मजबूत नियामक ढांचा यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हैं कि प्रत्येक जरूरतमंद मरीज को जीवन का उपहार मिल सके।

किडनी दान परम दानशीलता की एक ऐसी कृति है, जो किडनी रोग के गंभीर परिणामों का सामना कर रहे लोगों को जीवन का दूसरा मौका दे सकती है। एक समाज के रूप में अंग दान को बढ़ावा देने के लिए एकजुट होकर, हम जरूरतमंदों के जीवन को बचा सकते हैं और सुधार सकते हैं, और वास्तव में भारत में स्वास्थ्य देखभाल परिदृश्य को बदल सकते हैं।

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Disclaimer : प्र‍िय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्‍य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसल‍िए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए ज‍िम्मेदारी का दावा नहीं करता है।