नए हेल्थ बजट पर क्या प्रतिक्रियाएं दे रहे डॉक्टर? एक्सपर्ट्स से जानें आम जनता को कितना फायदा मिल पाएगा?

Union Budget 2026: फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण ने 2026 के नए बजट में स्वास्थ्य के किन क्षेत्रों को बढ़ाने की बात की और उनसे क्या फायदा मिलेगा आदि के बारे में आज हम एक्सपर्ट्स से इस बारे में बात करेंगे।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : February 1, 2026 5:09 PM IST

Expert Reaction on Health Budget 2026: आज (1 फरवरी) को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार अपना नौंवा बजट पेश किया जिसमें उन्होंने विकसित भारत का लक्ष्य रखते हुए हेल्थ सेक्टर को काफी महत्वपूर्ण माना। देश को हेल्थ एंड सर्विसेस सेक्टर में ग्लोबल हब बनाने के लिए सरकार बड़े कदम उठाने की तैयारी में है। एक मजबूत हेल्थ सिस्टम बनाने के साथ-साथ मेडिकल रिसर्च और मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देने की कोशिश की गई। लेकिन इस पर हेल्थ एक्सपर्ट्स भी अपनी-अपनी राय दे रहे हैं, जिनके बारे में हम आगे इस लेख में जानेंगे।

डॉ. आशीष चौधरी, मैनेजिंग डायरेक्टर, आकाश हेल्थकेयर

“सरकार का एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स पर फोकस हमारे हेल्थकेयर वर्कफोर्स को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 1 लाख AHPs और 1.5 लाख केयरगिवर्स को ट्रेनिंग देने से एलाइड और जेरियाट्रिक केयर (बुजुर्गों की देखभाल) में मौजूद अहम कमी को पूरा किया जा सकेगा। मेडिकल टूरिज्म और आयुर्वेद से जुड़ी पहलों के साथ मिलकर यह भारत को व्यापक स्वास्थ्य सेवाओं का ग्लोबल हब बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार करता है।”“निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में पांच क्षेत्रीय मेडिकल टूरिज्म हब स्थापित करने की सरकार की योजना भारत के हेल्थकेयर सेक्टर के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इन हब्स में समर्पित आयुष केंद्र शामिल होने से समग्र उपचार को बढ़ावा मिलेगा और अंतरराष्ट्रीय मरीजों को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। ऐसे कदम न केवल उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भारत की वैश्विक पहचान को मजबूत करेंगे, बल्कि देशभर में हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर और मेडिकल उत्कृष्टता को बढ़ाकर विकसित भारत के विजन में भी योगदान देंगे।”“स्वास्थ्य के लिए बायोफार्मा पर जोर देना, खासकर लाइफस्टाइल बीमारियों को ध्यान में रखते हुए, बायोफार्मा शक्ति जैसी पहल, रिसर्च के लिए राष्ट्रीय संस्थान, क्लिनिकल ट्रायल्स को समर्थन और सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) को मजबूत करना—ये सभी कदम देश की क्षमताओं को बढ़ाएंगे और भारत को ग्लोबल बायोफार्मा हब के रूप में स्थापित करने में मदद करेंगे। आयुर्वेद और योग केंद्रों सहित क्षेत्रीय मेडिकल टूरिज्म हब विकसित करने की योजना के साथ मिलकर ये पहलें न सिर्फ मरीजों की देखभाल बेहतर करेंगी, बल्कि भारत को समग्र और उन्नत इलाज के लिए एक पसंदीदा वैश्विक गंतव्य भी बनाएंगी।”“17 महत्वपूर्ण दवाओं और मेडिसिन पर बेसिक कस्टम ड्यूटी को खत्म करने का सरकार का फैसला स्वागत योग्य कदम है, जिससे कैंसर मरीजों के लिए जरूरी इलाज अधिक किफायती हो सकेगा। इसके साथ ही, व्यक्तिगत उपयोग के लिए दवाओं, मेडिसिन और मेडिकल फूड के आयात पर छूट की सूची में सात और दुर्लभ बीमारियों को शामिल करना विशेष जरूरत वाले मरीजों के लिए काफी लाभकारी होगा। ये कदम जीवनरक्षक उपचार तक पहुंच बढ़ाने और मरीजों व उनके परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।”

डॉ. एन.के. पांडे, चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, एशियन हॉस्पिटल

“निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी में क्षेत्रीय मेडिकल हब स्थापित करना भारत के हेल्थकेयर इकोसिस्टम के लिए एक दूरदर्शी कदम है। एलाइड और जेरियाट्रिक सेवाओं पर जोर देने से मरीजों के इलाज के परिणामों में काफी सुधार होगा। इसके अलावा, आयुर्वेद और योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने से ग्लोबल मेडिकल टूरिज्म में भारत की स्थिति और मजबूत होगी।”“17 महत्वपूर्ण कैंसर दवाओं और मेडिसिन पर बेसिक कस्टम ड्यूटी हटाना और सात दुर्लभ बीमारियों के लिए छूट का दायरा बढ़ाना मरीजों की देखभाल के लिहाज से एक बड़ा कदम है। चिकित्सकीय रूप से इससे जरूरी इलाज तक समय पर पहुंच तेज हो सकती है, इलाज में देरी कम होगी और मरीजों के परिणाम बेहतर होंगे, खासकर उन मरीजों के लिए जो विशेष दवाओं पर निर्भर हैं। अस्पताल के नजरिए से, ऐसे नीतिगत फैसले बेहतर उपचार योजना बनाने में मदद करते हैं और जीवन-घातक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज देने की हमारी क्षमता को मजबूत करते हैं।”

राजनीश भंडारी, फाउंडर, NeuroEquilibrium

“केंद्रीय बजट ने हेल्थकेयर को भारत की विकास और सामाजिक मजबूती की रणनीति के केंद्र में रखा है। बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग हब को बढ़ाने पर फोकस से भारत की ग्लोबल लाइफ-साइंसेज हब के रूप में स्थिति मजबूत होगी। 1 लाख एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स और 1.5 लाख केयरगिवर्स की ट्रेनिंग हेल्थकेयर सेक्टर की मानव संसाधन जरूरत को सीधे पूरा करती है। नए मानसिक स्वास्थ्य संस्थान और बड़े स्तर के ट्रॉमा सेंटर्स की स्थापना, साथ ही जेरियाट्रिक केयर, मेडिकल असिस्टिव डिवाइसेज और योग के लिए लक्षित बजट—ये सभी कदम व्यापक और सुलभ इलाज की दिशा में एक निर्णायक बदलाव दिखाते हैं। दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरणों और AI आधारित कृत्रिम अंगों के विकास को समर्थन भी स्वागत योग्य कदम है। ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद का विस्तार, मेडिकल वैल्यू टूरिज्म के लिए पांच हब बनाना और आयुर्वेद एक्सपोर्ट पर नया फोकस यह संकेत देता है कि भारत पारंपरिक चिकित्सा को आधुनिक हेल्थकेयर उत्कृष्टता के साथ जोड़ना चाहता है। कुल मिलाकर, ये कदम बीमारी-केंद्रित इलाज से आगे बढ़कर रोकथाम आधारित, समग्र वेलनेस और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी हेल्थकेयर सिस्टम की ओर भारत को ले जाते हैं।”

डॉ. विनीत मल्होत्रा, डायरेक्टर, VNA हॉस्पिटल

“एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स और केयरगिवर्स में निवेश मरीजों की पहुंच और इलाज की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक बेहद जरूरी कदम है। क्षेत्रीय मेडिकल हब और निजी क्षेत्र की साझेदारी पर फोकस से हेल्थकेयर की पहुंच बढ़ेगी। आयुर्वेद और योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना पारंपरिक और रोकथाम आधारित चिकित्सा में भारत की नेतृत्व क्षमता को मजबूत करता है।”

डॉ. हृषिकेश पाई, कंसल्टेंट गायनेकोलॉजिस्ट एवं IVF स्पेशलिस्ट, लीलावती हॉस्पिटल मुंबई एवं फोर्टिस हॉस्पिटल्स दिल्ली व चंडीगढ़

“ हेल्थ एजुकेशन और केयरगिविंग को बढ़ावा देने की सरकार की योजना मातृत्व देखभाल और जेरियाट्रिक केयर पर सीधे असर डालेगी। मेडिकल टूरिज्म से जुड़ी पहलों के साथ मिलकर यह विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं देने के नए अवसर पैदा करती है। आयुर्वेद और योग को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलने से भारत की समग्र स्वास्थ्य प्रणाली और मजबूत होगी।”

डॉ. प्रवीण गुप्ता, चेयरमैन - मैरिंगो एशिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो एंड स्पाइन (MAIINS)

“भारत की बढ़ती बुजुर्ग आबादी को देखते हुए एलाइड और जेरियाट्रिक केयर वर्कफोर्स का विकास बेहद जरूरी है। 1.5 लाख प्रशिक्षित केयरगिवर्स पर जोर देना लंबे समय के लिए गुणवत्तापूर्ण देखभाल की प्रतिबद्धता को दिखाता है। मेडिकल टूरिज्म हब और आयुर्वेद संस्थानों के साथ भारत उन्नत और समग्र स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बन सकता है।”

डॉ. रवि कपूर, फाउंडर एवं डायरेक्टर, सिटी एक्स-रे एंड स्कैन क्लिनिक

“ऑप्टोमेट्री और रेडियोलॉजी जैसे क्षेत्रों में एलाइड हेल्थ संस्थानों को बढ़ावा देने से डायग्नोस्टिक्स और मरीजों की देखभाल मजबूत होगी। केयरगिवर्स और एलाइड स्टाफ के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम से समग्र रूप से सेवा की गुणवत्ता बेहतर होगी। आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा, जिसमें आयुर्वेद भी शामिल है, का एकीकरण भारत के हेल्थकेयर विकास के लिए संतुलित रणनीति है।”

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।

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