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कितनी देर तक सुरक्षित है एल्‍युमीनियम फॉइल में रखा खाना

हवा में भी यह घुला होता है जो सांस के द्वारा शरीर में जाता है। लेकिन यह इतनी कम मात्रा होती है कि शरीर को नुकसान नहीं करती।

कितनी देर तक सुरक्षित है एल्‍युमीनियम फॉइल में रखा खाना
The researchers advised against the preparation and storage of, in particular, acidic and salty foods in uncoated aluminium articles or aluminium foil.@shutterstock.

Written by Yogita Yadav |Published : December 20, 2018 6:14 PM IST

इन दिनों एल्‍युमिनियम फॉइल का धड़ल्‍ले से इस्‍तेमाल हो रहा है। घर से लेकर बाहर तक हर जगह इसी में खाना पैक किया जा रहा है। जबकि किडनी विशेषज्ञ इसे स्‍वास्‍थ्‍य के लिए बहुत ज्‍यादा हानिकारक मानते हैं। आइए पता लगाते हैं कि एल्‍युमिनियम फॉइल में खाना रखने के क्‍या नुकसान होते हैं और कितनी देर तक इसमें रखा खाना खाने के लिए सुरक्षित होता है।

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एल्‍युमिनियम का प्रयोग

एल्युमिनियम के बर्तन जैसे कढ़ाई, देगची, फ्राइंग पैन आदि और एल्युमिनियम फॉइल का उपयोग लगभग सभी घरों में होता है। एल्युमिनियम वजन में हल्का होता है, तुरंत गर्म हो जाता है और सस्ता होता है। इन्ही गुणों के कारण इसका उपयोग रसोई में बहुतायत से होता है। विशेष कर प्रेशर कुकर दाल और सब्जी जल्दी बनाने के लिए काम में लिया जाता है। एल्युमिनियम की पतली फॉइल का उपयोग भी खाना पैक करने और कुछ विशेष प्रकार के व्यंजन बनाने में होता है।

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एल्युमिनियम के नुकसान

एल्युमिनियम धरती पर ज्यादा मात्रा में पायी जाने वाली धातुओं में से एक है। पीने के पानी और खाने पीने की चीजें जैसे फल सब्जी आदि में थोड़ी बहुत एल्युमिनियम की मात्रा होती है।  हवा में भी यह घुला होता है जो सांस के द्वारा शरीर में जाता है। लेकिन यह इतनी कम मात्रा होती है कि शरीर को नुकसान नहीं करती। धरती पर पाए जाने वाले खनिज जैसे लोहा, तांबा, कैल्शियम आदि की शरीर को जरुरत होती है, लेकिन एल्युमीनियम की जरुरत बिल्कुल नहीं होती। यह शरीर के लिए एक अनावश्यक पदार्थ है जो अंदर जाने पर विषैले तत्वों की तरह मल मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाता है। अधिक मात्रा में एल्युमिनियम का शरीर में जाना नुकसान देह हो सकता है। जब भी एल्युमिनियम के बर्तन में या फॉइल में भोजन पकाया जाता है तो एल्युमिनियम की कुछ मात्रा उसमें घुल जाती है।

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एल्युमिनियम के बर्तन या फॉइल में खाना ज्यादा देर तक रखने से भी उसमे एल्युमीनियम घुल सकता है।

एल्युमिनियम की अधिकता से एल्जाइमर नामक बीमारी होने की संभावना बताई जाती है। इस बीमारी में मस्तिष्क की कोशिकाओं को नुकसान होता है जिसके कारण स्मरण शक्ति कम होना और दिमागी कार्यविधि में कमी आना हो सकता है। एल्जाइमर से ग्रस्त लोगों में अक्सर एल्युमिनियम की अधिकता पाई जाती है। इस पर अभी रिसर्च जारी है।

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गुर्दे या किडनी की समस्या से ग्रस्त लोगों को सावधान रहना चाहिए। क्योंकि ऐसे में किडनी पर्याप्त मात्रा में एल्युमिनियम शरीर से बाहर नहीं निकाल पाती और यह शरीर में इकठ्ठा होने लगता है। इससे हड्डियाँ कमजोर हो सकती हैं और दिमागी समस्या पैदा हो सकती है। खासकर बच्चों को इस तरह का असर अधिक होता है।

कितना एल्‍युमिनियम है सुरक्षित

खाना यदि तेज आंच पर एल्‍युमिनियम के बर्तन में पकाया जाए तो इसमें ज्‍यादा मात्रा में एल्‍युमिनिय घुल जाती है, इसलिए जब भी ऐसे बर्तनों में खाना पकाया जाए तो धीमी आंच पर ही पकाएं और पकने के बाद तुरंत खाली कर लें।

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फॉइल में खाना कितनी देर तक रखा गया है इस पर भी निर्भर करता है कि यह आपके लिए कितना नुकसानदायक है। बहुत गर्म खाना खासतौर से लिक्विड या खट्टे व्‍यंजन फॉइल में न लपेटें। रोटी परांठा आदि भी अगर उसमें रैप करना है तो उसकी भाप निकल जाने के बाद ही इसमें डालें।

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