वायु प्रदूषण से गैस चैम्बर बने दिल्ली जैसे महानगरों में कैसे रहे हेल्दी ?

ज्यादातर महानगरों में रहने वाले लोग इसको लेकर ज्यादा सतर्कता नहीं रखते हैं जिसकी वजह से कई तरह की बीमारियां समय से पहले ही लोगों में हो रही हैं।

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Written By: akhilesh dwivedi | Published : January 29, 2019 2:11 PM IST

विश्वभर में वायु प्रदूषण की समस्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। विश्व के सभी देशों के महानगर गैस चैम्बर में बदल रहे हैं। भारत के प्रमुख चार महानगरों में वायु की गुणवत्ता बेहद खराब हो गयी है। दिल्ली, मुंबई और कोलकाता की हवा पूरे वर्ष सांस लेने लायक नहीं रहती है। इस कठिन दौर में इन महानगरों में रहते हुए अपने आपको कैसे स्वस्थ्य रखा जा सकता है ये सबसे बड़ा सवाल है।

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हम यहां कुछ ऐसे फैक्ट्स के बारे में जानने की कोशिश करते हैं कि कैसे कुछ नेचुरल तरीकों को अपनाकर हेल्दी लाइफ पायी जा सकती है। ज्यादातर महानगरों में रहने वाले लोग इसको लेकर ज्यादा सतर्कता नहीं रखते हैं जिसकी वजह से कई तरह की बीमारियां समय से पहले ही लोगों में हो रही हैं। आइए जानते हैं वायु प्रदूषण में रहते हुए खुद को कैसे हेल्दी बनाए रख सकते हैं।

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फेफड़ों का कैसे रखें ख्याल ?

हम अगर अपने फेफड़ों की बात करें तो 1 मिनट हम 18 के आस-पास सांस लेते हैं और इसके हिसाब से एक दिन में लगभग 26 हजार बार सांस लेते हैं। इस दौरान हम वायु प्रदूषण वाले महानगरों में अरबों की संख्या में प्रदूषण वाले कणों को अंदर लेते हैं। इन कणों से होने वाले नुकसान से बचने के लिए नेचुरोपैथी को अपने रोजाना लाइफ में अपनाना चाहिए।

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नेचुरोपैथी में क्या करना चाहिए ? 

naturopathy-air pollution-in-hindi-THS नेचुरोपैथी और वायु प्रदूषण। ©Shutterstock.

नेचुरोपैथी एक तरह से आयुर्वेद का ही एक अंग है इसमें हम अपने खान-पान में ऐसी चीजों को शामिल करते हैं जो शरीर में आने वाले विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर करने के साथ-साथ उनसे होने वाले नुकसान से भी बचाते हैं।

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स्टीम थेरेपी 

नेचुरोपैथी में सबसे प्रमुख चीज है स्टीम थेरेपी जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को आसानी से बाहर करती है। स्टीम थेरेपी में पेपरमिंट और युकेलिप्टस के तेल को गरम पानी में डालकर उसकी भाप में सांस लेना होता है। इससे सांस लेने वाले तंत्रों का शोधन होता है।

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च्यवनप्राश का सेवन 

च्यवनप्राश के सेवन से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वायु प्रदूषण की वजह से होने वाली बीमारियों के खतरे को भी कम करता है।

डिटॉक्स चाय 

प्रदूषण से शरीर में आने वाले विषैले पदार्थ को डिटॉक्स के माध्यम से आसानी से बाहर किया जा सकता है। शरीर को डिटॉक्स करने के लिए सबसे बेहतर तरीका होता है डिटॉक्स चाय का सेवन नियमित तौर पर करना। इसके अलावा मुलेठी, अदरक और हल्दी से बना काढ़ा पीने से शरीर का शोधन होता है।

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योग व प्राणायाम 

भारत में योग को लेकर कई तरह के शोध हो चुके हैं। योग से कई तरह के रोगों को ठीक किया जा सकता है। एम्स जैसे संस्थान में भी इस बात पर कई शोध हो चुके हैं। एक्सपर्ट्स के अनुसार अनुलोम-विलोम प्राणायाम, कपालभांति प्रणायाम शरीर को ऊर्जावान बनाने के साथ सांस के रोगों से दूर रखते हैं।

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