
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : February 2, 2026 4:24 PM IST
Budget ke Bad Konsi Medicine Sasti Hogi: दवाएं हमारे जीवन का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई है, कुछ क्रॉनिक बीमारियां जिनका कोई इलाज नहीं है उन्हें कंट्रोल रखने के लिए भी जीवनभर कुछ खास दवाएं खानी पड़ती है। इसलिए उस व्यक्ति के जीवन के लिए सबसे ज्यादा जरूरी हैं। लेकिन दवाओं का खर्च उठाना भी आज के समय में आसान नहीं रहा है और खासतौर पर तब जब दवाएं विदेशों से आ रही हों। दरअसल, विदेशों से आने वाली दवाओं पर कस्टम ड्यूटी और टैक्स लगते हैं और मजबूरी में भारत को कुछ दवाएं महंगे दामों पर खरीदनी पड़ती हैं। वे दवाएं हम खुद बना सकते हैं और अब भारत इसी लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है।
बीते रविवार (1 फरवरी) को सेंट्रल फाइनेंस मिनिस्टर निरमला सीतारमण बजट 2026-27 में लोक स्वास्थ्य को काफी महत्व दिखाया। बढ़ते ट्रीटमेंट खर्च और विदेशों से आयात होने के कारण कुछ दवाओं का दाम बहुत ज्यादा बढ़ते देख उन्होंने बायोफार्मा शक्ति योजनी रखी। इसके लिए 10,000 रुपए का फंड रखा गया जो भारत के मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के कई पहलुओं को बदलकर आसान बना सकता है।

10000 करोड रुपए का 'बायो फार्मा शक्ति' पहल की घोषणा होना इस सेक्टर के लिए एक गेम चेंजर फैसला है क्योंकि इस समय हम नान-कम्युनिकेबल बीमारियों में वृद्धि देख रहे हैं तो घरेलू बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स पर ज़ोर देने से यह सुनिश्चित होगा कि नए जमाने की थेरेपी खासकर डायबिटीज और ऑटोइम्यून बीमारियों के लिए 'मेड इन इंडिया' हों और सभी के लिए उपलब्ध हों।
कैंसर और अन्य कई बीमारियां कई दुर्लभ बीमारियां भी शामिल है, उके ऊपर से कस्टम ड्यूटी हटाने की घोषणा और जिला स्तर पर इमरजेंसी-ट्रॉमा सुविधाओं को बढ़ाना, हर व्यक्ति के लिए सुलभ और फायदेमंद रहने वाला है। इसपर होने वाला खर्च भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस व्यवस्था से कई फायदे होंगे जैसे समय पर जांच, प्रिवेंटिव डायग्नोसिस और एआई आधारित प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल पाना आदि। इससे हर किसी को और हर जगह पर लोगों को हेल्थ कवरेज मिलने में मदद मिलेगी और 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की हेल्थकेयर अर्थव्यवस्था का लक्ष्य मजबूत होता है। जिला स्तर पर जहां इलाज मिलने में 48 घंटे लगते हैं, उसे घटाकर 18 से 24 घंटे तक लाने की तैयारी है। जिससे ग्रामीण इलाकों में मृत्यु दर का अंतर लगभग आधा हो सकता है।
कैंसर, डायबिटीज और अन्य कई नॉन-कम्युनिकेबल डिजीज की बीमारिया हैं जिनका इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली कई दवाएं विदेशों से मंगवाई जाती हैं। हाई डिमांड, कस्टम ड्यूटी और अन्य टैक्स आदि के कारण इन दवाओं का रेट बहुत ज्यादा हो जाता था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कैंसर के इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली 17 दवाएं जिनमें राइबोसिक्लिब (Ribociclib) और वेनेटोक्लैक्स (Venetoclax) जैसी जरूरी दवाएं शामिल हैं। इसके अलावा दुर्लभ बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 7 अन्य दवाएं भी हैं जिनपर से कस्टम ड्यूटी को हटा देने की घोषणा की है।
भारत अब हेल्थ सेक्टर में भी “आत्मनिर्भर भारत” बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। सरकार के अनुसार जिन दवाओं को हम बाहर से महंगे रेटों पर मंगवाते हैं, उन्हें हम खुद बनाने पर काम करेंगे। बायोफार्मा शक्ति मिशन के तहत जिसके लिए 10,000 करोड़ का फंड दिया जाएगा उसके जरिए अब भारत लगभग 35 ऐसी सबसे जरूरी दवाएं खुद बनाएगा जिन्हें विदेशों से आयात करना पड़ता था। यहां तक कि इन दवाओं का ज्यादातर कच्चा माल भी खुद भारत ही तैयार कर रहा है, ताकि जितना हो सके खर्च को कंट्रोल किया जा सके।
यह समझना बहुत जरूरी है कि आखिर फार्मा और बायोफार्मा में क्या अंतर है। दरअसल, वैसे तो ये दोनों एक ही इंडस्ट्री के अलग-अलग हिस्से हैं। फार्मा यानी फार्मास्यूटिकल्स में आमतौर पर वे दवाएं बनाई जाती हैं, जो केमिकल सिंथेसिस से बनती हैं। इमें आमतौर पर एस्पिरिन जैसी दवाएं शामिल हैं। वहीं बायो-फार्मा यानी फार्मास्यूटिकल्स जीवाश्म से उपयोग से दवाएं बनाई जाती हैं जैसे बैक्टीरिया और व्यक्ति की कोशिकाएं आदि। इसमें आमतौर पर वैक्सीन, इंसुलिन, मोनोकॉकल एंटीबॉडी आदि शामिल हैं।
कुछ दवाओं का निर्माण करने और उन्हें निर्यात करने में भारत का नाम आज भी प्रमुख देशों में आता है और बायो-फार्मा शक्ति जैसे मिशन की मदद से फार्मा क्षेत्र में एक ग्लोबल हब बनने की राह पर है। इससे एक खास इकोसिस्टम तैयार होगा जिससे दवाओं का उत्पादन और मजबूत होगा। इससे न सिर्फ दवाएं सस्ती होंगी बल्कि रोजगार को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी
अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।