बच्चों को एम आर टीका लगवाना कितना जरूरी, सावधानियां व साइड इफेक्ट्स

मीजल्स तथा रुबेला बेहद खतरनाक बीमारियां हैं। मीजल्स से पीड़ित पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों की अक्सर न्यूमोनिया, डायरिया एवं मस्तिष्क विकार संबंधी बीमारियों से असमय मृत्यु हो जाती है।

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Written By: akhilesh dwivedi | Published : November 19, 2018 1:56 PM IST

मीजल्स तथा रुबेला बेहद खतरनाक बीमारियां हैं। मीजल्स से पीड़ित पांच वर्ष तक की आयु के बच्चों की अक्सर न्यूमोनिया, डायरिया एवं मस्तिष्क विकार संबंधी बीमारियों से असमय मृत्यु हो जाती है। कॉग्नीटल रुबेला सिंड्रोम संक्रमित गर्भवती को गर्भपात या अपरिपक्व बच्चे का जन्म जैसी समस्या होती है। साथ ही शिशु को भी कई जन्मजात बीमारियां होने का खतरा रहता है।

दुनिया में प्रतिवर्ष करीब एक लाख बच्चे सीआरएस संक्रमित पैदा होते हैं। यूनिसेफ ने वर्ष 2030 तक बच्चों की मृत्युदर नियंत्रित करने के लिए इस प्रकार की सभी बीमारियों से मुक्ति का लक्ष्य रखा है।

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बच्चों की दो आम बीमारियां खसरा और रूबेला से एम आर (MR vaccine) के वैक्सीन के द्वारा बचा सकते हैं। खसरा में शिशु को बुखार, त्वचा पे चकत्ते, खांसी, नाक का बहना और आँखों में पानी के लक्षण देखने को मिलते हैं। ज्यादा गंभीर स्थिति में शिशु को कान का संक्रमण, दस्त, निमोनिया, मस्तिष्क को छती और अंतिम चरण में मृत्यु भी हो सकती है।

यह टीका क्यों दिया जाता है ?

एम आर (खसरा, रूबेला) का वैक्सीन शिशु को खसरा और रूबेला इन दोनों बिमारियों से बचाता है। भारत सरकार के अनिवार्य टीकाकरण कार्यकर्म में अपने शिशु को सारे टिके टीकाकरण सारणी के अनुसार अवश्य लगवाएं ताकि आप का शिशु कई प्रकार की गंभीर बीमारियोँ से बचा रहे।

सावधानी

अगर आप के शिशु को बुखार है तो जब तक की आप का बच्चा पूर्ण रूप से ठीक न हो जाये उसे एम एम आर के टिका (MR vaccine) वैक्सीन न लगवाएं। अगर आप के शिशु को एम एम आर के टिका के प्रति गंभीर एलर्जी हो तो उसे यह टिका न लगवाएं। टीका न लगवाने से पहले डॉक्टर से बात जरूर करें।

साइड इफेक्ट्स

  • शरीर में उस जगह पे दर्द जहाँ पे टिके का shot दिया गया है
  • त्वचा का लाल होना या सूजन का होना जिस जगह पे टिका लगाया जाता है।
  • बुखार व हल्के लाल चकत्ते भी हो सकते हैं।
  • जोड़ों में दर्द और जकड़न
  • कुछ लोगों के गाल और गर्दन में सूजन हो सकता है

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