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Written By: Kishori Mishra | Published : August 12, 2020 2:05 PM IST
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Covid-19 New Research : कोरोनावायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, फिर भी कुछ ऐसे लोग भी हैं, जो इसे अब नजरअंदाज करने लगें हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए लोगों ने इससे डरना छोड़ दिया है। लेकिन आपको बता दें कि अभी भी कोरोनावायरस की गंभीरता समाप्त नहीं हुई है। पूरी दुनिया में हर दिन हजारों की संख्या में लोग अपनी जान गवां (Covid-19 New Research ) रहे हैं।
कोरोनावायरस के कुछ ऐसे मरीज भी हैं, जो थोड़ा सा इलाज करवाकर या फिर बिना इलाज के इस खतरनाक बीमारी से अपने आप ठीक हो रहे हैं। वहीं, कई लोगों के लिए कोरोनावायरस जानलेवा भी साबित हो रहा है। कोरोना के लक्षणों में इतना व्यापक अंतर देखकर दुनियाभर के वैज्ञानिक काफी हैरान हैं। हालांकि, एक नए अध्ययन में इसके कारणों का (Covid-19 New Research ) खुलासा हुआ है।
Stanford University of Medicine और कई अन्य रिसर्च सेंटर द्वारा एक नया अध्ययन किया गया है। इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने की कोशिश की है कि कोरोना वायरस के गंभीर और माइल्ड मामलों में आखिर इतना व्यापक अंतर क्यों है? अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इस बात का पता लगाने की कोशिश की है कि कोविड-19 की चपेट में आने वाले मरीज के शरीर में इम्यूनोलॉजिकल डेविएशन (इम्यून सिस्टम के प्रतिक्रिया में अंतर) क्यों हो रहा है?
अध्ययन करने वाली टीम के वैज्ञानिकों ने बताया कि मच्छरों, मक्खियों से लेकर इंसानों तक लगभग दुनिया के सभी जीवों में वायरस और दूसरे पैथोजन्स को पहचानने के लिए उनके शरीर में एक खास तरह का सिस्टम होता है, इसे ही इम्यून सिस्टम कहते हैं। शरीर के संपर्क में जैसे ही कोई वायरस या पैथोजन आता है, तो तुरंत शरीर का इम्यून सिस्टम उस वायरस और पैथोजन पर अटैक करना शुरू कर देता है। शरीर के अलग-अलग हिस्सों में पैथोजन से लड़ने वाले एक खास सेल्स होते हैं। इन सेल्स की समस्या यह है कि ये कभी भी मूव नहीं कर सकते हैं।
Microbiology And Immunology के प्रोफसर और Bali Pulendran ने इस बारे में कहा, "हमारे अध्ययन में हमने पता लगाया है कि कोरोना वायरस का सीरियस इंफेक्शन होने पर किस तरह से इम्यून सिस्टम पूरी तरह ध्वस्त हो जाता है।" वैज्ञानिकों ने इस अध्ययन के लिए 76 कोविड-19 से संक्रमित और 69 स्वस्थ लोगों के इम्यून रिस्पॉन्स पर अध्ययन किया।
इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने देखा कि गंभीर रूप से कोरोना की चपेट में आने वाले रोगी के ब्लड में एक खास मॉलीक्यूल मिला, यह मॉलीक्यूल इंफ्लेमेशन (अंदरूनी सूजन) को बढ़ाता है। इस अध्ययन में 3 मॉलीक्यूल की पहचान की गई है। ये मॉलीक्यूल फेफड़ों (Lungs) को सबसे अधिक प्रभावित करते हैं। वहीं, स्वस्थ लोगों के ब्लड में इस तरह के मॉलीक्यूल्स नहीं पाए गए हैं।
इन मॉलीक्यूल के अलावा वैज्ञानिकों को कोरोना के गंभीर मामलों के मरीजों के ब्लड में बैक्टीरियल DNA और सेल वॉल मैटीरियल भी मिले। इसे वैज्ञानिकों की भाषा में बैक्टीरियल डेबरिस (bacterial debris) कहते हैं। वैज्ञानिकों का इस बारे में कहना है कि व्यक्ति के शरीर में जितना अधिक ये बैक्टीरियल डेबरिस होगा, उतना ज्यादा मरीज की हालत गंभीर रूप लेती है।
अध्ययन में देखा गया कि गंभीर रूप से पीड़ित कोविड-19 के मरीजों बैक्टीरियल प्रोडक्ट उनके, फेफड़ों, आंत, गले और खून में पाया गया है। ऐसे में ब्लड के जरिए बैक्टीरियल मैटीरियल जिस अंग तक पहुंचता है। वह उस अंग में सूजन ला देता है। ऐसे में वायरस कई बार इम्यून सिस्टम पर हावी हो जाता है, जिसके कारण मरीज का इम्यून सिस्टम नष्ट हो जाता है।