
आशु कुमार दास
आशु कुमार दास एक अनुभवी हेल्थ कंटेंट स्पेशलिस्ट हैं। इन्हें हेल्थ कंटेंट राइटर के तौर पर काम करते हुए 6 ... Read More
Written By: Ashu Kumar Das | Published : October 8, 2025 11:06 AM IST
Medically Verified By: Dr. Vivek Jain
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कफ सिरप पीने से हुई 11 बच्चों की मौत का मामला संगीन होता जा रहा है। बच्चों की मौत जिस कफ सिरप से हुई थी, उसकी जांच के बाद ये बात सामने आई है कि कफ सिरप में डाई एथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol, DEG) नामक सॉल्वेंट मौजूद था। डाई एथिलीन ग्लाइकॉल एक जहरीला केमिकल बताया जा रहा है। डाई एथिलीन ग्लाइकॉल का इस्तेमाल गाड़ियों के ब्रेक, इंजन और पेंट में किया जाता है। कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत का कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ सालों में देश के कई हिस्सों में कफ सिरप पीने के बाद बच्चों और बड़ों में जहरीलेपन (Toxicity) के कई गंभीर मामले सामने आए हैं।
डॉ. विवेक जैन, सीनियर डायरेक्टर और यूनिट हेड-पेडियाट्रिक्स ,फोर्टिस हॉस्पिटल शालीमार बाघ के अनुसार, डाई एथिलीन ग्लाइकॉल एक प्रकार का जहर है। इसकी थोड़ी सी भी मात्रा शरीर के लिए घातक हो सकती है।डाई एथिलीन ग्लाइकॉल कोई फार्मास्यूटिकल ग्रेड (दवा में इस्तेमाल होने योग्य) पदार्थ नहीं है। फिर भी कई बार गलत तरीके से इसे Glycerin या Propylene Glycol (जो सिरप में सॉल्वेंट के रूप में इस्तेमाल किए जाते हैं) के विकल्प के रूप में मिला दिया जाता है।
डॉ. विवेक जैन बताते हैं कि कफ सिरप के फॉर्मुलेशन में स्वाद और दवा के घुलने के लिए एक सॉल्वेंट की जरूरत होती है। इसके लिए आमतौर पर ग्लिसरीन (Glycerin) या प्रोपिलीन ग्लाइकॉल (Propylene Glycol) का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन कई बार दवा की लागत को कम करने के लिए डाई एथिलीन ग्लाइकॉल का इस्तेमाल करते हैं। डाई एथिलीन ग्लाइकॉल गंधहीन और स्वादहीन होता है। इसलिए सिरप पीने वाले व्यक्ति को ये पता ही नहीं चलता है कि उसने जहर पी लिया है। यही वजह है कि कई देशों में डाई एथिलीन ग्लाइकॉल की मिलावट के कारण सिरप पीने से बच्चों की मौतें तक हो चुकी हैं।
कफ सिरप या किसी भी अन्य रूप में अगर व्यक्ति के शरीर में डाई एथिलीन ग्लाइकॉल चला जाता है, तो ये यौगिक किडनी, लिवर, नर्वस सिस्टम और पाचन तंत्र पर बुरा असर डालता है। धीरे-धीरे ये केमिकल किडनी पर बुरा प्रभाव डालते हैं और किडनी फेल होने का खतरा रहता है। डॉ. विवेक जैन के अनुसार, बच्चों की किडनी पूरी तरह डेवलप नहीं होती हैं। ऐसे में बच्चे को डाई एथिलीन ग्लाइकॉल युक्त सिरप दी जाए, तो उनका शरीर दवा को प्रोसेस नहीं कर पाता है और तुरंत किडनी फेल होने का खतरा रहता है। इससे बच्चों को तुरंत मौत भी हो सकती है।
डाई एथिलीन ग्लाइकॉल जैसा केमिकल बच्चों की सेहत पर बुरा असर न डाले, इसके लिए दवा खरीदते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है। आइए आगे जानते हैं इसके बारे में।
- केवल लाइसेंस प्राप्त मेडिकल स्टोर से दवा लें।
- दवा की पैकिंग पर निर्माता का नाम, बैच नंबर और एक्सपायरी डेट चेक करें।
- बाजार से बिना लेबल या लोकल बोतल में मिलने वाली दवा न खरीदें।
डॉ. विवेक जैन के अनुसार, सर्दी, खांसी और बुखार जैसी परेशानी में बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के कफ सिरप बिल्कुल न दें। कफ सिरप देते समय डोज और मात्रा का भी ध्यान दें। अगर बच्चा 6 महीने से छोटा है, तो कफ सिरप का इस्तेमाल, डोज और समय के बारे में डॉक्टर से जानकारी जरूर लें।