HIV positive मरीजों को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं? जानिए पूरा डाइट प्लान
किन चीजों को खाने से HIV मरीजों की हालत और भी बिगड़ सकती है ? और किन चीजों के खाने से सेहत बेहतर बनी रह सकती है. एचआईवी के मरीज को अपनी डाइट का विशेष ध्यान देना चाहिए.
शायद आपको पता नहीं कि न्यूट्रिशन की कमी से जिनको एचआईवी होता है उनके बीमार पड़ने की संभावना न सिर्फ बढ़ जाती है वरन् इस बीमारी के कारण मरने का खतरा भी बढ़ जाता है। कहने का मतलब ये है कि हेल्दी डायट लेने से शरीर का इम्युनिटी बढ़ता है जिससे इस बीमारी से लड़ने की शक्ति भी मिलती है। असल में एचआईवी इंफेक्टेड मरीज के लिए विशेष प्रकार का डायट नहीं होता है वरन् डायट में वैसे बदलाव लाया जाता है जिससे कि इम्युनिटी को बढ़ाया जा सके जिससे कि बीमारी के सारे पहलूओं को संभाला जा सके।
डॉ. मनिषा दत्ता, हर्बलाइफ ने कुछ ऐसे टिप्स शेयर किये हैं जो एचआईवी मरीजों को बेहतर रहने में मदद करेंगे। इन डाइट टिप्स को अपनाकर एचआईवी मरीज अपने जीवन को बेहतर ढंग से गुजार सकता है.
लो फैट डायट
एचआईवी के लिए जो दवाएं दी जाती है वह न्यूट्रिशन के स्टेट्स को असर करते हैं। कुछ एन्टायरट्रोवायरल्स के कारण शरीर के दवाओं को सोखने की जो प्रकिया होती है उसको प्रभावित करता है जिसके कारण पेट संबंधी समस्या होने लगती है जैसे- मतली, उल्टी या दस्त आदि। इसलिए ऐसे दवाईयों के लिए ज़रूरी होता है कि आप लो-फैट डायट लें। अपने डायट में ट्रांस फैट या हाइड्रेजेनेटेड ऑयल न लें और मार्जरीन लेने से बचें। होल मिल्क, चीज़, अंडा, लार्ड, खजूर और नारियल तेल, क्रीम और मांस में जो सैचुरेटेड फैट होते हैं उसको कम करने की कोशिश करें। कैन्ड जूस, मीठा ब्रेवरेज और हाई फैट वाला डेजर्ट जैसे केक, आईसक्रीम और कूकीज़ लेने से बचना चाहिए।
कैलोरी की मात्रा बढ़ाये
एचआईवी इंफेक्शन होने पर कैलोरी का खपत बढ़ाना ज़रूरी हो जाता है क्योंकि इस बीमारी से लड़ने के लिए इम्युन सिस्टेम को मजबूत करने की ज़रूरत होती है। इस इंफेक्शन का असर पेट पर पड़ता है जिसके कारण न्यूट्रिशन को सोखने की क्षमता क्षीण हो जाती है जिसके कारण शरीर को उसकी पौष्टिकता नहीं मिल पाती है। डायटिशियन आपके वज़न को ठीक रखने के लिए उसी तरह का डायट प्लान कर सकती है। एचआईवी पेशेन्ट को होल ग्रेन प्रोडक्ट में बार्ली, ब्राउन राइस, क्विनो, सेरल और होल ग्रेन प्रोडक्ट को डायट में नियमित रूपसे शामिल करने की सलाह आम तौर पर डायटिशियन देते हैं ताकि वज़न सही है। डायट में संतुलित मात्रा में प्रोटीन भी होनी चाहिए।
फाइबर से भरपूर डायट होना चाहिए
फाइबर से भरपूर डायट शरीर के इम्युन सिस्टेम पर दबाव नहीं डालता है। एन्टीऑक्सिडेंट और फाइटोन्यूट्रिएन्ट्स से भरपूर डायट जैसे फल, सब्जी और कार्बोहाइड्रेड से भरपूर होल ग्रेन डायट होना चाहिए। ब्राउन राइस, आलू और रतालू या शकरकंद लेना चाहिए जिससे इम्युन सिस्टेम बेहतर रहे।
ओमेगा-3 फैटी एसिड्स से भरपूर डायट
एचआईवी मरीजों के डायट में ओमेगा-3 फैटी एसिड होना ज़रूरी होता है। शाकाहारियों के लिए अलसी के बीज, तोफू, सॉयमिल्क, सोयाबीन आदि विकल्प होता है तो मांसाहारियों के लिए हेरिंग, कैन्ड हल्का तूना, ट्रॉट, वाइल्ड सालमन और सारडिन्स आदि विकल्प होता है।
पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ
हाई शुगर वाले ड्रिंक लेने जगह पर आपको ज्यादा से ज्यादा तरल पदार्थ लेना चाहिए। ताजा फल का रस बनाकर पीने से एन्टीऑक्सिडेंट का गुण मिलता है जिससे इम्युनिटी बेहतर होती है। याद रखे कि कैफीन जिन ब्रेवरेज में होता है वैसे ड्रिंक लेने से बचे नहीं तो बेचैनी या नर्वसनेस हो सकता है।
सूर्य का प्रकाश होता है ज़रूरी
नियमित रूप से धूप का सेवन करने से विटामिन डी की कमी पूरी हो जाती है जिससे इम्युन पावर बढ़ता है। इसलिए सुबह कम से कम 10 मिनट पैदल चलने बाहर जाये।